शेयर बाजार में लंबे समय से टिके निवेशक लगातार यह मांग उठाते रहे हैं कि इक्विटी पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स यानी LTCG टैक्स को हटा दिया जाए। उनका तर्क है कि इससे बाजार में ठहराव और स्थिरता आएगी, क्योंकि लोग फटाफट मुनाफा काटकर निकलने के बजाय अपने पैसे को लंबे समय तक निवेशित रखने लगेंगे। कई निवेशकों का यह भी मानना है कि यह टैक्स खत्म होते ही घरेलू बाजार में विदेशी पूंजी की आमद तेज हो जाएगी। लेकिन सरकार ने इन उम्मीदों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। सोमवार को वित्त मंत्रालय ने संसद में यह साफ कर दिया कि उसके सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
संसद में क्या सवाल उठा
यह मुद्दा 20 जुलाई को लोकसभा में उठाया गया था। पूछा गया था कि क्या सरकार खुदरा और घरेलू निवेशकों के लिए LTCG टैक्स को वापस लेने की कोई योजना बना रही है। इसके लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि बाजार की धारणा को मजबूत करने और देशी-विदेशी निवेशकों को लुभाने के मकसद से भी इस टैक्स को हटाने के किसी प्रस्ताव पर सरकार गौर नहीं कर रही। उन्होंने दो टूक कहा, "फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं।"
कितना और कब लगता है यह टैक्स
मौजूदा नियमों के तहत लिस्टेड शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड से लंबी अवधि में हुए मुनाफे पर 12.5 फीसदी की दर से LTCG टैक्स चुकाना पड़ता है। हालांकि यह हर किसी की जेब पर नहीं पड़ता। यह टैक्स तभी लागू होता है जब एक साल में आपका फायदा 1.25 लाख रुपये के पार चला जाए। इसे समझने की एक और अहम बात यह है कि किसी एसेट को एक साल से ज्यादा वक्त तक अपने पास रखकर बेचने पर ही उससे हुई कमाई को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।
दरें पत्थर की लकीर नहीं
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कैपिटल गेन्स टैक्स की दरें स्थायी नहीं होतीं। हर साल बजट बनाते वक्त और देश के आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए इनकी समय-समय पर समीक्षा होती रहती है। यानी जरूरत महसूस होने पर सरकार बजट के दौरान कानून में बदलाव करके इन दरों को घटा या बढ़ा सकती है। सरकार की ओर से रखे गए आंकड़े इस टैक्स की बढ़ती अहमियत को भी दिखाते हैं। आकलन वर्ष 2025-26 में LTCG टैक्स से सरकारी खजाने में आने वाली रकम 78 फीसदी उछलकर करीब 1.29 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इससे ठीक एक साल पहले यह आंकड़ा 72,249 करोड़ रुपये था।
देशी-विदेशी निवेशकों पर एक जैसा नियम
चौधरी ने यह भी बताया कि शेयरों पर लगने वाली 12.5 फीसदी की यह दर भारतीय निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) दोनों पर एक समान लागू होती है, किसी को अलग से छूट नहीं मिलती। हालांकि सरकारी बॉन्ड यानी G-Secs में पैसा लगाने वाले विदेशी निवेशकों को एक बड़ी राहत जरूर दी गई है। 1 अप्रैल 2026 से इन बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन्स पर कोई आयकर नहीं लगेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से भारत की टैक्स व्यवस्था दुनिया के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेगी और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों तथा सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे बड़े विदेशी निवेशकों का लंबी अवधि का पैसा भारत की ओर खिंचकर आएगा।



















