घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति सामान्य होने और मांग के मुकाबले सप्लाई मजबूत रहने के बीच सरकार ने ईंधन निर्यातक कंपनियों को राहत देने का फैसला किया है। शनिवार से प्रभावी नए आदेश के तहत देश के बाहर भेजे जाने वाले पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर विंडफाल टैक्स में कटौती कर दी गई है। इस संशोधन के बाद पेट्रोल पर निर्यात टैक्स को पूरी तरह समाप्त कर शून्य कर दिया गया है, जबकि डीजल और हवाई ईंधन के टैक्स दरों में भी कमी लाई गई है।
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर नए टैक्स की दरें
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक निर्यात किए जाने वाले डीजल पर विंडफाल टैक्स 25.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। इसके अलावा हवाई ईंधन पर लगने वाले टैक्स को 22 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। सबसे बड़ी राहत पेट्रोल निर्यात पर मिली है, जहां टैक्स को 3.5 रुपये प्रति लीटर से सीधे शून्य कर दिया गया है। इससे निर्यात में लगे भारतीय तेल शोधकों और रिफाइनरियों का मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद है।
हाल ही में 3 अगस्त को बढ़ाए गए थे टैक्स
उल्लेखनीय है कि सरकार ने चालू महीने की शुरुआत में यानी 3 अगस्त को ही विंडफाल टैक्स में भारी बढ़ोतरी की थी। उस समय डीजल पर टैक्स को 15.5 रुपये लीटर से बढ़ाकर सीधे 25.5 रुपये लीटर कर दिया गया था, जो कि एक बार में 10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि थी। उसी बदलाव के तहत एटीएफ पर टैक्स 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर किया गया था और पेट्रोल पर विंडफाल टैक्स 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये किया गया था। अब 15 दिनों के भीतर समीक्षा करते हुए सरकार ने इन दरों में कटौती की है।
घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई असर नहीं
आम उपभोक्ताओं के लिए यह स्पष्ट समझना जरूरी है कि इस टैक्स कटौती का देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विंडफाल टैक्स केवल उस ईंधन पर लागू होता है जिसे भारतीय रिफाइनरियाँ विदेश में बेचती हैं। इसलिए घरेलू पंपों पर ईंधन के दाम पहले की तरह ही बने रहेंगे और इसका प्रत्यक्ष लाभ केवल ईंधन का निर्यात करने वाली तेल कंपनियों को प्राप्त होगा।
विंडफॉल टैक्स का इतिहास और दोबारा लागू होने की वजह
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर सरकार हर पखवाड़े इस टैक्स की समीक्षा करती है। भारत सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में ईंधन निर्यात पर विंडफाल टैक्स लगाया था, ताकि जब वैश्विक कीमतें बढ़ें तो रिफाइनरियाँ घरेलू आपूर्ति की अनदेखी कर केवल निर्यात से भारी मुनाफा न कमाने लगें। हालांकि 2024 में सरकार ने इसे समाप्त कर दिया था, लेकिन मार्च 2026 में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम अचानक बहुत तेज हो गए। घरेलू बाजार में किल्लत रोकने और कंपनियों द्वारा अतिरिक्त निर्यात पर लगाम कसने के उद्देश्य से मार्च 2026 में इसे फिर से लागू किया गया था।



















