परंपरागत अनाज की खेती को छोड़कर आज के समय में कई प्रगतिशील किसान सब्जियों की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि इसमें सामान्य फसलों के मुकाबले चार से छह गुना अधिक मुनाफा कमाने की संभावना होती है। ऐसी ही अधिक मुनाफा देने वाली सब्जियों में भिंडी का नाम सबसे ऊपर आता है, जिसकी मांग भारतीय रसोई घरों में पूरे साल बनी रहती है। आमतौर पर घरों में हरी भिंडी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब पोषक तत्वों से भरपूर लाल भिंडी की खेती किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। भारतीय कृषि विज्ञान अनुसंधान केंद्रों द्वारा विकसित की गई लाल भिंडी की यह खास किस्म न केवल बंपर पैदावार देती है, बल्कि किसानों की आमदनी को भी कई गुना बढ़ा रही है।
लाल भिंडी की वैज्ञानिक खासियत और प्रमुख किस्में
सागर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव के अनुसार, पोषक तत्वों के मामले में लाल भिंडी साधारण हरी भिंडी की तुलना में कहीं अधिक बेहतर है। डॉक्टर के एस यादव बताते हैं कि वर्तमान में लाल भिंडी की दो प्रमुख किस्में उपलब्ध हैं जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही हैं। इनमें से पहली किस्म IARI की तरफ से तैयार की गई पूसा लाल भिंडी 1 है, जबकि दूसरी किस्म IIVR वाराणसी द्वारा विकसित की गई काशी लालिमा है। इस भिंडी का लाल रंग इसमें मौजूद एंथोसाइएनिन नामक तत्व की प्रचुर मात्रा के कारण होता है। एंथोसाइएनिन एक बहुत ही शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, इस भिंडी में कई अन्य जरूरी पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जिसके चलते बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
ओपन पोलिनेटेड बीजों का आर्थिक लाभ
लाल भिंडी की इन दोनों उन्नत किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये दोनों ही हाइब्रिड नहीं हैं, बल्कि ओपन पोलिनेटेड किस्में हैं। ओपन पोलिनेटेड होने के कारण किसानों को हर साल नया बीज खरीदने के लिए बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। किसान खुद ही फसल से हर साल नया बीज तैयार कर सकते हैं, जिससे उनकी खेती की लागत काफी हद तक कम हो जाती है। यह बीज हाइब्रिड किस्मों के बराबर ही बंपर पैदावार देने की क्षमता रखता है। सागर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा स्थानीय किसानों तक काशी लालिमा के बीज आसानी से पहुंचाए जाते हैं, ताकि वे कम लागत में अपनी फसलों की बंपर पैदावार हासिल कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
बीज उत्पादन से अतिरिक्त कमाई का बेहतरीन जरिया
लाल भिंडी की खेती करने वाले किसान न केवल सब्जी बेचकर बल्कि इसका बीज तैयार करके भी शानदार मुनाफा कमा सकते हैं। बाजार में जहां साधारण हाइब्रिड भिंडी का बीज 5000 रुपये से लेकर 8000 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बेहद महंगी कीमत पर बिकता है, वहीं अनुसंधान केंद्रों और किसानों द्वारा तैयार किया गया लाल भिंडी का यह ओपन पोलिनेटेड बीज महज 1000 रुपये प्रति किलोग्राम की किफायती दर पर आसानी से मिल जाता है। किसान खुद अपनी फसल से बीज तैयार करके उसे 1000 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर अन्य किसानों को बेच सकते हैं। इससे उन्हें बहुत कम मेहनत और कम खर्च में एक अतिरिक्त और बेहद मुनाफेदार आय का जरिया मिल जाता है।
खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और बुवाई की सही विधि
लाल भिंडी की फसल से रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन प्राप्त करने के लिए कुछ बेहद जरूरी कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक तरीकों का पालन करना आवश्यक है। इस फसल के लिए सबसे उपयुक्त काली दोमट मिट्टी वाली जमीन को माना जाता है, क्योंकि इस मिट्टी में नमी और आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन बहुत अच्छा रहता है। बुवाई प्रक्रिया शुरू करने से पहले खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ लगभग 8 से 10 टन अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद डालना बहुत फायदेमंद होता है। इससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। बुवाई करते समय पौधों के बीच की दूरी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कतार से कतार यानी लाइन से लाइन की दूरी लगभग 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी करीब 30 से 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए। एक एकड़ खेत में बुवाई के लिए लगभग 3 से 4 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
मात्र 50 दिनों में शुरू हो जाती है बंपर कमाई
लाल भिंडी की खेती किसानों के लिए इसलिए भी एक आकर्षक सौदा है क्योंकि इसकी फसल बहुत ही कम समय में तैयार हो जाती है। बुवाई के मात्र 50 दिनों के भीतर ही इसकी फसल से कमाई शुरू हो जाती है। अपने खास लाल रंग और उच्च स्वास्थ्य लाभों के कारण बाजार में यह साधारण हरी भिंडी की तुलना में बहुत ऊंचे दामों पर बिकती है। जो किसान पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं, उनके लिए लाल भिंडी एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें उतनी ही जगह और उतनी ही मेहनत लगती है जितनी साधारण हरी भिंडी में, लेकिन इसकी कम लागत और बाजार में मिलने वाली ऊंची कीमत किसानों को कई गुना अधिक मुनाफा देकर अमीर बना देती है। यह खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारती है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से समाज को भी एक सेहतमंद सब्जी प्रदान करती है।



















