देश के सबसे महंगे आशियानों में शुमार एक अल्ट्रा लग्जरी अपार्टमेंट इन दिनों खासी चर्चा में है। मुंबई के पॉश इलाके वर्ली में बने इस सी-फेसिंग घर की कीमत करीब 703 करोड़ रुपये आंकी गई है। लीना गांधी तिवारी ने इस शानदार संपत्ति को पिछले साल खरीदा था और यह आज भी देश की सबसे महंगी आवासीय डील में से एक बनी हुई है। इस भारी-भरकम सौदे के तहत उन्होंने केवल प्रॉपर्टी के मूल दाम के तौर पर 639 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि इसके अतिरिक्त लगभग 63.9 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम स्टांप ड्यूटी और जीएसटी के रूप में चुकानी पड़ी थी।
नमन जना टॉवर में चार मंजिलों में फैला है यह आशियाना
यह भव्य आशियाना वर्ली में स्थित प्रसिद्ध नमन जना टॉवर के भीतर बना हुआ है। यह विशेष संपत्ति इस टॉवर की 32वीं मंजिल से शुरू होकर 35वीं मंजिल तक यानी कुल चार मंजिलों में फैली हुई है। इस फ्लैट का कुल कार्पेट एरिया 11,000 वर्गफुट है, जबकि इसका कुल मिलाकर निर्मित क्षेत्रफल 22 हजार वर्गफुट से भी अधिक बैठता है। बाजार में इस शानदार प्रॉपर्टी के प्रति वर्गफुट की कीमत 2.83 से 3 लाख रुपये के बीच आंकी गई है। चार मंजिलों के इस बड़े हिस्से को जोड़ने पर कुल मिलाकर 703 करोड़ रुपये की लागत आई है।
प्रसिद्ध श्री नमन ग्रुप का प्रोजेक्ट और बेहतरीन कनेक्टिविटी
यह गगनचुंबी टॉवर श्री नमन ग्रुप द्वारा विकसित किया गया है, जो मुंबई समेत देश के कई बड़े शहरों में प्रीमियम और लग्जरी प्रॉपर्टी तैयार करने के लिए जाना जाता है। यह कंपनी नामी आर्किटेक्चरल फर्म तलाती एंड पार्टनर के साथ मिलकर काम करती है। लीना का यह आशियाना वर्ली के 150 मीटर लंबे उस आवासीय टॉवर का हिस्सा है जिसमें कुल 22 रेजिडेंशियल फ्लोर और 11 पार्किंग लेवल बनाए गए हैं। इस टॉवर में 6,500 वर्गफुट आकार वाले 3बीएचके, 4बीएचके और 5बीएचके फ्लैट भी मौजूद हैं। इस जगह से बांद्रा-वर्ली सी लिंक और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे की कनेक्टिविटी बेहद आसान है, जिससे पूरे शहर में आना-जाना बहुत सुगम हो जाता है।
यूएसवी प्राइवेट लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं लीना गांधी तिवारी
इस आलीशान आशियाने की मालकिन लीना गांधी तिवारी जानी-मानी फार्मास्यूटिकल कंपनी यूएसवी प्राइवेट लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं। मुंबई स्थित यह कंपनी मुख्य रूप से डायबिटिक्स केयर और बायोसिमिलर सेगमेंट में कारोबार करती है। उनकी कुल संपत्ति लगभग 3 अरब डॉलर यानी करीब 30 हजार करोड़ रुपये के आसपास है। वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की सूची में वह 1,392वें पायदान पर आती हैं। वह केवल एक सफल महिला उद्यमी के रूप में ही नहीं पहचानी जातीं, बल्कि देश के बड़े दानवीरों में भी उनकी गिनती होती है। इस कंपनी की स्थापना उनके दादा विट्ठल गांधी ने साल 1961 में की थी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और उच्च शिक्षा का सफर
लीना गांधी का विवाह प्रशांत तिवारी के साथ हुआ था, जिसके बाद उनका नाम लीना गांधी तिवारी हो गया। उनके पति प्रशांत यूएसवी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यभार संभालते हैं। दोनों ने मिलकर इस पारिवारिक कारोबार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। लीना ने मुंबई यूनिवर्सिटी से बीकॉम की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद अमेरिका की बोस्टन University से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। कारोबारी परिवार में जन्म लेने और पलने-बढ़ने के कारण उन्हें बचपन से ही बिजनेस का व्यावहारिक अनुभव मिल गया था, और पढ़ाई पूरी होते ही उन्होंने यूएसवी ज्वाइन कर ली थी।
फार्मा सेक्टर में महारत और परोपकारी कार्य
लीना के नेतृत्व में यूएसवी ने कार्डियोवैस्कुलर, बायोसिमिलर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं बनाने में खासी विशेषज्ञता हासिल की है। बिजनेस जगत में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। हुरुन इंडिया की साल 2019 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें दुनिया भर के परोपकारियों की सूची में 23वां स्थान मिला था, जब उन्होंने लगभग 34 करोड़ रुपये का दान दिया था। उस दौरान भारतीय महिला दानवीरों की सूची में वह तीसरे स्थान पर थीं।



















