वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय विभिन्न मुद्राओं के मूल्यों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों को लेकर बाजार में बनी उत्सुकता है। इस पूरे परिदृश्य में अमेरिकी डॉलर (USD) मुख्य भूमिका में नजर आ रहा है। डॉलर ने कई अन्य वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूत लेकिन ओवरबॉट मोमेंटम दिखाया है। बाजार के निवेशक और विश्लेषक स्विस फ्रैंक (CHF) के प्रदर्शन पर पैनी नजर रख रहे हैं, जिसने हाल ही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी कुछ गिरावट को थामते हुए कंसोलिडेशन के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), जापानी येन (JPY) और हाजिर सोना (Gold) जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियों में भी कमजोरी देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि व्यापारी खुद को फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बेहद महत्वपूर्ण बैठक और अन्य बड़े आर्थिक घटनाक्रमों से पहले सुरक्षित स्थिति में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
USD/CHF का तकनीकी विश्लेषण और अल्पकालिक दृष्टिकोण
बाजार के प्रसिद्ध तकनीकी विश्लेषक क्वेक सेर लियांग ने हाल ही में USD/CHF करेंसी पेयर के दैनिक उतार-चढ़ाव को लेकर विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, इस करेंसी पेयर ने हाल ही में अपनी बढ़त का दायरा बढ़ाते हुए 0.8195 के दैनिक स्तर को छुआ, जिसके बाद इसमें कुछ कंसोलिडेशन यानी स्थिरता देखने को मिली। वर्तमान में इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए इस पेयर के 0.8150 से 0.8195 के बीच बने रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि डॉलर की बढ़त का मोमेंटम काफी मजबूत दिख रहा है, लेकिन तकनीकी संकेतक यह भी इशारा कर रहे हैं कि बाजार इस समय ओवरबॉट यानी अत्यधिक खरीदारी की स्थिति में पहुंच चुका है। विश्लेषण के मुताबिक, अगर USD/CHF को 0.8245 के अगले बड़े स्तर की तरफ कदम बढ़ाना है, तो इसके लिए सबसे पहले 0.8205 के कड़े रेजिस्टेंस स्तर को पार करना और उसके ऊपर अपनी स्थिति मजबूत करना बेहद जरूरी होगा। वहीं दूसरी ओर, डॉलर में इस तेजी के रुझान को बनाए रखने के लिए कीमतों का 0.8130 के सपोर्ट स्तर से ऊपर बने रहना अनिवार्य माना जा रहा है।
पिछले कुछ दिनों के कारोबार पर नजर डालें तो इस करेंसी पेयर में अमेरिकी डॉलर की बढ़त उम्मीद से कहीं ज्यादा रही है। पिछले शुक्रवार को डॉलर में अप्रत्याशित तेजी देखी गई और यह 0.8170 के स्तर तक चढ़ने के बाद 0.8161 पर बंद हुआ, जो कि 0.44% की बढ़त को दर्शाता है। हालांकि बाजार में ओवरबॉट की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन मजबूत मोमेंटम को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया था कि डॉलर 0.8185 के स्तर का परीक्षण कर सकता है। हालांकि उस समय 0.8205 के कड़े रेजिस्टेंस स्तर तक पहुंचना मुश्किल लग रहा था, लेकिन इसके बावजूद डॉलर ने 0.8195 के स्तर को छुआ और अंततः थोड़ी गिरावट के साथ 0.8171 (+0.12%) पर बंद हुआ। इस मामूली गिरावट और मोमेंटम में आई कमी से संकेत मिलता है कि आज डॉलर में तत्काल बड़ी तेजी आने के बजाय यह 0.8150 और 0.8195 के बीच कंसोलिडेट हो सकता है।
मध्यम अवधि का नजरिया: आगामी कुछ हफ्तों में USD/CHF की चाल
एक से तीन हफ्तों के व्यापक नजरिए से देखें तो USD/CHF करेंसी पेयर का परिदृश्य काफी हद तक सकारात्मक बना हुआ है। पिछले सप्ताह के अंत में बाजार विश्लेषकों ने अमेरिकी डॉलर को लेकर अपना दृष्टिकोण तेजी की तरफ बदला था। 14 सितंबर को जब इसका स्पॉट रेट 0.8165 पर था, तब बाजार में यह अनिश्चितता थी कि क्या डॉलर में बन रहा मोमेंटम इसे 0.8205 के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तर के पार ले जा पाएगा या नहीं। इसके बाद डॉलर ने बढ़कर 0.8195 का स्तर छुआ, जिससे इसकी मजबूती तो साबित हुई, लेकिन ओवरबॉट स्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि 0.8245 के स्तर तक पहुंचने के लिए डॉलर को पहले 0.8205 के पार जाकर टिकना होगा।
इस सकारात्मक मोमेंटम को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि डॉलर अपने मजबूत सपोर्ट स्तरों से नीचे न गिरे। मजबूत सपोर्ट के स्तर को, जो पहले 0.8110 पर आंका गया था, अब बढ़ाकर 0.8130 कर दिया गया है। सपोर्ट लेवल में किया गया यह बदलाव दर्शाता है कि नीचे की तरफ से डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है। यदि यह सपोर्ट स्तर बरकरार रहता है, तो तकनीकी रूप से डॉलर के ऊपर जाने की संभावना अधिक रहेगी, भले ही अल्पावधि में ओवरबॉट होने के संकेत मिल रहे हों।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और चीनी अर्थव्यवस्था के चलते दबाव में AUD/USD
