नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के बहुप्रतीक्षित आईपीओ के बाद अब इसके शेयरों की लिस्टिंग का अगला अहम पड़ाव सामने आ चुका है। एनएसई के इक्विटी शेयर 24 सितंबर 2026 से सेकेंडरी मार्केट में आधिकारिक कारोबार के लिए उपलब्ध हो रहे हैं। शेयर बाजार में निवेश करने वाले प्रतिभागियों को पहले से यह स्पष्ट था कि देश के सबसे बड़े एक्सचेंज के शेयर प्राथमिक तौर पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर लिस्ट होंगे। हालांकि, अब इस व्यवस्था में एक और नया मंच जुड़ गया है, जिसके तहत 24 सितंबर से ही मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी एमएसईआई पर भी इन शेयरों की खरीद-बिक्री की जा सकेगी।
एमएसईआई ने सर्कुलर जारी कर दी जानकारी
मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया ने 23 सितंबर को एक सर्कुलर जारी करके इस पूरे कदम की औपचारिक घोषणा की। एक्सचेंज ने अपने सर्कुलर में स्पष्ट किया कि एनएसई के इक्विटी शेयरों को 24 सितंबर से कैपिटल मार्केट सेगमेंट में 'परमिटेड टू ट्रेड' श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया जा रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने के साथ ही जिन निवेशकों को एनएसई आईपीओ के जरिए शेयर आवंटित हुए हैं, वे 24 सितंबर से बीएसई के साथ-साथ एमएसईआई के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भी अपने ऑर्डर निष्पादित कर सकेंगे।
भारतीय पूंजी बाजार की संरचना में यह एक बेहद अनोखा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम है क्योंकि देश का सबसे बड़ा और प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज होने के बावजूद एनएसई के शेयर खुद अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर कारोबार के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। इस पूरे मसले पर नियामक स्थिति और एक्सचेंज के रुख को लेकर एनएसई के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष चौहान ने पहले ही स्पष्ट रुख जाहिर किया था। उन्होंने कहा था कि एक्सचेंज अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों के कारोबार की अनुमति हासिल करने के लिए सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पास किसी भी प्रकार की मंजूरी की मांग नहीं करेगा।
क्या है 'परमिटेड टू ट्रेड' श्रेणी और इसके नियम?
एमएसईआई के मौजूदा परिचालन ढांचे के अनुसार, 'परमिटेड टू ट्रेड' श्रेणी में शामिल की जाने वाली कंपनियों को उस एक्सचेंज के साथ कोई औपचारिक लिस्टिंग एग्रीमेंट यानी सूचीबद्धता समझौता नहीं करना पड़ता है। इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि ऐसी कंपनियों को उस एक्सचेंज को वे सभी विस्तृत खुलासे और अनुपालन रिपोर्ट नहीं सौंपनी पड़ती हैं, जो किसी एक्सचेंज पर औपचारिक रूप से लिस्टेड कंपनियों के लिए अनिवार्य होती हैं।
एनएसई के शेयरधारकों और सामान्य निवेशकों के लिए इस तकनीकी अंतर को समझना बेहद आवश्यक है। निवेशकों को यह ध्यान में रखना होगा कि एनएसई की प्राथमिक लिस्टिंग और उसकी औपचारिक प्रकटीकरण प्रणाली को एमएसईआई द्वारा दी जा रही इस अतिरिक्त ट्रेडिंग सुविधा के साथ मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए। एमएसईआई केवल एक वैकल्पिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और तरलता का जरिया प्रदान कर रहा है, न कि प्राथमिक लिस्टिंग स्थल।
दो एक्सचेंजों पर कारोबार और निवेशकों के लिए सावधानियां
