वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ ब्रिटिश पाउंड ने जापानी येन के मुकाबले अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। शुक्रवार को आई गिरावट के बाद खरीदारों के लौटने से यह जोड़ी संभलती दिखी है। शुक्रवार को यह विनिमय दर 211.25 से 211.30 के दायरे तक पहुंची थी, जो करीब दो सप्ताह का उच्च स्तर था, लेकिन बाद में इसमें मुनाफावसूली देखी गई थी। यूरोपीय सत्र के शुरुआती हिस्से में हाजिर भाव 210.50 के स्तर के ठीक नीचे बना रहा, जिसमें दिन के दौरान लगभग 0.15 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि टोक्यो की ओर से संभावित बाजार हस्तक्षेप और दोनों केंद्रीय बैंकों की अलग-अलग नीतियों के कारण इस तेजी का दायरा सीमित रह सकता है।
बैंक ऑफ जापान की दरों में बढ़ोतरी और नीतिगत मतभेद
जापानी येन की हालिया कमजोरी का मुख्य कारण बैंक ऑफ जापान का ताजा नीतिगत निर्णय रहा है। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को अपने 7-2 के बहुमत वाले फैसले के तहत अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह दर वृद्धि पिछले 31 वर्षों के उच्चतम स्तर पर है और बाजार को काफी समय से इसका अनुमान भी था। इसके बावजूद दो सदस्यों ने नीतिगत सख्ती में जल्दबाजी न दिखाने और उधार लागत बढ़ाने में धैर्य बरतने की वकालत की। नीति निर्धारकों के बीच उभरे इस मतभेद ने संकेत दिया कि भविष्य में मौद्रिक सख्ती की रफ्तार उतनी तेज नहीं होगी जितनी पहले उम्मीद की जा रही थी। यही वजह रही कि दरों में बढ़ोतरी के बाद भी येन को वो मजबूती नहीं मिल सकी जिसकी सामान्यतः उम्मीद की जाती है।
बाजार इस बात की संभावना देख रहा है कि बैंक ऑफ जापान नीति सामान्यीकरण की दिशा में बहुत नपे-तुले और सतर्क कदमों के साथ आगे बढ़ेगा। इसके विपरीत, बैंक ऑफ इंग्लैंड पर ब्रिटेन में आर्थिक विकास की धीमी गति और ऊर्जा की कीमतों से जुड़ी मुद्रास्फीति के दबाव के चलते नीतियों में ढील देने अथवा यथास्थिति बनाए रखने का दबाव है। ब्रिटेन में संभावित मंदी और महंगाई के मिले-जुले माहौल यानी स्टैगफ्लेशन की चिंताएं केंद्रीय बैंक को बहुत सतर्क रहने पर मजबूर कर रही हैं। दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दरों का यह घटता अंतर आने वाले समय में जापानी येन के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड की बढ़त पर ब्रेक लगा सकता है। इसके अलावा शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की दर जांच के बाद आधिकारिक दखलंदाजी का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है, जिससे ट्रेडर भारी दांव लगाने से बच रहे हैं।
प्रमुख एशियाई मुद्राओं का रुख और वैश्विक आर्थिक हलचल
व्यापक मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। अमेरिकी डॉलर जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा नीचे आया था, लेकिन दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण इसकी गिरावट थम गई। दूसरी तरफ, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने लोन प्राइम रेट्स में कोई बदलाव न करते हुए यथास्थिति बनाए रखी, जिसका असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पड़ा। इसके बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नीचे गिरने से बचाया। बाजार के प्रतिभागी डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाली आगामी शिखर बैठक पर भी करीबी नजर बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में सोमवार को एशिया में कुछ सुधार दिखा और यूएसडी/जेपीवाई फिसलकर 157.00 के नीचे आ गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान के रेट चेक के बाद संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन को हल्का सहारा दिया। जापान में सार्वजनिक अवकाश होने के कारण कारोबारी सतर्क दिखे, जबकि यूक्रेन-रूस संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अनिश्चितता का माहौल बनाए रखा। इन वैश्विक चिंताओं ने डॉलर की कमजोरी को सीमित कर दिया, जिससे येन की रिकवरी भी एक दायरे में सिमट कर रह गई। पिछले सात दिनों के प्रदर्शन को देखें तो जापानी येन ने न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है, जबकि अन्य मुद्राओं के समक्ष यह दबाव में रहा।
जिंस, बॉन्ड और क्रिप्टोकरेंसी बाजारों की स्थिति
वित्तीय बाजार मौजूदा समय में वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में एक असामान्य दौर से गुजर रहे हैं। जिंस बाजार में सोने पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। यूरोपीय सत्र के पहले भाग में पीली धातु करीब 0.50 प्रतिशत टूटकर 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखी। हालांकि, यह स्तर पिछले बुधवार को छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है। बाजार में निवेशक पश्चिम एशिया के संकट और उसके कारण मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रहे हैं, क्योंकि महंगाई के रुझान ही आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों और गैर-उपज वाले सोने की दिशा तय करेंगे। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी जा रही है, जबकि अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ खुलने की तैयारी में दिखाई दिए।
बॉन्ड बाजारों में भारी तनाव देखने को मिल रहा है। शुक्रवार देर रात यूरोप और अमेरिका में सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी से उछाल आया, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। डिजिटल परिसंपत्तियों की बात करें तो क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पिछले हफ्ते आई 40 प्रतिशत से अधिक की तेजी के बाद जेडकैश 1,500 डॉलर के स्तर के ऊपर कारोबार कर रहा है। ग्रेस्केल के जेडईसी केंद्रित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड ने पिछले सप्ताह 98.21 मिलियन डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया। इसके अलावा नेटवर्क के डेवलपर्स एनयू7 अपग्रेड पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि निजी भुगतान प्रणाली की गति को और तेज किया जा सके। कुल मिलाकर मुद्रा और वित्तीय बाजारों में केंद्रीय बैंकों की नीतियों, ब्याज दर चक्रों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।


















