देश भर के बाजारों में चीनी के दामों में उछाल आने से आम परिवारों का रसोई का बजट लगातार प्रभावित हो रहा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, रविवार, 30 अगस्त को देश के कुछ बाजारों में चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत 74 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। आपूर्ति सुचारू करने और जमाखोरी रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन खुदरा विक्रेताओं तक इसका असर पहुंचना अभी बाकी है।
खुदरा दरों का आंकड़ा और महानगरों की स्थिति
रविवार के दिन देश के अधिकांश खुदरा सेंटरों में चीनी का रेट 60 रुपये प्रति किलोग्राम की सीमा से ऊपर दर्ज किया गया। 30 अगस्त को देश भर में चीनी की औसतन खुदरा कीमत 64.24 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जो ठीक एक हफ्ते पहले दर्ज 63.12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर के मुकाबले 1.77 प्रतिशत अधिक है। अगर निचले और ऊपरी स्तर की बात करें तो देश में न्यूनतम खुदरा मूल्य 40 रुपये प्रति किलोग्राम जबकि अधिकतम मूल्य 74 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।
देश के प्रमुख शहरों की स्थिति पर नजर डालें तो दिल्ली के खुदरा बाजार में चीनी 62 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकी। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में ग्राहकों को इसके लिए 66 रुपये प्रति किलोग्राम चुकाने पड़े। दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में चीनी का भाव 63 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि रांची में उपभोक्ताओं को प्रति किलोग्राम चीनी के लिए 68 रुपये का भुगतान करना पड़ा। पिछले आंकड़ों से तुलना की जाए तो वर्तमान दरें एक महीने पहले की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा हैं, जबकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 38.63 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
थोक बाजार के हालात और मिल स्तर के अंतर
खुदरा क्षेत्र के साथ-साथ थोक मंडियों में भी चीनी के भाव मजबूत बने हुए हैं। रविवार को थोक बाजार में चीनी का औसत दर 59.73 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जो पिछले सप्ताह 58.66 रुपये प्रति किलोग्राम पर था। थोक दरों में भी एक महीने की अवधि में 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, वहीं सालाना आधार पर इसमें 38.63 प्रतिशत की बढ़त देखी जा रही है।
यह तेजी तब बनी हुई है जब सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी को बिना किसी आयात शुल्क के देश में लाने की मंजूरी दी जा चुकी है। आयात की अनुमति मिलने के बाद चीनी मिलों के स्तर पर कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन थोक और खुदरा दुकानों तक वह राहत पूरी तरह से नहीं स्थानांतरित हो पाई है। चीनी कारोबार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, मिल स्तर और थोक दरों के बीच 2 से 3 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर स्वाभाविक माना जाता है। इसी तरह मिल स्तर से खुदरा दुकानदार के बीच 7 से 8 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए सरकारी कदम
चीनी की आसमान छूती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल के दिनों में कई कड़े फैसले लिए हैं। घरेलू मांग को पूरा करने और उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने सबसे पहले चीनी के विदेशों में निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।
इसके साथ ही घरेलू सप्लाई को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का मार्ग प्रशस्त किया गया। बाजार में कृत्रिम कमी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने थोक विक्रेताओं, बड़े डीलरों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा के नियमों को भी सख्त कर दिया है, ताकि चीनी का बेवजह भंडारण न किया जा सके।



















