बिहार अब चमड़ा और फुटवियर कारोबार में देश के बड़े राज्यों के बराबर खड़ा होने की तैयारी में है. मुजफ्फरपुर जिले में बन रहा एक मेगा औद्योगिक पार्क अब हकीकत बन चुका है और इसमें उत्पादन भी शुरू हो गया है.
मोतिपुर में 140 करोड़ का प्रोजेक्ट
राज्य सरकार की औद्योगिक नीति के तहत बियाडा यानी बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण, मुजफ्फरपुर के मोतिपुर प्रखंड के महुअल गांव में करीब 62.17 एकड़ जमीन पर मेगा लेदर फुटवियर एंड एक्सेसरीज पार्क बना रहा है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर तकरीबन 140 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. सरकार को उम्मीद है कि इससे बिहार में बने चमड़े के सामान को न सिर्फ देश में, बल्कि दुनियाभर के बाजारों में भी नई पहचान मिलेगी.
मकसद, गांव में ही रोजगार
इस पार्क के पीछे राज्य सरकार की सोच साफ है, बिहार में उद्योग बढ़ें ताकि स्थानीय स्तर पर ही लोगों को काम मिले और युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े. इसी वजह से यहां आधुनिक सुविधाएं तैयार की जा रही हैं, जैसे कॉमन फैसिलिटी सेंटर यानी सीएफसी, ट्रेनिंग सेंटर, अच्छी सड़कें, बिजली और बाकी जरूरी इंतजाम, जिससे नए उद्यमियों को उत्पादन शुरू करने में दिक्कत न आए. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लेदर क्लस्टर के 24 औद्योगिक शेड में काम पहले ही शुरू हो चुका है.
यहीं बन रहे जूते, चप्पल, बैग और बेल्ट
इन शेड में तरह-तरह के चमड़े के जूते, चप्पल, बैग, बेल्ट और दूसरे लेदर प्रोडक्ट तैयार हो रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट से सीधे और परोक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.
महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी
इस पार्क की खास बात यह है कि यहां महिलाओं की भागीदारी भी काफी बड़ी है. अधिकारियों के अनुसार अब तक एक हजार से ज्यादा जीविका दीदियों को यहां रोजगार मिल चुका है. इसके अलावा महिला उद्यमी योजना के तहत लेदर क्लस्टर को और आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं खुद का रोजगार शुरू कर सकें और उद्यमिता से जुड़ सकें. सरकार को उम्मीद है कि इसका फायदा आसपास की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा.
कानपुर और चेन्नई को टक्कर
अब तक देश में लेदर इंडस्ट्री पर तमिलनाडु के चेन्नई और उत्तर प्रदेश के कानपुर का ही दबदबा रहा है. लेकिन मुजफ्फरपुर में तैयार हो रहे इस मेगा पार्क के बाद बिहार भी लेदर मैन्युफैक्चरिंग में देश का अगला बड़ा नाम बनने की राह पर है. इससे राज्य के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
'मेड इन बिहार' को मिलेगी पहचान
अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित कामगारों और बेहतर उत्पादन क्षमता के दम पर यहां बनने वाले चमड़े के प्रोडक्ट घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी पूरी तरह तैयार होंगे. राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 'मेड इन बिहार' ब्रांड को देश और दुनिया, दोनों जगह पहचान मिले. सरकार का मानना है कि यह मेगा लेदर फुटवियर एंड एक्सेसरीज पार्क सिर्फ बिहार को चमड़ा उद्योग का नया केंद्र ही नहीं बनाएगा, बल्कि रोजगार, महिला सशक्तिकरण और औद्योगिक निवेश बढ़ाकर राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा.




