जिन निवेशकों को सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से एनएसई के शेयर प्राप्त हुए हैं, वे 24 सितंबर को कारोबार शुरू होने के बाद सामान्य बाजार नियमों और निपटान प्रक्रियाओं के तहत इन शेयरों को बेच सकेंगे। एक से अधिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर शेयरों की एक साथ उपलब्धता होने से निवेशकों के सामने कुछ व्यावहारिक स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऑर्डर दर्ज करने से पहले निवेशकों को संबंधित एक्सचेंज का नाम, वहां चल रहा मौजूदा भाव और उस समय उपलब्ध तरलता की गहराई को भली-भांति जांच लेना चाहिए।
विशेष रूप से तेज खरीदारी या भारी बिकवाली के दौर में दोनों एक्सचेंजों पर उद्धृत कीमतों में अस्थायी अंतर देखने को मिल सकता है। ऐसी अस्थिर परिस्थितियों में निवेशकों को कभी भी यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि एक एक्सचेंज पर दिख रही कीमत दूसरे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध भाव के ठीक बराबर ही होगी। कीमतों का यह अंतर आर्बिट्राज और ऑर्डर एग्जीक्यूशन की गति पर भी निर्भर कर सकता है।
जो निवेशक लिस्टिंग वाले दिन ही अपने शेयरों को बेचने की रणनीति बना रहे हैं, उन्हें केवल गैर-आधिकारिक ग्रे मार्केट के संकेतों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसे प्रतिभागियों को आईपीओ के इश्यू प्राइस, अपने निवेश की समय-सीमा, बाजार में उभरने वाले वास्तविक भाव और दोनों तरफ की ट्रेडिंग वॉल्यूम की सक्रियता का आकलन करने के बाद ही कोई अंतिम वित्तीय निर्णय लेना चाहिए।
ग्रे मार्केट के रुझान और आईपीओ का मूल्यांकन
बाजार में लिस्टिंग से ठीक पहले के दौर में एनएसई के अनलिस्टेड शेयरों का कारोबार गैर-आधिकारिक ग्रे मार्केट में सामान्य या मामूली प्रीमियम पर देखा जा रहा था। एनएसई के सार्वजनिक निर्गम के लिए 1,700 रुपये से लेकर 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड निर्धारित किया गया था। ग्रे मार्केट में चल रहा अनौपचारिक प्रीमियम इश्यू प्राइस के ऊपरी स्तर यानी 1,785 रुपये के ऊपर केवल एक सीमित बढ़त का ही संकेत दे रहा था।
हालांकि, बाजार के सभी जानकारों का यह साफ तौर पर कहना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम पूरी तरह से एक अनौपचारिक और अपुष्ट पैमाना होता है, जिसमें किसी भी समय बेहद तेजी से उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसे कभी भी लिस्टिंग के दिन मिलने वाली गारंटीड कीमत या तय रिटर्न के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
22,562 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम और एंकर निवेशक
एनएसई का यह सार्वजनिक निर्गम कुल 12.64 करोड़ शेयरों के ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के जरिए लगभग 22,562 करोड़ रुपये जुटाने के इरादे से लाया गया था। इस निर्गम के लिए मूल्य दायरा 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर रखा गया था। चूंकि यह पूरा निर्गम पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल के रूप में पेश किया गया था, इसलिए आईपीओ से जुटाई जाने वाली समूची राशि एनएसई के खजाने में जाने के बजाय सीधे उन मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी जिन्होंने अपने शेयर बेचे हैं। इस लेन-देन से एनएसई की बैलेंस शीट में कोई नई इक्विटी पूंजी नहीं जुड़ेगी।
इस सार्वजनिक निर्गम को संस्थागत निवेशकों की तरफ से भी जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। आम जनता के लिए बोली खुलने से ठीक पहले एनएसई ने 150 से अधिक एंकर निवेशकों से लगभग 6,746 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस एंकर आवंटन में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की हिस्सेदारी 2,883 करोड़ रुपये रही। एंकर दौर में भाग लेने वाले प्रमुख वैश्विक दिग्गजों में जीआईसी, आबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और नॉर्जेस बैंक जैसे बड़े सॉवरेन और पेंशन फंड शामिल रहे।



















