बिहार के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के किसान अब पारंपरिक और लंबी अवधि वाली खेती के बजाय कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और बाजार की दैनिक जरूरतों को पूरा करना है। कम समय में तैयार होने वाली फसलों में सब्जियों की खेती सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रही है। वर्तमान में बारिश का मौसम चल रहा है और इस समय खेतों में पानी भरना एक आम समस्या है। ऐसे मौसम में किसान उन विशेष फसलों का चुनाव कर रहे हैं जो अत्यधिक नमी और जलभराव को सहन कर सकें। बरसात के दिनों में भिंडी की खेती किसानों के लिए एक बहुत ही लाभदायक विकल्प बनकर उभरी है। जहानाबाद जिले के पुनपुन प्रखंड के रहने वाले किसान अंजनी सिन्हा ने इसी रणनीति को अपनाते हुए खेती का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में भिंडी की फसल लगाई है।
नामधारी 862 बीज का कमाल
अंजनी सिन्हा पिछले पांच साल से बारिश के मौसम में भिंडी की एक खास प्रजाति की खेती कर रहे हैं। उनका अनुभव बताता है कि सही बीज के चुनाव से मानसून की चुनौतियों को भी अवसर में बदला जा सकता है। वह पूरी तरह से स्मार्ट खेती के मॉडल पर काम करते हैं। उनका मुख्य ध्यान फल, सब्जियां और उन नकदी फसलों पर रहता है जो बहुत ही कम समय में अच्छी आमदनी देना शुरू कर देती हैं। बरसात के मौसम की चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने अपने एक एकड़ भूमि में नामधारी 862 किस्म की भिंडी लगाई है। यह बीज बाजार में काफी प्रीमियम कीमत पर मिलता है। इसकी अधिकतम कीमत 3300 रुपये प्रति किलो तक होती है। हालांकि इसकी कीमत अधिक है लेकिन यह किस्म खास तौर पर बरसात के मौसम के लिए ही उपयुक्त मानी जाती है।
जलभराव में भी फसल सुरक्षित
इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी जलभराव सहने की क्षमता है। अंजनी सिन्हा का खेत भौगोलिक रूप से थोड़ा निचले इलाके में स्थित है। इसके कारण हर साल बारिश के मौसम में वहां पानी भर जाता है। आम तौर पर खेत में पानी जमा होने से फसलें गल जाती हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिए उन्होंने नामधारी 862 किस्म का चुनाव किया। इसका फायदा यह है कि खेत में चाहे कितना भी पानी जमा हो जाए, भिंडी के उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता है। इस रणनीति के कारण उन्हें बरसात के कठिन मौसम में भी अपनी फसल से निरंतर आय प्राप्त होती रहती है।
40 दिन का चक्र और बंपर उत्पादन
पैदावार के मामले में यह प्रजाति बेहद शानदार परिणाम देती है। अगर इसे एक एकड़ जमीन में सही तरीके से लगाया जाए तो हर दिन औसतन चार से पांच क्विंटल तक भिंडी का उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। बाजार में इस भिंडी की बहुत ज्यादा मांग रहती है। इसका कारण यह है कि इस किस्म से निकलने वाली प्रत्येक भिंडी की गुणवत्ता उत्कृष्ट होती है। इसके अलावा भिंडी सबसे तेजी से तैयार होने वाली सब्जियों की श्रेणी में आती है। बीज बोने के महज 40 दिन बाद ही पौधे से सब्जियों की तुड़ाई शुरू हो जाती है। अंजनी सिन्हा ने मई महीने में भिंडी की बुवाई की थी और जुलाई के पहले दिन से ही उन्हें फसल मिलनी शुरू हो गई। वह अब हर दिन क्विंटलों के हिसाब से भिंडी तोड़कर स्थानीय बाजार में बेच रहे हैं।
बाजार में भारी मांग और स्मार्ट खेती का मंत्र
अंजनी सिन्हा की सफलता का मुख्य कारण उनका आधुनिक दृष्टिकोण है। उन्होंने कृषि कार्य में पूरी तरह से स्मार्ट तरीका अपनाया है जो अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन मॉडल बन सकता है। वर्तमान समय में वह सिर्फ भिंडी की खेती पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने अपनी आमदनी के स्रोतों को बढ़ाते हुए अमरूद, कटहल, केला और कई अन्य प्रकार के फलों के पेड़ भी लगाए हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक किसान खेती को स्मार्ट और आधुनिक व्यवसाय का रूप नहीं देंगे, तब तक उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव नहीं है। आज भी कई किसान पुरानी और घिसी पिटी आदतों के साथ खेती कर रहे हैं जिससे उन्हें बहुत कम मुनाफा मिल पाता है। उनका सुझाव है कि अगर किसान पारंपरिक तरीकों से थोड़ा हटकर बाजार की मांग के अनुसार काम करें, तो वे अपनी जमीन से कहीं अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
















