अमेठी जिले में इस बार प्राकृतिक आपदाओं के कारण अन्नदाताओं को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। किसानों की मेहनत से लहलहाती फसलें पानी में डूबने और नदियों के कटान की वजह से तबाह हो गई हैं, जिससे मेहनतकश किसानों के चेहरों पर गहरी चिंता साफ दिखाई दे रही है। सरकारें भले ही किसानों की आय दोगुनी करने और उनकी फसल को सुरक्षित रखने के दावे करती हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आ रही है। अब किसान सरकार से उचित मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि उन्हें इस बड़ी क्षति से थोड़ी राहत मिल सके।
तहसीलों में फसलों को भारी नुकसान
अमेठी जिले की चारों तहसीलों के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन पर खड़ी फसलें पूरी तरह प्रभावित हुई हैं। कहीं उफान पर आए नालों ने तबाही मचाई है तो कहीं नदियों के कटाव और समय पर उनकी साफ-सफाई न होने के कारण खेतों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। हालात यह हैं कि किसानों की महीनों की मेहनत पानी में बह गई है और वे अपनी बर्बाद होती फसल को बेबस होकर देखने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इस गंभीर संकट को लेकर जब किसानों का दर्द सामने आया तो उन्होंने प्रशासन से तत्काल मुआवजे की पुरजोर मांग की।
किसानों का दर्द और प्रशासनिक प्रक्रिया
क्षेत्र के एक स्थानीय किसान रामकिशोर पांडे ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि धान की फसल को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है। खेतों में भारी मात्रा में पानी भरा रहने के कारण अब दिसंबर तक फसल की कटाई संभव नहीं हो पाएगी। उनका कहना है कि हर साल कभी नालों के उफनाने तो कभी नदियों के कटाव से उनकी उपजाऊ जमीन और फसलें नष्ट हो जाती हैं, लेकिन स्थानीय अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं रहता है। किसानों की मांग है कि उन्हें फसल के नुकसान की एवज में एक सम्मानजनक वित्तीय सहायता दी जाए। एक अन्य किसान धर्मराज वर्मा ने बताया कि वह अपनी बर्बाद फसल के सिलसिले में कृषि निदेशक कार्यालय पहुंचे हैं ताकि उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नियमानुसार लाभ मिल सके।
प्रशासन का सर्वे और टोल फ्री नंबर
किसानों की समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए उप कृषि निदेशक ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक आपदा चाहे अत्यधिक बारिश के कारण आई हो या नदियों के कटाव से, जिन भी इलाकों में किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं वहां व्यक्तिगत रूप से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद बीमा कंपनियों के माध्यम से किसानों को उनकी क्षति के आधार पर उचित सहायता राशि वितरित की जाएगी। इसके साथ ही कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी नुकसान की स्थिति में टोल फ्री नंबर 1447 पर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत मिलने के बाद फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि और राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर नुकसान का सटीक आकलन करेंगे और पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराएंगे।



















