उत्तर प्रदेश में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के क्रियान्वयन में चित्रकूट जिले ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में चित्रकूट ने पूरे बुंदेलखंड अंचल में पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि समूचे उत्तर प्रदेश के स्तर पर जिले की रैंकिंग चौथी रही है। सरकारी प्रोत्साहन और ऋण सहायता के माध्यम से जिले के सैकड़ों युवा अब नौकरी तलाशने के बजाय खुद के उद्यम स्थापित कर दूसरों के लिए भी अवसर पैदा कर रहे हैं।
वर्षवार आंकड़ों में दिखा स्वरोजगार का उत्साह
जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना की शुरुआत से लेकर अब तक चित्रकूट जिले में कुल 1,853 युवाओं को आर्थिक सहायता देकर उनके नए व्यवसाय स्थापित करवाए जा चुके हैं। साल-दर-साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 230 युवाओं ने इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त की। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना ने भारी गति पकड़ी और 1,229 युवाओं को अपना उद्यम शुरू करने का मौका मिला। वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 394 युवाओं को इस योजना का लाभ देकर रोजगार के साधनों से जोड़ा जा चुका है।
योजना की पात्रता और आवेदन की सरल प्रक्रिया
उद्योग उपायुक्त चंद्र प्रकाश पटेल के मुताबिक, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का मुख्य ध्येय युवाओं को उनके अपने गांव, कस्बे या शहर में ही अपनी रुचि और कौशल के अनुसार रोजगार शुरू करने के लिए पूंजी उपलब्ध कराना है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक की आयु 21 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा अभ्यर्थी की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कम से कम आठवीं पास होना अनिवार्य है। इच्छुक युवाओं को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए अपने आधार कार्ड और प्रस्तावित व्यवसाय से संबंधित खर्च का कोटेशन लेकर जिला उद्योग कार्यालय में संपर्क करना होता है, जहां से कागजी औपचारिकताएं पूरी कर ऋण मंजूर किया जाता है।
इन विविध व्यवसायों के लिए उपलब्ध है ऋण सहायता
इस योजना के अंतर्गत पारंपरिक विनिर्माण गतिविधियों से लेकर आधुनिक सेवा क्षेत्रों तक के व्यवसायों के लिए ऋण प्रदान किया जा रहा है। योजना के माध्यम से युवा आटा चक्की, तेल मिल, लोह कला उद्योग, खिड़की-दरवाजा निर्माण तथा फर्नीचर उद्योग जैसे निर्माण कार्य शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नमकीन, अचार-मुरब्बा निर्माण, बेकरी और मिठाई निर्माण की इकाइयां शामिल हैं। कुटीर उद्योगों में कूलर बॉक्स निर्माण, दोना-पत्तल निर्माण, टेंट हाउस व्यवसाय, बल्ली-पटरी आपूर्ति, आरओ वाटर सप्लाई और ई-रिक्शा संचालन के लिए भी वित्तीय मदद दी जा रही है।
सेवा क्षेत्र और दुकानदारों को भी मिल रहा संबल
योजना केवल विनिर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक जरूरतों से जुड़ी सेवाओं और फुटकर कारोबार के लिए भी इसके तहत आसान शर्तों पर सहायता दी जा रही है। युवा ऑटोमोबाइल गैरेज, मोबाइल फोन रिपेयरिंग, दर्जी दुकान, ब्यूटी पार्लर, सैलून, रेस्टोरेंट, कपड़े की दुकान और जनसेवा केंद्र जैसे संस्थान खोलकर सम्मानजनक आजीविका कमा रहे हैं। उद्योग विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस योजना ने ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी इलाकों में बेरोजगारी कम करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में बड़ी भूमिका निभाई है।



















