रांची से बोकारो तक झारखंड में आज भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट25 मिलियन टोकन अनलॉक से ZRO पर 25% गिरावट का खतरा, डेरिवेटिव बाजार का रुझान बदलावैश्विक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और विदेशी पूंजी की निकासी से रुपया धड़ाम, कच्चा तेल $82 के पारआज का राशिफल 21 जुलाई 2026: मंगल के नक्षत्र में चंद्रमा, वृषभ सहित 6 राशियों को सतर्क रहने की सलाह, धन हानि के आसारकीवी डॉलर ने पकड़ी रफ्तार, अमेरिकी महंगाई घटने से फेडरल रिजर्व के रेट हाइक की उम्मीदें हुईं कमबिहार में आज फिर बदलेगा मौसम का मिजाज़, कई जिलों में तेज बारिश और वज्रपात की आशंकादिल्ली-पंजाब की नौकरी छोड़ गांव लौटे सुरेंद्र राम, अब एक एकड़ में भिंडी उगाकर रोज कमा रहे ₹3,000रेट अंतर से येन के मुकाबले चढ़ा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, पर जापान की दखल की चेतावनी बनी अड़चनदिल्ली पुलिस का हिंसक प्रदर्शनकारियों पर कड़ा एक्शन, 70 लोग हिरासत में, कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्जएंडी बर्नहैम के डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचते ही चढ़ा पाउंड, लेकिन कॉमर्ज़बैंक ने दी सावधानी की चेतावनी
जहानाबाद के किसान का स्मार्ट तरीका: जलभराव वाले खेत में भिंडी की इस किस्म से हो रही बंपर कमाईव्यापार
18 घंटे पहले· 0

जहानाबाद के किसान का स्मार्ट तरीका: जलभराव वाले खेत में भिंडी की इस किस्म से हो रही बंपर कमाई

जहानाबाद के पुनपुन प्रखंड के एक किसान ने अपने जलभराव वाले एक एकड़ खेत में नामधारी 862 किस्म की भिंडी लगाकर सफलता हासिल की है। यह फसल मात्र 40 दिन में तैयार हो जाती है और बरसात के कठिन मौसम में भी हर दिन पांच क्विंटल तक का शानदार उत्पादन दे रही है।

बिहार के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के किसान अब पारंपरिक और लंबी अवधि वाली खेती के बजाय कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और बाजार की दैनिक जरूरतों को पूरा करना है। कम समय में तैयार होने वाली फसलों में सब्जियों की खेती सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रही है। वर्तमान में बारिश का मौसम चल रहा है और इस समय खेतों में पानी भरना एक आम समस्या है। ऐसे मौसम में किसान उन विशेष फसलों का चुनाव कर रहे हैं जो अत्यधिक नमी और जलभराव को सहन कर सकें। बरसात के दिनों में भिंडी की खेती किसानों के लिए एक बहुत ही लाभदायक विकल्प बनकर उभरी है। जहानाबाद जिले के पुनपुन प्रखंड के रहने वाले किसान अंजनी सिन्हा ने इसी रणनीति को अपनाते हुए खेती का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में भिंडी की फसल लगाई है।

नामधारी 862 बीज का कमाल

अंजनी सिन्हा पिछले पांच साल से बारिश के मौसम में भिंडी की एक खास प्रजाति की खेती कर रहे हैं। उनका अनुभव बताता है कि सही बीज के चुनाव से मानसून की चुनौतियों को भी अवसर में बदला जा सकता है। वह पूरी तरह से स्मार्ट खेती के मॉडल पर काम करते हैं। उनका मुख्य ध्यान फल, सब्जियां और उन नकदी फसलों पर रहता है जो बहुत ही कम समय में अच्छी आमदनी देना शुरू कर देती हैं। बरसात के मौसम की चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने अपने एक एकड़ भूमि में नामधारी 862 किस्म की भिंडी लगाई है। यह बीज बाजार में काफी प्रीमियम कीमत पर मिलता है। इसकी अधिकतम कीमत 3300 रुपये प्रति किलो तक होती है। हालांकि इसकी कीमत अधिक है लेकिन यह किस्म खास तौर पर बरसात के मौसम के लिए ही उपयुक्त मानी जाती है।

