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गोबरधन योजना को मिली हरी झंडी, सीबीजी उत्पादकों को 10 साल तक मिलेगा तय दाम और पक्का खरीददारव्यापार
22 सित॰ 2026, 3:30 am (36 दिन पहले)· 2

गोबरधन योजना को मिली हरी झंडी, सीबीजी उत्पादकों को 10 साल तक मिलेगा तय दाम और पक्का खरीददार

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 23,731 करोड़ रुपये के बजट वाली गोबरधन योजना के दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत कंप्रेस्ड बायोगैस बनाने वाली इकाइयों को 10 साल तक खरीद की गारंटी और प्रशासित मूल्य मिलेगा।

स्वच्छ ईंधन उत्पादन को रफ्तार देने और कचरे से ऊर्जा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 23,731 करोड़ रुपये की लागत वाली गोबरधन योजना को विधिवत लागू कर दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) तैयार करने वाले संयंत्रों को उनकी पूरी बिक्री योग्य गैस पर सौ फीसदी तक खरीद का भरोसा, पूंजीगत वित्तीय सहायता और कम से कम एक दशक के लिए एक तय प्रशासित मूल्य प्रदान किया जाएगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस बाबत 15 सितंबर को औपचारिक दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके मुताबिक यह पूरी रूपरेखा वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर वित्त वर्ष 2035-36 तक प्रभावी रहेगी।

जैविक कचरे से स्वच्छ ऊर्जा तैयार करने का व्यापक मिशन

गोबरधन यानी 'गैल्वानाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन' कार्यक्रम का बुनियादी मकसद भारत में कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। इस तंत्र के जरिए मवेशियों के गोबर, फसलों के अवशेष, बचे हुए खाद्य पदार्थों और अन्य जैविक अपशिष्टों का वैज्ञानिक ढंग से प्रसंस्करण करके बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाती है। इस नई नीति से देश में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एक मजबूत और टिकाऊ बाजार तैयार होगा, जिससे निजी कंपनियों का निवेश भी इस क्षेत्र में तेजी से आकर्षित होगा।

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छह मजबूत स्तंभों पर टिका है योजना का पूरा ढांचा

मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मसौदे में योजना को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए छह प्रमुख आधार तय किए गए हैं। इन मुख्य स्तंभों में सीबीजी की निश्चित खरीद, पारदर्शी मूल्य निर्धारण व्यवस्था, पूंजीगत सहायता, गैस ग्रिड पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा, परियोजनाओं के लिए ऋण गारंटी सहायता और तकनीकी नवाचार को गति देने वाला सीबीजी पारिस्थितिकी चैलेंज फंड शामिल हैं। योजना के अंतर्गत उत्पादित कंप्रेस्ड बायोगैस को सीधे प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर आम उपभोक्ताओं और वाहनों तक पहुंचाने की ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी।

सिटी गैस वितरण तंत्र और क्लस्टर से जुड़ेगी आपूर्ति

नई व्यवस्था के तहत पात्रता पूरी करने वाले सीबीजी उत्पादकों को अपनी कुल बिक्री योग्य क्षमता का 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित खरीद कराने का विकल्प मिलेगा, जो तकनीकी और परिचालन व्यवहार्यता के मानकों पर आधारित होगा। इस गैस आपूर्ति को सीधे शहर गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क और संबंधित भौगोलिक क्षेत्रों की पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा। दूरदराज के संयंत्रों की गैस को बर्बाद होने से बचाने के लिए सीबीजी क्लस्टर बनाए जाएंगे, जहां से गैस एकत्र कर मुख्य संचरण पाइपलाइन में डाली जाएगी।

सीएनजी और पीएनजी वितरण में सीबीजी का हिस्सा अनिवार्य

घरेलू और परिवहन गैस वितरण करने वाली कंपनियों के लिए अब सीबीजी की खरीद और आपूर्ति का एक निश्चित कोटा तय कर दिया गया है। इन कंपनियों को अपनी कुल सीएनजी ट्रांसपोर्ट और घरेलू पीएनजी आपूर्ति में अनिवार्य रूप से सीबीजी को शामिल करना होगा। यह दायित्व चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2027-28 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028-29 से 5 प्रतिशत का न्यूनतम अनुपात बनाए रखना अनिवार्य होगा।

दस साल के लिए 2,110 रुपये प्रति यूनिट का तय मूल्य

उत्पादकों की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार ने सीबीजी की दर 2,110 रुपये प्रति इकाई (MMBTU) निर्धारित की है। यदि इसमें 95 प्रतिशत मीथेन की मात्रा मानी जाए, तो यह दर लगभग 98 रुपये प्रति किलोग्राम के बराबर बैठती है। इस निर्धारित दर में टैक्स और कंप्रेशन से जुड़ा खर्च शामिल नहीं है। यह प्रशासित मूल्य कम से कम 31 मार्च, 2036 तक प्रभावी रहेगा। हालांकि भविष्य में उत्पादन लागत, मुद्रास्फीति और कच्चे माल की स्थितियों के आधार पर इस मूल्य की समीक्षा और संशोधन का विकल्प खुला रखा गया है।

सवाल-जवाब

गोबरधन योजना का कुल वित्तीय आकार कितना है?
सरकार ने गोबरधन योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादकों के लिए क्या दर तय की गई है?
सरकार ने सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति इकाई (MMBTU) का प्रशासित मूल्य तय किया है, जो 95 प्रतिशत मीथेन के आधार पर करीब 98 रुपये प्रति किलोग्राम बैठता है।
यह मूल्य समर्थन कब तक लागू रहेगा?
यह व्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होकर कम से कम 31 मार्च, 2036 तक लागू रहेगी।
सीएनजी और पीएनजी में सीबीजी मिश्रण का क्या अनुपात तय हुआ है?
कंपनियों को 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत सीबीजी का मिश्रण अनिवार्य रूप से करना होगा।
गोबरधन योजना के तहत किन कच्चे मालों से गैस बनाई जाएगी?
इसमें पशुओं के गोबर, कृषि अवशेषों, खराब खाद्य सामग्री और अन्य जैविक कचरे का उपयोग करके गैस और खाद तैयार की जाती है।
योजना के मुख्य 6 घटक कौन से हैं?
इनमें सीबीजी की पक्की खरीद, मूल्य निर्धारण, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन नेटवर्क, ऋण गारंटी और सीबीजी पारिस्थितिकी चैलेंज फंड शामिल हैं।
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टिप्पणियाँ 3

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·36 दिन पहले

दस साल की पक्की गारंटी मिलने से अब गोबर और कचरे से गैस बनाने वाली कंपनियों को पैसे की चिंता नहीं होगी। भारत में रिन्यूएबल एनर्जी और खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह बड़ा कदम है, जिससे निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ेगा।

Rohan Gupta@rohan-gupta·36 दिन पहले

10 साल का पक्का दाम और खरीद की गारंटी सुनकर प्लान अच्छा लग रहा है, पर ज़मीन पर सरकारी अमले से तालमेल बिठाना इतना आसान नहीं होगा। कागज़ पर वादे जितने शानदार दिखते हैं, प्लांट लगाने वालों को मंजूरी मिलने में अक्सर उतनी ही ज्यादा दौड़भाग करनी पड़ती है।

Ravikash Gupta@ravikash·36 दिन पहले

रोहन, तुम्हारी बात सही है कि ज़मीन पर भागदौड़ बहुत होती है। पर क्या ये तय दाम और खरीद की गारंटी छोटे प्लांट वालों के लिए भी आसानी से मिल पाएगी?

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