खेती-किसानी में आमदनी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जमीन खरीदने या भारी पूंजी लगाने की जरूरत नहीं होती. खेतों की मेड़ों पर रखे चंद बक्से फसलों में परागण सुधारकर पैदावार तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही शहद और मोम के जरिए हर महीने एक मजबूत आमदनी का जरिया भी बन जाते हैं. हरियाणा का उद्यान विभाग किसानों को पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकालकर स्वीट क्रांति से जोड़ने के लिए एक व्यापक प्रोत्साहन कार्यक्रम संचालित कर रहा है. इस पहल के तहत शुरुआती ढांचा तैयार करने, बक्से खरीदने और मधुमक्खी कॉलोनी स्थापित करने में आने वाले कुल खर्च का 75 से 85 फीसदी तक हिस्सा सरकार वहन कर रही है, जिससे किसान को अपनी जेब से बेहद सीमित लागत लगानी पड़ती है.
वर्ष 2030 तक 15,500 मीट्रिक टन शहद उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है. योजना के मुताबिक, वर्ष 2030 तक प्रदेश भर में मधुमक्खी पालकों की कुल संख्या बढ़ाकर 7,750 तक ले जाने का इरादा है. इसके साथ ही राज्य के कुल शहद उत्पादन को 15,500 मीट्रिक टन के स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है. इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए उद्यान विभाग केवल वित्तीय मदद ही नहीं मुहैया करा रहा, बल्कि मधुमक्खी पालन के वैज्ञानिक तौर-तरीकों, रखरखाव और कीट प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था भी कर रहा है. नए व्यवसायियों को शुरुआती चरण में आवश्यक टूल्स, कॉलोनी और बक्से उपलब्ध कराने में विभागीय स्तर पर प्राथमिकता दी जा रही है.
बक्से, कॉलोनी और उपकरणों पर मिलने वाली सीधी वित्तीय सहायता
इस उद्यम को शुरू करने के वित्तीय बोझ को हल्का करने के लिए सरकार ने विभिन्न घटकों की मानक लागत और उस पर मिलने वाली वित्तीय सहायता की स्पष्ट रूपरेखा तय की है
- मधुमक्खी के बक्से: एक बक्से की आधिकारिक लागत 2,250 रुपये तय की गई है, जिस पर सरकार लगभग 1,700 रुपये का अनुदान देती है. एक किसान योजना के तहत अधिकतम 50 बक्शों पर सब्सिडी का लाभ प्राप्त कर सकता है.
- मधुमक्खी कॉलोनी: 8 फ्रेम वाली मधुमक्खी कॉलोनी की निर्धारित कीमत 2,000 रुपये रखी गई है, जिसमें से 1,700 रुपये की सीधी सरकारी वित्तीय सहायता मिलती है. एक लाभार्थी को अधिकतम 50 कॉलोनियों के लिए यह सहायता उपलब्ध कराई जाती है.
- शहद निष्कर्षण उपकरण और सुरक्षा किट: शहद निकालने वाली मशीन, सेफ्टी किट, विशेष जाल और ब्रश जैसे जरूरी औजारों की खरीद पर भी निर्धारित नियमों के अनुसार सब्सिडी का लाभ दिया जाता है.
भावांतर भरपाई योजना से बाजार जोखिम का स्थायी समाधान
शहद उत्पादन में उतरने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी अनिश्चितता खुले बाजार में कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव की होती है. इस जोखिम को खत्म करने के लिए हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालन को अपनी भावांतर भरपाई योजना के तहत शामिल किया है. योजना में शहद के लिए न्यूनतम संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है. यदि खुले बाजार में शहद का थोक भाव गिरकर 100 रुपये प्रति किलोग्राम रह जाता है, तो तय मूल्य और बाजार मूल्य के बीच के 20 रुपये प्रति किलोग्राम के अंतर का भुगतान सीधे सरकार अपने खजाने से किसान को करती है. इस व्यवस्था से उत्पादकों को घाटे की चिंता किए बिना उत्पादन जारी रखने का भरोसा मिलता है.
आवेदन की पूरी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों का ब्योरा
इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के इच्छुक किसान अपने जिले के नजदीकी उद्यान विभाग कार्यालय में जाकर संपर्क साध सकते हैं. इसके अलावा, बागवानी विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर डिजिटल माध्यम से भी ऑनलाइन आवेदन जमा करने की सुविधा दी गई है. पंजीकरण के दौरान किसान के पास परिवार पहचान पत्र, भूमि स्वामित्व से जुड़े जरूरी दस्तावेज, बैंक पासबुक की प्रति और हालिया पासपोर्ट साइज फोटो होना आवश्यक है. आवेदन पत्र जमा होने के बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाती है, और मंजूरी मिलते ही निर्धारित अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर कर दी जाती है.
















