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फिजूलखर्ची रोकने के लिए दिल्ली की इन्फ्लुएंसर ने छोड़ा UPI, 80-20 कैश फॉर्मूले से बचा रही हैं पैसेमनी
2 अग॰ 2026, 12:30 am (45 दिन पहले)· 2

फिजूलखर्ची रोकने के लिए दिल्ली की इन्फ्लुएंसर ने छोड़ा UPI, 80-20 कैश फॉर्मूले से बचा रही हैं पैसे

दिल्ली की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सदाफ ने दो महीने तक UPI छोड़कर मुख्य रूप से कैश इस्तेमाल करने का अपना अनुभव साझा किया है, जिससे उन्हें फिजूलखर्ची रोकने और बचत बढ़ाने में मदद मिली।

भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI क्रांति ने लेनदेन के पूरे तरीके को बदलकर रख दिया है। पश्चिमी और विकसित देशों के लोग जब भारत की इस सहज डिजिटल भुगतान व्यवस्था को देखते हैं, तो हैरान रह जाते हैं। लेकिन इस तकनीक की वजह से लोगों की रोजमर्रा के खर्चों से जुड़ी आदतें भी प्रभावित हुई हैं। सीधे बैंक खाते से पैसे कटने के कारण अक्सर लोग जरूरत से ज्यादा खर्च कर बैठते हैं। इसी बढ़ती आदत पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सदाफ ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर UPI छोड़कर कैश इस्तेमाल करने का अपना अनुभव साझा किया है।

डिजिटल पेमेंट और फिजूलखर्ची के पीछे का मनोविज्ञान

सदाफ ने पिछले दो महीनों से जारी अपने इस नए प्रयोग के बारे में बताते हुए कहा कि सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अब उन्हें अपने हर खर्च का तुरंत अहसास होता है। जब वह पूरी तरह UPI पर निर्भर थीं, तब छोटे-मोटी खरीदारी पर उनका ध्यान ही नहीं जाता था। स्क्रीन पर क्यूआर कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता था, जिससे सुबह की कॉफी, स्नैक्स का ऑर्डर या ऑनलाइन खरीदारी उस समय भारी नहीं लगती थी। हालांकि, दिनभर में ऐसे छोटे-छोटे अनगिनत खर्च बिना पता चले आसानी से लगभग 1,000 रुपये तक पहुंच जाते थे।

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जब उन्होंने भौतिक मुद्रा यानी कैश का इस्तेमाल शुरू किया, तो खर्च करने की मानसिकता में बड़ा अंतर देखने को मिला। सदाफ के अनुसार, अपनी जेब से 500 रुपये का नोट निकालकर देने में एक स्वाभाविक हिचक महसूस होती है क्योंकि इंसान को दिखता है कि उसकी जेब से पैसा कम हो रहा है। इसके विपरीत, UPI के जरिए 1,000 रुपये भी बिना किसी हिचकिचाहट के खर्च हो जाते हैं क्योंकि इसमें पैसों का भौतिक रूप से जाना महसूस नहीं होता।

व्यवहारिक समाधान: 80-20 का कैश फॉर्मूला

अपने इस प्रयोग के सकारात्मक नतीजों के बावजूद सदाफ ने माना कि आज के समय में डिजिटल भुगतान को पूरी तरह बंद कर देना व्यावहारिक नहीं है। कैश लेनदेन में कई बार व्यावहारिक समस्याएं आती हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी दुकान पर 470 रुपये का बिल बनता है और आपके पास 500 रुपये का नोट है, तो अक्सर दुकानदार के पास छुट्टे पैसे नहीं होते। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए उन्होंने पूरी तरह UPI बंद करने के बजाय एक संतुलित तरीका अपनाया।

अब वह अपने बजट का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कैश के रूप में अपने पास रखती हैं, जबकि बाकी 20 प्रतिशत हिस्सा बैंक खाते में रखती हैं ताकि जरूरत पड़ने पर UPI से भुगतान किया जा सके। सदाफ का कहना है कि कैश साथ लेकर चलने में कुछ चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन वह हर खरीदारी के लिए दोबारा UPI पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहतीं, क्योंकि इस आदत ने उन्हें वित्तीय रूप से ज्यादा जागरूक बनाया है।

सोशल मीडिया पर बहस: कैश बनाम डिजिटल भुगतान

सदाफ के इस अनुभव पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। जहां कई लोगों ने पैसे बचाने के इस तरीके का समर्थन किया, वहीं कुछ लोगों ने आज के डिजिटल दौर में इसे कठिन बताया। एक यूजर ने अपनी समस्या साझा करते हुए लिखा कि दुर्भाग्य से अब लोग कैश स्वीकार करने से कतराते हैं। ज़ोमैटो और ब्लिंकिट जैसी सेवाओं पर कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प होने के बावजूद दिक्कतें आती हैं, यहां तक कि पोस्ट ऑफिस में भी अधिकारियों ने UPI से भुगतान करने के लिए कहा।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने भी कैश इस्तेमाल करने की कोशिश की थी, लेकिन छुट्टे पैसों की भारी किल्लत के कारण उन्हें मजबूरन दोबारा UPI का रुख करना पड़ा। वहीं, कई अन्य लोगों ने सदाफ की बात से सहमति जताते हुए स्वीकार किया कि कैश से भुगतान करने पर मानसिक नियंत्रण बना रहता है और अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगती है।

सवाल-जवाब

सदाफ कौन हैं और उन्होंने क्या प्रयोग किया?
सदाफ दिल्ली की एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जिन्होंने फिजूलखर्ची रोकने के लिए दो महीने तक UPI छोड़कर मुख्य रूप से कैश से लेनदेन किया।
UPI से भुगतान करने पर फिजूलखर्ची क्यों बढ़ जाती है?
डिजिटल भुगतान में पैसे सीधे बैंक खाते से तुरंत कट जाते हैं, जिससे छोटे खर्चों (जैसे 1,000 रुपये तक के छोटे ऑर्डर) का तुरंत अहसास नहीं होता।
सदाफ का 80-20 का कैश फॉर्मूला क्या है?
वह अपने कुल खर्च का 80% हिस्सा भौतिक कैश में रखती हैं और 20% हिस्सा आपातकालीन या अनिवार्य UPI भुगतान के लिए बैंक में रखती हैं।
कैश से भुगतान करने में क्या मुख्य समस्याएं आती हैं?
छुट्टे पैसों (चेंज) की किल्लत होना, ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं (जैसे ज़ोमैटो और ब्लिंकिट) में कैश स्वीकार न करना और कई जगहों पर UPI की मांग होना मुख्य चुनौतियां हैं।
क्या सदाफ ने UPI का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया है?
नहीं, उन्होंने माना कि 100% कैश इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए वे आवश्यकता पड़ने पर UPI का उपयोग करती हैं।
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