शराब के शौकीन लोगों की सबसे बड़ी परेशानी यही रहती है कि पूरे पैसे चुकाने के बाद भी हाथ में असली माल आएगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। देश में नकली शराब का धंधा जिस रफ्तार से फैल रहा है, उसमें असली और बढ़िया क्वालिटी वाली व्हिस्की ढूंढना अपने आप में एक चुनौती बन गया है। अब इसी झंझट का हल निकालने के लिए हर बोतल पर एक खास होलोग्राम लगाने का इंतजाम किया जा रहा है। बोतल पर नजर पड़ते ही ग्राहक को पता चल जाएगा कि उसके हाथ में असली शराब है या मिलावटी। देश में तैयार होने वाली हर सिंगल माल्ट व्हिस्की पर यह होलोग्राम चस्पा किया जाएगा।
इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन (आईएमडब्ल्यूए) ने साफ किया है कि भारत में बनी सिंगल माल्ट व्हिस्की की असलियत और गुणवत्ता के मानकों को पक्का करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। एसोसिएशन ने सिंगल माल्ट व्हिस्की के लिए होलोग्राम के रूप में एक प्रमाणन ट्रेडमार्क लागू करने का ऐलान किया है। प्रीमियम मांग और निर्यात की वजह से इस श्रेणी की घरेलू मांग तेजी से बढ़ रही है, और ग्लोबल मार्केट में भी व्हिस्की पसंद करने वालों के बीच इसकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।
किन कंपनियों को मिलेगा यह होलोग्राम
आईएमडब्ल्यूए के मुताबिक, यह प्रमाणन ट्रेडमार्क असली व्हिस्की होने की गारंटी की तरह काम करेगा। यह सिर्फ उन्हीं निर्माताओं को दिया जाएगा जो एसोसिएशन के तय किए गए उत्पादन मानकों पर खरा उतरेंगे। ये मानक दुनिया भर में मान्य पैमानों के हिसाब से बनाए गए हैं, और इनमें भारत की अपनी खास भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों का भी ध्यान रखा गया है। जो कंपनियां इन शर्तों को पूरा नहीं करेंगी, उन्हें अपनी बोतलों पर यह होलोग्राम लगाने की इजाजत नहीं मिलेगी।
कंपनियों के लिए कड़ी शर्तें
एसोसिएशन ने बताया कि पात्र बनने के लिए निर्माताओं को बेहद सख्त नियमों से गुजरना होगा। इनमें 100 फीसदी माल्टेड जौ का इस्तेमाल शामिल है, यानी इसमें शीरा या न्यूट्रल स्पिरिट नहीं मिलाया जा सकता। उत्पादन भारत में किसी एक ही डिस्टिलरी में होना चाहिए, आसवन तांबे के पॉट स्टिल में करना होगा, और अधिकतम 700 लीटर की ओक बैरल में कम से कम तीन साल तक इसे एज करना जरूरी होगा। एसोसिएशन का कहना है कि मैशिंग, आसवन और बॉटलिंग समेत पूरी प्रक्रिया भारत में ही पूरी की जानी चाहिए, और किसी भी बाहरी फ्लेवरिंग एजेंट को मिलाने की छूट नहीं होगी।
क्वालिटी पर पूरा जोर
आईएमडब्ल्यूए के महानिदेशक मेजर जनरल (डॉ.) राजेश चोपड़ा (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह प्रमाणन चिह्न सिर्फ नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद असलियत और प्रक्रिया की शुद्धता के लिए एक साझा बुनियाद तैयार करना है। इस पहल के जरिए बाजार में पारदर्शिता लाना, उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत करना और भरोसेमंद मानकों के आधार पर इस श्रेणी को आगे बढ़ाना तय किया जाएगा। जुलाई 2024 में एक गैर-लाभकारी उद्योग संस्था के तौर पर बनी आईएमडब्ल्यूए भारतीय माल्ट व्हिस्की निर्माताओं की नुमाइंदगी करती है और इस क्षेत्र में गुणवत्ता, असलियत तथा मानकीकरण को बढ़ावा देने का काम करती है।













