सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा अन्वेषण इकाई ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने ओडिशा तट से दूर गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस के नए भंडार की खोज की है। कंपनी के गहरे समुद्री अन्वेषण अभियान 'समुद्र मंथन' के अंतर्गत यह सफलता कोणार्क से लगभग 43 किलोमीटर दूर महानदी अपतटीय बेसिन में मिली है। वहां खोदे गए कुएं 'MN-DW18-1-H-D' में 18 सितंबर को गैस के संकेत मिले, जिसे व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक पाए जाने की स्थिति में तेजी से विकसित कर उत्पादन से जोड़ा जा सकता है।
महानदी बेसिन में पहले कुएं की खुदाई से मिली कामयाबी
महानदी अपतटीय बेसिन के इस विशेष अभियान में ओएनजीसी द्वारा खोदा गया यह पहला अन्वेषण कुआं है। इस कुएं की ड्रिलिंग 1623 मीटर की लक्षित गहराई तक की गई, जहां 1441 से 1452 मीटर की गहराई के बीच प्राकृतिक गैस के भंडार की मौजूदगी दर्ज की गई। परीक्षण के दौरान पिछले तीन दिनों से कुएं से लगातार गैस का प्रवाह हो रहा है, और इसका प्रेशर तथा फ्लो दोनों ही तकनीकी रूप से काफी उत्साहजनक बने हुए हैं। हालांकि, इस पूरे भंडार की वास्तविक क्षमता का पता लगाने के लिए अभी आगे का विस्तृत मूल्यांकन और व्यावसायिक आकलन किया जाना बाकी है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम 2025 से मिलेगा बढ़ावा
ओडिशा के समुद्री तट से अपेक्षाकृत कम दूरी पर स्थित होने के कारण इस खोज का मुद्रीकरण तेजी से संभव हो सकता है, बशर्ते अंतिम व्यावसायिक समीक्षा इसे पूरी तरह व्यावहारिक ठहराए। इस तरह की परियोजनाओं को हाल ही में अधिसूचित पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 का सीधा लाभ मिल सकता है। इन नियमों के तहत साझा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करके गहरे समुद्री संसाधनों को तेजी से उत्पादन चरण में लाया जा सकता है, जिससे लागत और समय दोनों की बचत होती है। इस संबंध में अधिक जानकारी कंपनी ने X पर साझा की है।
जुलाई में शुरू हुआ था ड्रिलिंग अभियान
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 25 जुलाई, 2026 को इस महत्वपूर्ण गहरे समुद्री कुएं की खुदाई की शुरुआत की थी। लगभग दो महीने के भीतर गैस का यह भंडार सामने आना ओएनजीसी के डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह सफलता घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार को विस्तार देने के प्रयासों को भी नई मजबूती प्रदान करती है। इस समुद्री इलाके में पहले हुई दूसरी खोजों के साथ तालमेल बिठाकर और साझा सुविधाओं का निर्माण कर गहरे समुद्र में मौजूद इन गैस संसाधनों का दोहन जल्द शुरू करने का विकल्प उपलब्ध हो गया है।

















