देश के खनिज संसाधनों से जुड़े कानून में एक बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय संसद ने महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। गुरुवार के दिन संसद के उच्च सदन ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को पास कर दिया। इससे पहले इस विधेयक को संसद के निचले सदन की स्वीकृति मिल चुकी थी। यह नया विधायी कदम मुख्य रूप से राज्य सरकारों की उन शक्तियों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है, जिनके तहत वे खनिज अधिकारों और खनिज वाली जमीनों पर अलग से कर वसूलती रही हैं।
लोकसभा और राज्यसभा में विधायी प्रक्रिया पूरी
इस महत्वपूर्ण विधेयक को संसद के दोनों सदनों में लगातार दो दिनों की प्रक्रिया के दौरान पारित कराया गया। सबसे पहले लोकसभा ने बुधवार के दिन इस प्रस्ताव पर विचार विमर्श करने के बाद इसे अपनी मंजूरी दी थी। इसके बाद विधेयक को अगले चरण में राज्यसभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। गुरुवार को राज्यसभा से भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई। उच्च सदन की इस स्वीकृति के साथ ही संसद के भीतर विधेयक को पारित कराने की पूरी विधायी प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर संपन्न हो गई है।
खनिज अधिकारों पर राज्यों के कर लगाने की शक्ति पर अंकुश
खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का मुख्य केंद्र बिंदु राज्यों के कर संबंधी अधिकारों को सीमित करना है। इस नए पारित विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, अब राज्य सरकारों के पास खनिज अधिकारों पर स्वतंत्र रूप से कर लगाने की असीमित शक्तियां नहीं रहेंगी। इसके अतिरिक्त, यह कानून खनिज से भरपूर जमीनों पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले क्षेत्रीय करों पर भी स्पष्ट सीमाएं तय करता है, ताकि पूरे देश में खनिज प्रबंधन और राजस्व नियमों में एकरूपता लाई जा सके।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून का रूप लेगा विधेयक
संसद के दोनों सदनों में मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब यह मसौदा अपने अंतिम संवैधानिक मुकाम तक पहुंच चुका है। बुधवार को लोकसभा और गुरुवार को राज्यसभा से पारित होने के बाद इस विधायी दस्तावेज पर संसदीय औपचारिकताएं पूर्ण हो चुकी हैं। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को अब औपचारिक स्वीकृति के लिए भारत के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। राष्ट्रपति से अंतिम सहमति और हस्ताक्षर प्राप्त होते ही यह विधेयक देश भर में प्रभावी कानून के रूप में लागू हो जाएगा।



















