देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में सामान्य कामकाज आगामी दिनों में गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। बैंक कर्मचारी यूनियनों के शीर्ष संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। यह कार्य बहिष्कार सोमवार से शुरू होकर बुधवार तक जारी रहेगा। कार्यदिवसों पर होने वाले इस विरोध प्रदर्शन के आगे-पीछे सप्ताहांत की छुट्टियां पड़ने के कारण कई शहरों और कस्बों में शाखा आधारित बैंकिंग कामकाज लगातार कई दिनों तक ठप रहने की संभावना बन गई है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए देश के प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने अपने खाताधारकों को जरूरी वित्तीय लेनदेन पहले ही पूरे करने की आधिकारिक सलाह जारी की है।
कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगें और हड़ताल की वजह
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से प्रस्तावित इस आंदोलन के पीछे लंबे समय से अनसुलझे मुद्दे हैं। यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह प्रावधान वर्ष 2024 के द्विपक्षीय वेतन समझौते के बाद से लगातार अटका हुआ है। इसके अलावा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि की मौजूदा व्यवस्था में सुधार, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा प्रभावी बनाने और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) के नियमों में एकरूपता लाने की मांग भी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है। यूनियनें वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े बाकी लंबित मामलों का भी त्वरित समाधान चाहती हैं।
प्रशासन की अपील और वित्तीय क्लोजिंग का संकट
केंद्र सरकार ने बैंक यूनियनों से कार्य बहिष्कार का अपना फैसला वापस लेने और सामान्य कामकाज जारी रखने का आग्रह किया है। प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारियों के हितों और उनकी कई प्रमुख मांगों पर पहले ही सार्थक बातचीत व कल्याणकारी कदमों के जरिए प्रगति हो चुकी है। सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि 28 से 30 सितंबर की समयसीमा वित्तीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील होती है, क्योंकि इसी अवधि में देश के सभी बैंक अपने अर्धवार्षिक खातों की क्लोजिंग प्रक्रिया को अंतिम रूप देते हैं। ऐसे नाजुक मोड़ पर हड़ताल होने से राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय ऑपरेशंस में भारी व्यवधान आ सकता है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने जारी किया परामर्श
देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने खाताधारकों को सतर्क करते हुए स्पष्ट किया है कि जिन लेनदेनों के लिए शाखा जाना अनिवार्य हो, उन्हें 28 सितंबर से पहले ही पूरा कर लिया जाए। संस्थान ने ग्राहकों को सुझाव दिया है कि वे नकदी निकासी, ट्रांसफर और अन्य नियमित आवश्यकताओं के लिए वैकल्पिक माध्यमों पर निर्भर रहें। भारतीय स्टेट बैंक ने इस दौरान ATM, कस्टमर सर्विस पॉइंट्स, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप्लिकेशन और UPI जैसे डिजिटल माध्यमों का अधिकाधिक इस्तेमाल करने की अपील की है ताकि ग्राहकों को असुविधा न हो।
पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन बैंक की तैयारियां
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी एक एडवाइजरी जारी कर ग्राहकों से अपील की है कि वे शाखा-आधारित सभी महत्वपूर्ण कार्य 25 सितंबर तक ही निपटा लें। संस्थान के अनुसार सामान्य लेनदेन की निरंतरता बनाए रखने के लिए ATM, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, UPI और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क सक्रिय रहेंगे। इसी क्रम में इंडियन बैंक ने भी 28, 29 और 30 सितंबर को संभावित हड़ताल की सूचना जारी करते हुए खाताधारकों को ATM/BNA मशीनों, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट सेवाओं तथा इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग प्लेटफॉर्मों के उपयोग की सलाह दी है।
किन बैंकिंग सेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर?
तीन दिनों की इस देशव्यापी हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं के मुख्य काउंटर बंद रह सकते हैं, जिसके चलते नकद जमा, नकद निकासी, चेक क्लीयरेंस, डिमांड ड्राफ्ट जारी करने और खाता विवरण में बदलाव जैसे व्यक्तिगत शाखा-आधारित काम सीधे तौर पर रुक सकते हैं। हालांकि सभी प्रमुख संस्थानों ने आश्वासन दिया है कि UPI, ATM नेटवर्क, मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग जैसी ऑनलाइन प्रणालियों को सुचारू रखने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे, फिर भी शाखाओं में कर्मचारियों की उपस्थिति के आधार पर जमीनी स्तर की कुछ सेवाएं आंशिक या पूरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।


















