मानसून के बादल जैसे ही राजस्थान के आसमान पर मंडराने लगते हैं, खेतों में हलचल तेज हो जाती है। किसान खरीफ की बुवाई के लिए जुताई, उन्नत बीजों के चयन और खाद का इंतजाम करने में जुट जाते हैं। लेकिन इस पूरी तैयारी में एक पहलू अक्सर पीछे छूट जाता है, और वह है सरकारी कृषि योजनाओं की सही और समय पर जानकारी। केंद्र और राज्य सरकार के तालमेल से प्रदेश में ऐसी कई योजनाएं चल रही हैं, जो खेती की लागत घटाने के साथ साथ खराब मौसम में किसान को आर्थिक रूप से संभाल लेती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इनका फायदा उसी को मिलता है जो समय रहते आवेदन कर देता है।
कृषि यंत्रों पर भारी सब्सिडी, महंगे उपकरण सस्ते दामों में
खेती को कम मेहनत और कम खर्च वाला बनाने की दिशा में राजस्थान सरकार किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर बड़ी छूट देती है। इस योजना के दायरे में ट्रैक्टर संचालित कृषि उपकरण, सीड ड्रिल, रोटावेटर, कल्टीवेटर, पावर टिलर और आधुनिक स्प्रे मशीन जैसे कई यंत्र आते हैं। अनुदान की राशि किसान की श्रेणी के हिसाब से तय होती है, यानी लघु, सीमांत या महिला किसान को उसके वर्ग के अनुसार निर्धारित सहायता मिलती है। नतीजा यह होता है कि जो उपकरण बाजार में महंगे पड़ते हैं, वे किसान को सस्ते में मिल जाते हैं और खेत के कामों में लगने वाला श्रम और समय दोनों की भारी बचत होती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: आपदा के खिलाफ सुरक्षा कवच
मानसून का मिजाज भरोसे लायक नहीं होता। कभी जरूरत से ज्यादा बारिश और बाढ़, तो कभी सूखा, ओलावृष्टि या कीटों का हमला फसल को बर्बाद कर सकता है। ऐसी प्राकृतिक मार से बचाव के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक ढाल का काम करती है। कृषि विभाग की सलाह है कि किसान बुवाई के साथ ही या तय समय सीमा के भीतर अपनी फसल का बीमा जरूर करा लें। फायदा यह है कि अगर किसी आपदा से फसल नष्ट हो जाए, तो उचित मुआवजा मिलने से किसान को आर्थिक नुकसान की भरपाई हो जाती है।
सम्मान निधि और सिंचाई पर अनुदान
राज्य की मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश के पात्र किसानों को अतिरिक्त वित्तीय मदद दी जाती है। यह रकम सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचती है, ताकि बीज और खाद जैसी तुरंत की जरूरतें बिना अड़चन पूरी हो सकें। पानी की बचत को लेकर भी सरकार सक्रिय है। ड्रिप यानी बूंद बूंद सिंचाई और स्प्रिंकलर यानी फव्वारा सिस्टम पर भारी अनुदान दिया जा रहा है। कम पानी में ज्यादा क्षेत्र सींचने वाली इन तकनीकों से जहां पानी बचता है, वहीं फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
मिट्टी की जांच और सस्ता कर्ज
अच्छी पैदावार की नींव खेत की मिट्टी की सेहत पर टिकी होती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card) के अंतर्गत कृषि विभाग किसानों के खेत की मिट्टी का मुफ्त परीक्षण करता है। इस कार्ड से किसान को पता चल जाता है कि उसकी जमीन में किस पोषक तत्व की कमी है, जिससे वह जरूरत के मुताबिक ही यूरिया या दूसरे उर्वरकों का सही इस्तेमाल कर लागत बचा सकता है। इसके अलावा सहकारी बैंकों के जरिए किसानों को खेती के कामों के लिए बेहद कम ब्याज दर पर या ब्याज माफी के साथ फसली ऋण (KCC) भी मुहैया कराया जाता है।
बुवाई से पहले उन्नत बीज और विशेषज्ञों की राय
मानसून के दौरान कृषि विभाग किसानों को प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीज रियायती दरों पर बांटता है। साथ ही विभाग के कृषि पर्यवेक्षक और विशेषज्ञ गांव गांव पहुंचकर किसानों को मौसम के पूर्वानुमान, सही फसल प्रबंधन, जैविक खेती और रोग नियंत्रण के तरीके समझाते हैं। विशेषज्ञ बार बार याद दिलाते हैं कि ज्यादातर योजनाओं में आवेदन की आखिरी तारीख तय होती है। इसलिए किसानों को मानसून शुरू होते ही अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र या कृषि कार्यालय जाकर अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन कर देना चाहिए, ताकि पूरा लाभ समय पर मिल सके और कोई मौका हाथ से न निकले।













