दैनिक रसोई बजट पर सीधा असर डालने वाले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, कर्नाटक सरकार ने नंदिनी ब्रांड के पैकेटबंद दूध की दरों में भारी फेरबदल का खाका तैयार कर लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार की समीक्षा बैठक में प्रति लीटर दूध पर 8 रुपये की दर बढ़ाने से जुड़े मसौदे को अपनी सहमति दे दी। इस भारी वृद्धि का मुख्य उद्देश्य दुग्ध उत्पादक संघों की आर्थिक स्थिति को संबल देना बताया गया है, जो लंबे समय से बढ़ते लागत दबाव का सामना कर रहे हैं।
निर्वाचन आयोग की हरी झंडी और औपचारिक घोषणा का इंतजार
मंत्रिमंडल की आंतरिक सहमति के बावजूद इस मूल्य संशोधन का औपचारिक ऐलान तुरंत नहीं किया जा सका। राज्य के भीतर विधान परिषद की चुनावी प्रक्रिया संचालित होने की वजह से आदर्श आचार संहिता लागू है। सरकारी प्रक्रियाओं के अनुसार, दरों को लागू करने से पहले चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्ताव रखकर पूर्व अनुमति ली जाएगी। आगामी कैबिनेट चर्चा में प्रशासनिक पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद 1 नवंबर से नई दरें प्रभावी होने की प्रबल संभावना है। मूल्य वृद्धि के अंतिम दायरे और स्लैब के निर्धारण का जिम्मा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के पास रहेगा।
दुग्ध उत्पादक यूनियनों का आर्थिक संकट और मांग
इस बड़े मूल्य संशोधन की पृष्ठभूमि पिछले महीने तैयार हुई थी, जब राज्य के विभिन्न सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों ने सरकार के समक्ष संकट का ब्योरा रखा था। उत्पादकों के संगठनों ने स्पष्ट किया था कि नंदिनी दूध के खरीद मूल्य और खुदरा विक्रय मूल्य दोनों में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया जाना बेहद जरूरी हो चुका है। चारा, परिवहन और पशुपालन के समग्र खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि को यूनियनों ने इस मांग का मुख्य आधार बनाया था। इसी सिलसिले में दुग्ध संघों के प्रतिनिधियों ने 22 सितंबर को विधान सौध पहुंचकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से प्रत्यक्ष वार्ता की थी और अपनी मांगें सौंपी थीं।
विगत दशक के आंकड़ों और लागत ढांचे की गहन पड़ताल
यूनियनों के ज्ञापन के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने नीतिगत निर्णय लेने से पूर्व जमीनी हकीकत परखने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तलब कर पिछले 10 वर्षों के दौरान पशु चारे की कीमतों में आए बदलावों का पूरा लेखा-जोखा पेश करने को कहा था। इसके अलावा प्रति लीटर दूध के उत्पादन पर आने वाली वास्तविक लागत, प्रत्येक जिले में होने वाले संकलन व बिक्री के तुलनात्मक आंकड़े और सहकारी यूनियनों द्वारा की गई कुल खरीद का ब्योरा भी मांगा गया था। मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान के मुताबिक, कर्नाटक से सटे पड़ोसी राज्यों में दूध की खरीद दरों और खुदरा बिक्री मूल्य की तुलना भी इस मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा बनाई गई थी।



















