सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत करते हुए केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण को अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में बुधवार को यह बड़ा फैसला लिया गया। इस सौदे के तहत कनाडा की वित्तीय कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड बैंक में 60.72 प्रतिशत की नियंत्रणकारी हिस्सेदारी खरीदेगी। एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भारतीय परिसंपत्तियों के रणनीतिक विनिवेश की दिशा में यह अब तक का सबसे विशाल लेनदेन माना जा रहा है।
वित्तीय क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
इस मेगा सौदे का कुल मूल्यांकन 52,878.08 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसके माध्यम से देश के वित्तीय तंत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आने जा रहा है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य में रेखांकित किया गया कि यह कदम पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से खिंचती आ रही विनिवेश प्रक्रिया को निर्णायक परिणति तक पहुंचाने वाला है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मंत्रिमंडल द्वारा पारित इस रणनीतिक पुनर्गठन के प्रमुख बिंदुओं को साझा किया और कहा कि बैंकिंग उद्योग में नए अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है।
सरकार और एलआईसी का संयुक्त विनिवेश ढांचा
यह बिक्री प्रक्रिया केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) दोनों के संयुक्त प्रयासों पर आधारित है। कैबिनेट समिति ने आधिकारिक तौर पर मेसर्स 10955230 कनाडा इंक को रणनीतिक खरीदार घोषित किया है, जो फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई है। प्रस्तावित 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी में केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी का त्याग करेगी, जबकि एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इस सौदे की नियामक मंजूरियां पूरी होने के पश्चात बैंक का परिचालन नियंत्रण औपचारिक रूप से फेयरफैक्स समूह के हाथों में स्थानांतरित हो जाएगा।
बिक्री के बाद का शेयरधारिता अनुपात और नियामक शर्तें
अधिग्रहण की यह प्रक्रिया संपन्न हो जाने के बाद आईडीबीआई बैंक में पुरानी दोनों संस्थाओं की अल्पांश हिस्सेदारी बरकरार रहेगी। समझौते के अनुरूप भारत सरकार के पास बैंक के 15 प्रतिशत शेयर रहेंगे, जबकि जीवन बीमा निगम 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखेगा। इस तरह दोनों घरेलू शेयरधारकों के पास मिलाकर 34 प्रतिशत का रणनीतिक हिस्सा बना रहेगा। चूंकि नियंत्रण में बदलाव आ रहा है, इसलिए सेबी के नियमों के अनुसार फेयरफैक्स को बैंक के आम व अल्पांश शेयरधारकों के लिए एक खुली पेशकश (ओपन ऑफर) भी लानी होगी।
चालू वित्त वर्ष में समापन और सीएसबी बैंक पर निर्देश
निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला ने स्पष्ट किया कि इस पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया को चालू वित्त वर्ष के भीतर ही तकनीकी और कानूनी रूप से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस व्यवस्थागत परिवर्तन के दौरान बैंक के कर्मचारियों के सेवा हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त फेयरफैक्स के समक्ष एक विशिष्ट नियामक चुनौती भी है, क्योंकि उसके पास पहले से सीएसबी बैंक में पर्याप्त हिस्सेदारी है। नियमों के तहत फेयरफैक्स को आगामी 2 वर्षों के भीतर या तो सीएसबी बैंक का आईडीबीआई बैंक के साथ संपूर्ण विलय करना होगा या फिर सीएसबी बैंक से अपनी शेयरधारिता बेचकर पूरी तरह बाहर निकलना होगा।


















