घर के आंगन या छत पर ताजी सब्जियां उगाने के शौकीन लोगों के लिए सितंबर का महीना बेहद महत्वपूर्ण अवसर लेकर आता है। इस समय की गई सही तैयारी आने वाले सर्दियों के महीनों में न केवल घर की रसोई को ताजी उपज से भर देती है, बल्कि बाजार पर निर्भरता को भी काफी हद तक घटा देती है। देहरादून के एग्रीकल्चर एक्सपर्ट अनस के अनुसार, सितंबर का मौसम पौधों के शुरुआती विकास के लिए बहुत अनुकूल होता है। इस समय लगाई गई फसलों में कीटों और बीमारियों का प्रकोप भी काफी कम रहता है, जिससे नए गार्डनर भी आसानी से अच्छी फसल ले सकते हैं।
सितंबर में बोने के लिए सबसे मुफीद सब्जियां
सर्दियों के सीजन में भरपूर पैदावार हासिल करने के लिए सही फसलों का चुनाव करना जरूरी है। इस महीने में मेथी, फ्रेंच बीन्स, ब्रोकली, फूलगोभी और चुकंदर की बुवाई की जा सकती है। इसके साथ ही खीरा भी लगाया जा सकता है, क्योंकि रसोई में इसकी मांग साल भर बनी रहती है। इन सभी सब्जियों की घरेलू स्तर पर रोजाना खपत होती है। सितंबर की जलवायु इन पौधों की शुरुआती बढ़वार को गति देती है, जिससे पौधे तेजी से जड़ पकड़ते हैं और स्वस्थ बनते हैं।
सीधे बीज बोने के बजाय तैयार करें सैंपलिंग
सब्जियों को सीधे जमीन या गमलों में बोने के बजाय पहले बीजों से छोटी पौध यानी सैंपलिंग तैयार करना सबसे असरदार तरीका साबित होता है। अनस बताते हैं कि बीजों को पहले छोटी ट्रे या छोटे गमलों में बोना चाहिए। जब ये बीज अंकुरित होकर कुछ इंच बड़े हो जाएं और तने में मजबूती आ जाए, तब इन्हें किचन गार्डन की मुख्य क्यारियों या बड़े गमलों में स्थानांतरित करना चाहिए। घर पर इस प्रक्रिया को अपनाना बहुत आसान है और ऐसा करने से पौधों के जीवित रहने तथा तेजी से पनपने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कोकोपीट, परलाइट और वर्मीक्युलाइट से बनाएं पोटिंग मिक्स
पौधों के तेजी से विकास के लिए मिट्टी के मिश्रण की गुणवत्ता सबसे ज्यादा मायने रखती है। अनस के अनुसार, कोकोपीट, परलाइट और वर्मीक्युलाइट को मिलाकर एक बेहतरीन पोटिंग मिक्स तैयार किया जा सकता है। यह मिश्रण काफी हल्का रहता है, जिसकी वजह से नन्हीं जड़ों को पर्याप्त हवा और जरूरी नमी मिलती रहती है। जड़ों में वायु संचार अच्छा होने से शुरुआती अवस्था में पौधों की वृद्धि तेज होती है।
जब पौधे रोपाई के लिए पूरी तरह परिपक्व हो जाएं, तब उन्हें इस तैयार पोटिंग मिक्स के साथ किचन गार्डन में स्थापित कर देना चाहिए। आवश्यकता महसूस होने पर फंगीसाइड यानी फफूंदनाशक का हल्का छिड़काव या उपयोग किया जा सकता है, ताकि मिट्टी या नमी से पनपने वाली फंगस जनित बीमारियों से कोमल पौधों को सुरक्षित रखा जा सके।
कीटों और बीमारियों से बचाव का प्राकृतिक लाभ
सितंबर के दौरान मौसम में आने वाला बदलाव बागवानी के लिए अनुकूल माहौल बनाता है। अनस का कहना है कि इस महीने में रोपी जाने वाली सब्जियों पर आम तौर पर हानिकारक कीटों और गंभीर बीमारियों का खतरा कम रहता है। मौसम का यह प्राकृतिक सहयोग पौधों को बिना किसी बड़े व्यवधान के बढ़ने में मदद करता है। यदि समय रहते सही तरीके से पौध तैयार की जाए और उचित मिश्रण के साथ रोपाई पूरी कर ली जाए, तो पूरे शीतकालीन सत्र में घर पर ही प्रचुर मात्रा में हरी और पौष्टिक सब्जियां प्राप्त की जा सकती हैं।

