यदि हम एशिया-प्रशांत क्षेत्र की बात करें, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) के बीच का अनुपात लगातार दबाव में है। मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह करेंसी पेयर 0.7150 के स्तर से नीचे संघर्ष करता नजर आया। इस कमजोरी के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पिछले सत्र में छुए गए तीन सप्ताह के निचले स्तर के बेहद करीब बना हुआ है। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बने होना है। निवेशक आगामी FOMC बैठक से पहले अधिक यील्ड की मांग कर रहे हैं, और साथ ही वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों के कारण उत्पन्न होने वाले मुद्रास्फीति के जोखिमों को भी ध्यान में रख रहे हैं। इस बढ़ी हुई यील्ड ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा दिया है, जिससे यह अन्य यील्ड-सेंसिटिव मुद्राओं के मुकाबले अधिक आकर्षक बन गया है।
यील्ड के अंतर के अलावा, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को क्षेत्रीय आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार, चीन से अगस्त महीने के लिए आए आर्थिक आंकड़े मिले-जुले और निराशाजनक रहे हैं। चूंकि ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर चीन को होने वाले कमोडिटी निर्यात पर निर्भर करती है, इसलिए चीन के कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई सकारात्मक सहारा नहीं दिया। जब तक चीन की अर्थव्यवस्था में कोई मजबूत सुधार नहीं होता या अमेरिकी ब्याज दरों के दृष्टिकोण में नरमी नहीं आती, तब तक AUD/USD पर दबाव बने रहने की आशंका है।
फेड और बैंक ऑफ जापान की बैठकों के बीच 155.00 की ओर बढ़ता USD/JPY
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) लगातार मजबूती दिखा रहा है और मंगलवार सुबह के कारोबार में यह 155.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ता दिखा। विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारी इस सप्ताह होने वाली महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति बैठकों के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं, जिसमें फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान (BoJ) दोनों की बैठकें शामिल हैं। फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना और तेल की बढ़ती कीमतों से होने वाली मुद्रास्फीति की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचा रखा है, जिससे जापानी येन के मुकाबले डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है।
हालांकि, USD/JPY की इस तेजी की राह पूरी तरह से बाधा रहित नहीं है। बाजार के खिलाड़ियों को यह भी अंदेशा है कि बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कोई आक्रामक कदम उठा सकता है। यदि बैंक ऑफ जापान अपनी बेहद उदार मौद्रिक नीति को तेजी से बदलने का संकेत देता है, तो इससे जापानी येन को मजबूत सहारा मिल सकता है, जिससे USD/JPY की तेजी 155.00 के स्तर के पार सीमित हो सकती है। आने वाले दिनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत उम्मीदों के बीच का तालमेल ही इस पेयर की दिशा तय करेगा।
फेड की बैठक से पहले सोने की कीमतों में गिरावट
मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड का असर कीमती धातुओं के बाजार पर भी साफ देखा जा सकता है। मंगलवार को यूरोपीय सत्र के पहले भाग में हाजिर सोना (Gold) लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ $4,265 से $4,264 के दायरे में कारोबार करता दिखा, जो लगभग 0.80% की गिरावट को दर्शाता है। इस गिरावट के कारण सोना सोमवार को दर्ज किए गए एक महीने से अधिक के निचले स्तर के काफी करीब बना हुआ है।
इस सुस्ती और गिरावट का मुख्य कारण आज से शुरू होने वाली दो दिवसीय FOMC नीतिगत बैठक है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलती, इसलिए ऊंची ब्याज दरों और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के माहौल में निवेशकों के बीच इसका आकर्षण कम हो जाता है। जब तक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों के भविष्य के रास्ते और आर्थिक अनुमानों को लेकर स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक निवेशक सोने पर बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। जब तक केंद्रीय बैंक की ओर से स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक सोने की कीमतों पर दबाव बने रहने की उम्मीद है।
















