मेघालय की राजधानी शिलांग में राज्य स्कूली शिक्षा बोर्ड के प्रशासनिक तंत्र और आधारभूत ढांचे को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मेघालय स्कूल शिक्षा बोर्ड (एमबीओएसई) के क्षेत्रीय कार्यालय के लिए एक स्वतंत्र और आधुनिक भवन निर्माण की आधारशिला औपचारिक रूप से रखी गई। इसके साथ ही 'मिशन एजुकेशन' के दूसरे चरण के तहत तैयार किए गए 81 नए विद्यालय भवनों का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में स्थानीय विधायक डॉ. एम. अम्पारीन लिंगदोह तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
साढ़े चार दशक पुराने अस्थायी दफ्तरों से मुक्ति
शिलांग स्थित इस क्षेत्रीय कार्यालय का सफर लगभग 45 वर्षों तक किराए और अस्थायी परिसरों में ही बीता है। खासी और जयंतिया पर्वतीय क्षेत्रों में शैक्षणिक समन्वय के लिए सितंबर 1981 में शिलांग सेल के नाम से इसकी शुरुआत की गई थी। उस दौर में मवखर में विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से कामकाज शुरू हुआ, जिसके बाद 1995 में लैतुमख्राह स्थित एजुकेशन गेस्ट हाउस और फिर 1998 में बोर्ड के अपने गेस्ट हाउस में दफ्तर स्थानांतरित किया गया। इसके बाद 22 दिसंबर 2005 से यह प्रशासनिक इकाई लोअर लचुमियर के टैक्सेशन भवन से संचालित होती आ रही थी।
वर्तमान में यह क्षेत्रीय केंद्र खासी-जयंतिया बेल्ट के सात जिलों का संचालन देखता है। इसके अधिकार क्षेत्र में 1,329 माध्यमिक विद्यालय और 397 उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। परीक्षा प्रबंधन के संदर्भ में यह कार्यालय 97 एसएसएलसी केंद्रों तथा 78 एचएसएसएलसी परीक्षा केंद्रों की पूरी व्यवस्था संभालता है। इसके अलावा वार्षिक मूल्यांकन प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए हर साल 1,300 से अधिक परीक्षकों की नियुक्ति भी इसी केंद्र से की जाती है।
छात्रों के खातों में सीधी वित्तीय सहायता
कार्यक्रम के दौरान समग्र शिक्षा अभियान के तहत सत्र 2026-27 के लिए स्कूल यूनिफॉर्म अनुदान जारी किया गया। इस योजना के दायरे में कुल 2,98,013 छात्र-छात्राओं को लाया गया है, जिनमें 1,47,419 छात्र और 1,50,594 छात्राएं शामिल हैं। प्रत्येक लाभार्थी को 600 रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। कुल 17.88 करोड़ रुपये का यह वित्तीय आवंटन परिजनों और अभिभावकों के आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भेजा जा रहा है।
विशेष आवश्यकता वाले 3,440 बच्चों के लिए 57.62 लाख रुपये के शिक्षा अधिकारों का प्रावधान किया गया है। इसमें 852 बच्चों को एस्कॉर्ट भत्ता, 908 बच्चों को परिवहन सहायता, 924 छात्राओं को वजीफा और विद्यालय आने में असमर्थ 756 बच्चों के लिए गृह-आधारित शिक्षण सहायता की व्यवस्था शामिल है। इस समावेशी पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शारीरिक या भौगोलिक बाधाओं के कारण कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।
मिशन एजुकेशन और स्कूलों का पुनर्गठन
राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए यह बात रेखांकित की गई कि शिक्षा में ढांचागत सुधार एक विशाल लक्ष्य को साधने जैसा है, जिसके लिए स्पष्ट नीति और रोडमैप की आवश्यकता होती है। जब 2019 में मिशन एजुकेशन की रूपरेखा तैयार की गई थी, तब कुल जरूरत 3000 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसकी शुरुआत 100 करोड़ रुपये के प्रारंभिक कोष से की गई। विभिन्न चरणों के तहत अब तक 2,230 स्कूलों के लिए 457.41 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, एशियाई विकास बैंक की सहायता से संचालित एसएचसीडीएम परियोजना के माध्यम से 182 संस्थानों को आधुनिक कंप्यूटर लैब, एसटीईएम प्रयोगशालाओं और डिजिटल कक्षाओं से लैस किया गया है।
संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयों के नेटवर्क का पुनर्गठन भी किया गया है। शून्य अथवा अत्यंत कम नामांकन वाले संस्थानों का विलय करके कुल शैक्षणिक इकाइयों की संख्या 14,582 से घटाकर 11,443 कर दी गई है, ताकि शिक्षकों और आवश्यक सुविधाओं को केंद्रित किया जा सके। उच्चतर माध्यमिक स्तर पर पहुंच बढ़ाने के लिए संस्थाओं का दर्जा बढ़ाया गया है, जिससे ऐसे विद्यालयों की तादाद 2024-25 के 427 से बढ़कर 2025-26 में 545 तक पहुंच गई है।
सीएम इंपैक्ट प्लेटफॉर्म से परीक्षा परिणामों में उछाल
समारोह के मंच से 'सीएम इंपैक्ट गाइड' पुस्तक का भी विमोचन हुआ, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित शिक्षण प्रणाली से जुड़ी है। मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने इस अवसर पर कहा,
"हमारा मानना था कि हमारे पास एक स्पष्ट नीति और कार्ययोजना होनी चाहिए ताकि हम जान सकें कि हमें कहां पहुंचना है।"उन्होंने पुरानी व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा,
"पंद्रह-सोलह साल का बच्चा जब सपने देखना शुरू करता है, तभी एसएसएलसी परीक्षा में आधे छात्र अनुत्तीर्ण हो जाते थे; हम इसे कतई स्वीकार नहीं कर सकते।"
सीएम इंपैक्ट मंच के जरिए विद्यार्थियों को विषयवार पाठ्यक्रम, व्याख्यात्मक प्रश्नोत्तर, चैटबॉट सहायता और अभ्यास परीक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें भविष्य में ऑफलाइन माध्यम में भी प्रसारित करने की तैयारी है। इस तकनीकी पहल के चलते माध्यमिक परीक्षा परिणामों के उत्तीर्ण प्रतिशत में 41.2 प्रतिशत अंकों की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही कक्षा ग्यारहवीं से लेकर शोध स्तर तक मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना और बीच में पढ़ाई छोड़ चुके युवाओं, खिलाड़ियों एवं कलाकारों के लिए निजी परीक्षार्थी विकल्प जैसी व्यवस्थाएं जीवन-चक्र दृष्टिकोण के तहत चलाई जा रही हैं।
लैतुमख्राह क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का विस्तार
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय विधायक डॉ. एम. अम्पारीन लिंगदोह के प्रयासों की सराहना करते हुए स्थानीय विकास कार्यों का उल्लेख किया गया। लैतुमख्राह निर्वाचन क्षेत्र में 24 करोड़ रुपये की लागत से बारिक और मालकी में निर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स व इनडोर स्टेडियम तथा 35 करोड़ रुपये के विपणन परिसर की प्रगति पर बात हुई। पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने और फेरीवालों के लिए व्यवस्थित स्थान निर्धारित करने के उपायों को भी साझा किया गया।





















