त्योहारों की गहमागहमी के बीच बाहर के खानपान और खानपान कारोबारियों की जेब पर असर डालने वाला बदलाव सामने आया है. तेल कंपनियों की ओर से रविवार 1 नवंबर से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी लागू कर दी गई है. इस ताजा वृद्धि के बाद राजधानी दिल्ली में इस नीले सिलेंडर का खुदरा मूल्य बढ़कर 2,820 रुपये तक पहुंच गया है. राहत की बात यह है कि आम परिवारों के किचन में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में किसी तरह का फेरबदल नहीं किया गया है.
प्रमुख महानगरों में नई दरें इस प्रकार तय
देश के बड़े औद्योगिक और मेट्रो शहरों में कमर्शियल गैस की दरों में अलग-अलग स्तर पर संशोधन देखा गया है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 19 किलो वाले सिलेंडर पर 10 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके चलते अब वहां नया भाव 2,774.50 रुपये हो गया है. वहीं पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी प्रति सिलेंडर 10 रुपये की तेजी आई है, जिससे वहां कीमत बढ़कर 2,964 रुपये पर जा पहुंची है. दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई में सबसे अधिक 11.50 रुपये की वृद्धि हुई है, जहां अब यह कमर्शियल सिलेंडर 2,994.50 रुपये में उपलब्ध होगा.
अन्य बड़े शहरों में भी दर्ज हुआ इजाफा
महानगरों के अतिरिक्त उत्तर और दक्षिण भारत के अन्य प्रमुख कारोबारी केंद्रों में भी नई कीमतें लागू हो चुकी हैं. कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 10 रुपये की बढ़ोतरी के साथ नई दर 2,908 रुपये निर्धारित हुई है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी प्रति सिलेंडर 10 रुपये का उछाल आया है, जिसके बाद नया मूल्य 2,942.50 रुपये पर दर्ज किया गया. बिहार की राजधानी पटना में 10 रुपये की बढ़त के उपरांत सिलेंडर का भाव 3,110.50 रुपये के आंकड़े पर पहुंच गया है, जो इस सूची में सबसे महंगे दामों में शुमार है.
बीते महीनों में कीमतों का उतार-चढ़ाव
कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दामों का इतिहास देखें तो हाल के महीनों में भारी उठापटक देखने को मिली है. इससे पहले 1 मई को जब कीमतें संशोधित हुई थीं, तब 19 किलो वाले सिलेंडर पर 993 रुपये की जोरदार बढ़ोतरी की गई थी, जो तकरीबन 1000 रुपये के आसपास थी. उस भारी उछाल के बाद दिल्ली समेत कई केंद्रों पर सिलेंडर का दाम 3000 रुपये के आंकड़े को पार कर गया था. हालांकि उस ऐतिहासिक उछाल के उपरांत कुछ सप्ताह पहले ही कीमतों में राहत देते हुए कटौती भी की गई थी. अब दोबारा 10 रुपये की बढ़त करके इसे 2,820 रुपये के स्तर पर लाया गया है.
खानपान व्यवसाय और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
त्योहारी सीजन के दौरान कमर्शियल गैस की लागत बढ़ना सीधे तौर पर हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टर को प्रभावित करता है. होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालक, टी-स्टॉल और कैटरिंग सर्विस प्रदाता बड़े पैमाने पर 19 किलोग्राम वाले सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं. ईधन के बिल में होने वाली इस बढ़ोतरी से भोजन पकाने का परिचालन खर्च बढ़ जाएगा. लागत का यह अतिरिक्त बोझ कारोबारी अक्सर मेनू की कीमतों में जोड़कर ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे आने वाले दिनों में बाहर लंच, डिनर या नाश्ता करना जेब पर भारी पड़ सकता है.

