ये भी पढ़ें

जलभराव में भी फसल सुरक्षित

इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी जलभराव सहने की क्षमता है। अंजनी सिन्हा का खेत भौगोलिक रूप से थोड़ा निचले इलाके में स्थित है। इसके कारण हर साल बारिश के मौसम में वहां पानी भर जाता है। आम तौर पर खेत में पानी जमा होने से फसलें गल जाती हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिए उन्होंने नामधारी 862 किस्म का चुनाव किया। इसका फायदा यह है कि खेत में चाहे कितना भी पानी जमा हो जाए, भिंडी के उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता है। इस रणनीति के कारण उन्हें बरसात के कठिन मौसम में भी अपनी फसल से निरंतर आय प्राप्त होती रहती है।

40 दिन का चक्र और बंपर उत्पादन

पैदावार के मामले में यह प्रजाति बेहद शानदार परिणाम देती है। अगर इसे एक एकड़ जमीन में सही तरीके से लगाया जाए तो हर दिन औसतन चार से पांच क्विंटल तक भिंडी का उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। बाजार में इस भिंडी की बहुत ज्यादा मांग रहती है। इसका कारण यह है कि इस किस्म से निकलने वाली प्रत्येक भिंडी की गुणवत्ता उत्कृष्ट होती है। इसके अलावा भिंडी सबसे तेजी से तैयार होने वाली सब्जियों की श्रेणी में आती है। बीज बोने के महज 40 दिन बाद ही पौधे से सब्जियों की तुड़ाई शुरू हो जाती है। अंजनी सिन्हा ने मई महीने में भिंडी की बुवाई की थी और जुलाई के पहले दिन से ही उन्हें फसल मिलनी शुरू हो गई। वह अब हर दिन क्विंटलों के हिसाब से भिंडी तोड़कर स्थानीय बाजार में बेच रहे हैं।

बाजार में भारी मांग और स्मार्ट खेती का मंत्र

अंजनी सिन्हा की सफलता का मुख्य कारण उनका आधुनिक दृष्टिकोण है। उन्होंने कृषि कार्य में पूरी तरह से स्मार्ट तरीका अपनाया है जो अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन मॉडल बन सकता है। वर्तमान समय में वह सिर्फ भिंडी की खेती पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने अपनी आमदनी के स्रोतों को बढ़ाते हुए अमरूद, कटहल, केला और कई अन्य प्रकार के फलों के पेड़ भी लगाए हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक किसान खेती को स्मार्ट और आधुनिक व्यवसाय का रूप नहीं देंगे, तब तक उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव नहीं है। आज भी कई किसान पुरानी और घिसी पिटी आदतों के साथ खेती कर रहे हैं जिससे उन्हें बहुत कम मुनाफा मिल पाता है। उनका सुझाव है कि अगर किसान पारंपरिक तरीकों से थोड़ा हटकर बाजार की मांग के अनुसार काम करें, तो वे अपनी जमीन से कहीं अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

सवाल-जवाब

अंजनी सिन्हा किस गांव या प्रखंड के रहने वाले हैं?
अंजनी सिन्हा बिहार के जहानाबाद जिले के पुनपुन प्रखंड के रहने वाले एक प्रगतिशील किसान हैं।
उन्होंने अपने खेत में भिंडी की कौन सी किस्म लगाई है?
उन्होंने बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए अपने खेत में नामधारी 862 किस्म की भिंडी लगाई है।
इस भिंडी के बीज की बाजार में क्या कीमत है?
बाजार में नामधारी 862 भिंडी के बीज की अधिकतम कीमत 3300 रुपये प्रति किलो तक होती है।
नामधारी 862 भिंडी कितने दिनों में तैयार हो जाती है?
यह बहुत ही कम समय में तैयार होने वाली किस्म है जिसकी तुड़ाई बीज बोने के महज 40 दिन बाद शुरू हो जाती है।
एक एकड़ खेत से हर दिन कितनी भिंडी का उत्पादन हो रहा है?
इस उन्नत किस्म से एक एकड़ खेत में हर दिन औसतन चार से पांच क्विंटल तक भिंडी का उत्पादन होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR