जापान का केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों के संबंध में एक महत्वपूर्ण घोषणा करने जा रहा है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस बात को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है कि जापानी केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को सख्त कर सकता है या नहीं। जून के महीने में ब्याज दरें बढ़ाने के बाद अब विश्लेषकों का मानना है कि आगामी घोषणाओं में भविष्य की दर बढ़ोतरी के संकेत मिल सकते हैं। इस घटनाक्रम के बीच भारत में यह सवाल उठ रहा है कि क्या जापान द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने से अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए लिए गए विशाल कर्ज पर ब्याज का बोझ बढ़ेगा।
बुलेट ट्रेन कर्ज के नियम और भारत की स्थिति
भारत ने अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण के लिए जापान से 88 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज लिया है। यह वित्तीय सहायता जैपनीज इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। इस कर्ज की सबसे खास बात यह है कि यह महज 0.1 फीसदी की बेहद मामूली वार्षिक ब्याज दर पर मिला है, जिसे चुकाने के लिए 50 वर्षों की लंबी अवधि तय की गई है।
इस लोन समझौते में 15 वर्ष का ग्रेस पीरियड भी शामिल है। इसका सीधा मतलब यह है कि कर्ज मिलने के शुरुआती 15 सालों तक भारत सरकार को मूलधन की एक भी किश्त नहीं लौटानी होगी। मूलधन का भुगतान 16वें वर्ष से शुरू होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाया गया यह जापानी कर्ज एक फिक्स्ड रेट यानी निश्चित ब्याज दर पर आधारित है। यही वजह है कि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी घरेलू नीतिगत दरों में बढ़ोतरी किए जाने से इस बुलेट ट्रेन लोन की ब्याज दर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और भारत का पुनर्भुगतान ढांचा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
जापानी अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव और केंद्रीय बैंक की चुनौतियां
जापान की घरेलू अर्थव्यवस्था इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों से जूझ रही है। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और वैश्विक उथल-पुथल के कारण ईंधन की कीमतों में तेजी आई है। इसके साथ ही, जापानी मुद्रा येन में लगातार आ रही कमजोरी ने देश में महंगाई के दबाव को बढ़ा दिया है।
इन परिस्थितियों के कारण बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा के सामने एक दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। उन्हें एक तरफ सख्त मौद्रिक रुख अपनाकर उन निवेशकों और सट्टेबाजों को नियंत्रित करना है जो येन की गिरावट पर दांव लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी सरकार के साथ तालमेल बनाए रखना है। जापान की वर्तमान सरकार मौद्रिक नीति में अत्यधिक सख्ती या दरों में तेजी से बढ़ोतरी करने के पक्ष में नहीं है। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल यह देखना चाहता है कि उत्पादक मूल्यों में हुई बढ़ोतरी का प्रभाव अर्थव्यवस्था और खुदरा मुद्रास्फीति पर किस हद तक पड़ता है।
दिसंबर में हो सकती है अगली दर बढ़ोतरी
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक ऑफ जापान इस समय सतर्कता बरत रहा है और वह तुरंत दरों में बड़ा बदलाव करने के बजाय आंकड़ों का इंतजार करेगा। हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों और मित्सुबिशी यूएफजे मॉर्गन स्टेनली सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों का आंकलन है कि यदि मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है या येन में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है, तो बैंक ऑफ जापान चालू वर्ष के दिसंबर महीने में ब्याज दरों में अगली बढ़ोतरी कर सकता है। जब तक जापानी सरकार और अर्थव्यवस्था के आंकड़े दर बढ़ोतरी की अनिवार्यता को स्वीकार नहीं करते, तब तक केंद्रीय बैंक फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाएगा।



















