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लेयर फार्मिंग से कमाई का गणित समझिए, बिना जानकारी कदम रखा तो उठाना पड़ सकता है नुकसानव्यापार
24 जून 2026, 11:45 pm (126 दिन पहले)· 2

लेयर फार्मिंग से कमाई का गणित समझिए, बिना जानकारी कदम रखा तो उठाना पड़ सकता है नुकसान

बिहार के जहानाबाद में दस साल से चल रहे एक ऑटोमेटेड लेयर फार्म से जुड़ी पूरी जानकारी, जिसमें मुर्गी पालने से लेकर अंडा उत्पादन और कमाई तक का हिसाब बताया गया है.

बिहार में मुर्गी पालन यानी पॉल्ट्री फार्म के साथ अब लेयर फार्मिंग का कारोबार भी तेजी से पैर पसार रहा है. बड़े पैमाने पर लेयर यूनिट लगाकर कई व्यवसायी अच्छी कमाई कर रहे हैं. लेकिन इस धंधे का एक दूसरा पहलू भी है. बहुत कम लोगों के पास इसकी सही समझ होती है और संचालन का सटीक तरीका न जानने की वजह से कई बार लोगों को नुकसान भी झेलना पड़ता है. ऐसे में अगर आप इस क्षेत्र में उतरने की सोच रहे हैं, तो पहले इसके बारीक हिसाब-किताब को समझ लेना बेहद जरूरी है.

दस साल पुराना ऑटोमेटेड फार्म

जहानाबाद के सुकुलचक गांव में पिछले दस साल से एक ऑटोमेटेड लेयर फार्म चल रहा है. इस यूनिट में हर दिन 10000 अंडों का उत्पादन होता है. खास बात यह है कि यह पूरी तरह मशीनों पर आधारित है, इसलिए हाथ से मेहनत बहुत कम करनी पड़ती है. इस फार्म को चलाने वाले सुधीर कुमार बीते दस साल से पॉल्ट्री और लेयर फार्म के काम से जुड़े हुए हैं और इस दौरान उन्होंने कारोबार की काफी बारीकियां सीखी हैं.

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शुरुआत से पहले पॉल्ट्री का अनुभव जरूरी

सुधीर कुमार के मुताबिक, जो भी व्यक्ति लेयर फार्म शुरू करना चाहता है, उसके लिए सबसे पहले पॉल्ट्री का अनुभव होना जरूरी है. इसी अनुभव के बाद ही कोई मुर्गी की हर गतिविधि पर सही तरह से नजर रख पाता है. उनका कहना है कि जब आप मुर्गी की देखभाल करना सीख जाते हैं, तो लेयर फार्म चलाना आसान हो जाता है.

वे बताते हैं कि उनके फार्म की क्षमता 10,000 अंडे रोजाना उत्पादन की है और यहां हाथ से काम न के बराबर करना पड़ता है. पानी की सप्लाई से लेकर दाना देने और गर्मी-ठंड को नियंत्रित करने तक, सब कुछ मशीनों के जरिए ही होता है.

एक दिन के चूजे से अंडा देने तक का सफर

सुधीर कुमार ने इस कारोबार का पूरा चक्र भी समझाया. लेयर यूनिट के अलावा उनके पास एक पॉल्ट्री यूनिट भी है, जहां एक दिन के मुर्गी के बच्चे लाए जाते हैं. इन चूजों को चार महीने तक तैयार किया जाता है और फिर इन्हें लेयर फार्म में शिफ्ट कर दिया जाता है. लेयर यूनिट में पहुंचने के करीब डेढ़ महीने बाद मुर्गी अंडे देना शुरू कर देती है.

कमाई का पूरा गणित

एक मुर्गी हर दिन एक अंडा देती है. वहीं एक मुर्गी रोजाना 100 से 110 ग्राम तक दाना खाती है. कमाई की बात करें तो एक मुर्गी से करीब एक रुपये तक का मुनाफा होता है. सुधीर कुमार मानते हैं कि यह कमाई का बेहतरीन जरिया है, लेकिन कामयाबी तभी मिलेगी जब इसे सही तरीके और वैज्ञानिक पद्धति से चलाया जाए.

सवाल-जवाब

जहानाबाद का यह लेयर फार्म कहां है और कितने साल से चल रहा है?
यह फार्म जहानाबाद के सुकुलचक गांव में है और पिछले दस साल से चल रहा है.
इस फार्म में हर दिन कितने अंडे का उत्पादन होता है?
इस ऑटोमेटेड यूनिट में हर दिन 10000 अंडों का उत्पादन होता है.
लेयर फार्म शुरू करने से पहले क्या जरूरी है?
सुधीर कुमार के मुताबिक सबसे पहले पॉल्ट्री का अनुभव होना जरूरी है, तभी मुर्गी की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है.
एक चूजे को अंडा देने लायक बनने में कितना समय लगता है?
एक दिन के चूजे को चार महीने तक तैयार किया जाता है, फिर लेयर फार्म में डेढ़ महीने रहने के बाद मुर्गी अंडा देना शुरू करती है.
एक मुर्गी रोजाना कितना दाना खाती है और कितनी कमाई देती है?
एक मुर्गी हर दिन 100 से 110 ग्राम तक दाना खाती है और इससे करीब एक रुपये तक की कमाई होती है.
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