पारंपरिक फसलों के मुकाबले बागवानी और पुष्पकृषि अपनाकर किसान कम समय में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता के अनुसार, अगस्त और सितंबर का महीना फूलों की खेती की शुरुआत करने का सबसे उपयुक्त समय होता है। इस मौसम में सही योजना के साथ बुवाई और रोपाई करने से आगामी त्योहारों और शादियों के सीजन में बाजार से बेहतरीन दाम प्राप्त होते हैं। केंद्र और राज्य सरकार भी इस दिशा में किसानों को प्रोत्साहन दे रही हैं, जिससे लागत का एक बड़ा हिस्सा सब्सिडी के रूप में वापस मिल जाता है।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत सरकारी अनुदान की योजना
पुष्पकृषि को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत किसानों को 10,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक का अनुदान दिया जाता है, जो कुल खेती की लागत का लगभग 50% तक होता है। गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा और ग्लेडियोलस जैसी मुख्य किस्मों पर यह सब्सिडी प्रभावी है। इसका लाभ उठाने के लिए किसान अपने जिले के उद्यान विभाग कार्यालय में संपर्क करके आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर सकते हैं।
1. गेंदे की खेती: कम समय में दिवाली पर बंपर कमाई
गेंदे की मांग धार्मिक पूजा, विवाह समारोहों और मंदिरों में साल भर बनी रहती है। रोपाई के महज 60 से 70 दिन के भीतर यह फसल तैयार हो जाती है। जुलाई और अगस्त के दौरान इसकी पौध तैयार की जाती है। चूंकि यह समय मानसून का होता है, इसलिए जलजमाव से बचाने के लिए पौध को शेडनेट या पॉलीहाउस में तैयार करने की सलाह दी जाती है। पौध तैयार होने के बाद इसे मुख्य खेत में रोप दिया जाता है।
गेंदे का एक बड़ा फायदा यह है कि इसे खेत के चारों तरफ लगाने से यह प्राकृतिक कीट जाल यानी इंसेक्ट ट्रैप का काम करता है और मुख्य फसल को नुकसानदायक कीड़ों से सुरक्षित रखता है। दिवाली के त्यौहार के समय बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों चरम पर होती हैं। 1 एकड़ खेत से लगभग 80 से 100 क्विंटल तक फूलों की उपज प्राप्त होती है। बाजार के मौजूदा दरों के अनुसार, किसान 1 एकड़ से 50,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये तक का शुद्ध लाभ आसानी से कमा सकते हैं।
2. रजनीगंधा: एक बार रोपाई और 3 साल तक निरंतर उत्पादन
रजनीगंधा अपने तीव्र सुगंध और आकर्षक कट फ्लावर के लिए जानी जाती है। इसका व्यापक उपयोग हार बनाने और मंडप की सजावट में किया जाता है। इसकी खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार कंदों की रोपाई करने के बाद लगातार 2 से 3 साल तक उत्पादन मिलता रहता है।
इसकी बुवाई कंदों द्वारा की जाती है, जिसमें कंद से कंद तथा कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर बाय 30 सेंटीमीटर रखी जाती है। इस फसल को अत्यधिक जल की आवश्यकता नहीं होती है। अगस्त और सितंबर की बारिश समाप्त होने के बाद खेत में हल्की सिंचाई करते रहना पर्याप्त होता है। 1 एकड़ में रजनीगंधा की खेती करने से किसान 1,50,000 रुपये से 2,00,000 रुपये तक की शानदार कमाई कर सकते हैं।
3. गुलदाउदी: सर्दियों की रानी से 1 लाख तक मुनाफा
गुलदाउदी को सर्दियों की रानी भी कहा जाता है और ठंड के मौसम में इसकी मांग सबसे अधिक होती है। इसे खेत के साथ-साथ गमलों में भी उगाया जा सकता है। यह कई जीवंत रंगों में उपलब्ध होती है जो सजावट और बागवानी के आकर्षण को बढ़ाती है।
गुलदाउदी की पौध अगस्त और सितंबर के महीनों में पुराने पौधों की कटिंग से तैयार की जाती है। खेत में रोपाई के बाद नवंबर से जनवरी के बीच फूलों की तुड़ाई शुरू हो जाती है। 1 एकड़ में गुलदाउदी उगाने पर किसानों को 80,000 रुपये से 1,00,000 रुपये तक का शुद्ध वित्तीय लाभ मिलता है।
4. ग्लेडियोलस: शादी के सीजन और गुलदस्तों में भारी मांग
ग्लेडियोलस एक अत्यंत लोकप्रिय और प्रीमियम श्रेणी का फूल है जो विभिन्न एकल और बहुरंगी किस्मों में आता है। इसकी खेती भी रजनीगंधा की तरह कंदों के माध्यम से की जाती है। गुलदस्ते बनाने और बड़े शादी समारोहों की सजावट में ग्लेडियोलस की बहुत भारी मांग रहती है। अगस्त और सितंबर में नियोजित तरीके से लगाई गई यह फसल त्योहारों और सर्दियों के शादी सीजन के दौरान बाजार में आती है, जिससे किसानों को उपज के ऊंचे दाम मिलते हैं।



















