अडाणी एंटरप्राइजेज ने अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी जेबिल के साथ भारत में अगली पीढ़ी के एआई और डेटा सेंटर हार्डवेयर तैयार करने की योजना बनाई है। दोनों कारोबारी समूहों ने बराबर यानी 50-50 फीसदी हिस्सेदारी वाले जॉइंट वेंचर की स्थापना के लिए एक गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत अत्याधुनिक एआई रैक, कंप्यूटिंग सर्वर, हाई-कैपेसिटी स्टोरेज और एडवांस नेटवर्किंग इक्विपमेंट का निर्माण और असेंबलिंग देश के भीतर ही की जाएगी। इसके अतिरिक्त डेटा सेंटर्स के सुचारू संचालन के लिए बेहद जरूरी पावर डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम, आधुनिक लिक्विड कूलिंग उपकरण और भारी क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर भी इसी वेंचर के जरिए बनाए जाएंगे।
गीगावाट क्षमता का व्यापक मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम
प्रस्तावित जॉइंट वेंचर का प्राथमिक लक्ष्य कई गीगावाट क्षमता वाला एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म तैयार करना है। यह प्लेटफॉर्म न केवल भारत के घरेलू बाजार की तेज तकनीकी जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की हार्डवेयर मांगों की भी आपूर्ति करेगा। दोनों कंपनियों ने अपने साझा बयान में स्पष्ट किया है कि यह करार फिलहाल निश्चित कानूनी अनुबंधों, संबंधित नियामकीय मंजूरियों और अन्य निर्धारित व्यावसायिक शर्तों के पूरा होने पर ही अंतिम रूप लेगा। इससे पहले दोनों समूहों ने जून में भारत के भीतर एआई और डेटा सेंटर विनिर्माण परिवेश विकसित करने की शुरुआती योजना सार्वजनिक की थी।
डेटा सेंटर क्षमता में भारी उछाल के अनुमान
भारत में डिजिटल सेवाओं, बड़े पैमाने पर क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटरों की मांग में अभूतपूर्व तेजी देखी जा रही है। इसके साथ ही देश के भीतर ही डेटा को सुरक्षित रखने से जुड़ी नीतियों ने इस मांग को और मजबूत किया है। उद्योग जगत के मौजूदा आकलनों के मुताबिक वर्ष 2030 तक भारत में डेटा सेंटर की कुल क्षमता बढ़कर 5 से 8 गीगावाट तक पहुंच सकती है। जेबिल और अडाणी के बीच हुआ यह समझौता इसी विशाल मांग को भुनाने और हार्डवेयर आपूर्ति के लिए देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम है।
वैश्विक बाजार में तीन ट्रिलियन डॉलर के अवसर
क्लाउड सेवाओं से जुड़ी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां मौजूदा समय में डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क और एआई संरचना के विस्तार में 50 अरब डॉलर से अधिक का पूंजी निवेश करने की तैयारी में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे भारी निवेश के चलते अगले 7 वर्षों के भीतर अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,000 अरब डॉलर यानी तीन ट्रिलियन डॉलर से अधिक के नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे। पूर्ण रूप से स्थापित होने के बाद यह जॉइंट वेंचर वैश्विक स्तर पर कार्यरत प्रमुख एआई और टेक कंपनियों को हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाएं मुहैया कराएगा।
ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अडाणी का बड़ा दांव
इस नई विनिर्माण साझेदारी के माध्यम से अडाणी समूह केवल बिजली आपूर्ति और डेटा सेंटर निर्माण तक सीमित न रहकर सीधे तौर पर कोर हार्डवेयर निर्माण क्षेत्र में भी मजबूत दखल हासिल करेगा। समूह ने पहले ही वर्ष 2035 तक पूरी तरह से हरित ऊर्जा से संचालित होने वाले 5 गीगावाट क्षमता के डेटा सेंटर खड़े करने के लिए 100 अरब डॉलर के भारी-भरकम पूंजी निवेश का संकल्प व्यक्त किया है। ऐसे में हार्डवेयर उत्पादन की यह क्षमता उनके समग्र डिजिटल और ऊर्जा रणनीतियों को एक साथ जोड़ने में मददगार साबित होगी।
















