राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय प्रशासन चुनने के उद्देश्य से तीसरे चरण के तहत मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मंगलवार, 3 नवंबर को प्रदेश के 27 जिलों में फैली 116 पंचायत समितियों के तहत जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के निर्वाचन के लिए नागरिक मतदान कर रहे हैं। इस चरण में सुबह 7 बजे मतदान केंद्रों के कपाट मतदाताओं के लिए खोल दिए गए, जहां शाम 6 बजे तक लगातार वोट डाले जा सकेंगे। कुल मिलाकर 1 करोड़ 6 लाख 81 हजार 567 पात्र मतदाता इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होकर अपने प्रतिनिधि चुन रहे हैं। इससे पूर्व सोमवार को सभी मतदान दलों का अंतिम प्रशिक्षण सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था, जिसके बाद पोलिंग पार्टियों को उनके संबंधित बूथों के लिए रवाना किया गया था।
शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस विभाग ने समूचे चुनावी क्षेत्र में विधि-व्यवस्था बनाए रखने तथा निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित कराने के लिए विस्तृत सुरक्षा प्रबंध किए हैं। तीसरे चरण के तहत कुल 3716 ग्राम पंचायतों का भौगोलिक दायरा शामिल किया गया है। मतदाताओं की सुगमता को ध्यान में रखते हुए पूरे राज्य में 11,869 पोलिंग बूथ स्थापित किए गए हैं। इस दौर में जिला परिषद के 377 वार्डों और पंचायत समितियों के 2119 वार्डों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। चुनावी समर में कुल 9094 उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं, जिनमें जिला परिषद सदस्य पद के लिए 1305 प्रत्याशी तथा पंचायत समिति सदस्य पद के लिए 7789 दावेदार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
मतदाताओं का आंकड़ा और जमीनी मुद्दे
इस तीसरे चरण की मतदाता सूची में 1,06,81,567 नागरिकों का नाम दर्ज है। अगर जेंडर आधारित आंकड़ों पर नजर डालें तो इनमें 55,48,472 पुरुष मतदाता, 51,33,051 महिला मतदाता और 44 थर्ड जेंडर मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। गांव-देहात के मतदाता मुख्य रूप से पेयजल आपूर्ति, पक्की सड़कों का निर्माण, प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति और रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं जैसे स्थानीय सवालों को प्राथमिकता दे रहे हैं। 51 लाख से अधिक महिला मतदाताओं की भागीदारी को देखते हुए उनकी भूमिका नतीजों को तय करने में निर्णायक मानी जा रही है।
ईवीएम और मतपत्र से मतदान की प्रक्रिया
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के पदों के लिए वोटिंग का काम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। मंगलवार सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदाता EVM में अपना मत दर्ज कराएंगे। इसके तुरंत बाद पंचायत स्तर के अगले महत्वपूर्ण पदों के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 5 नवंबर को ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव होंगे, जिसके लिए मतपत्र यानी बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा। सरपंच और पंच पद का मतदान संपन्न होते ही उसी दिन संबंधित ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर मतगणना पूरी कर ली जाएगी। इसके अगले दिन यानी 6 नवंबर को उपसरपंच के चुनाव की कार्यवाही की जाएगी।
पहचान के लिए 11 वैकल्पिक दस्तावेजों की व्यवस्था
यदि किसी मतदाता के पास आधिकारिक मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध नहीं है, तो भी उसे मताधिकार से वंचित नहीं होना पड़ेगा। निर्वाचन आयोग द्वारा 11 वैकल्पिक फोटोयुक्त पहचान दस्तावेजों को मान्यता दी गई है। इनमें से किसी भी एक मान्य दस्तावेज को पोलिंग बूथ पर दिखाकर नागरिक अपनी पहचान सत्यापित करा सकते हैं और वोट डाल सकते हैं। इसके साथ ही प्रत्येक मतदान केंद्र पर विशेष सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि मतदाताओं को वोटर लिस्ट में अपना नाम ढूंढने और सही बूथ की जानकारी पाने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
20 नवंबर को होगी वोटों की गिनती
मंगलवार को EVM में दर्ज होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती 20 नवंबर को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। उसी दिन सभी वार्डों के औपचारिक परिणाम घोषित किए जाएंगे। दूसरी ओर सरपंच और वार्ड पंच पदों के नतीजे 5 नवंबर को ही मतदान खत्म होने के फौरन बाद ग्राम पंचायत स्तर पर सामने आ जाएंगे। इसके बाद उच्च पदों के लिए चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिसके तहत 25 नवंबर को जिला प्रमुख का चुनाव होगा और 27 नवंबर को पंचायत समितियों के प्रधानों का चुनाव संपन्न कराया जाएगा।


















