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रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला: सैन्य उपकरणों का निर्यात हुआ आसान, ओजीईएल की वैधता 3 साल हुई और ग्लोबल मार्केट का दायरा बढ़ाव्यापार
28 अग॰ 2026, 6:19 pm (1 घंटे पहले)· 3

रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला: सैन्य उपकरणों का निर्यात हुआ आसान, ओजीईएल की वैधता 3 साल हुई और ग्लोबल मार्केट का दायरा बढ़ा

भारत सरकार ने रक्षा निर्यात नियमों और ओजीईएल व्यवस्था को सरल बनाते हुए लाइसेंस वैधता दो से बढ़ाकर तीन साल कर दी है, जिससे एमएसएमई और रक्षा कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार में कारोबार करना सुगम होगा।

भारत सरकार ने वैश्विक रक्षा बाजार में घरेलू विनिर्माण क्षमता को गति देने के लिए रक्षा निर्यात से जुड़ी नीतियों में व्यापक बदलाव किए हैं। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने निर्यात के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और ओपन General एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) व्यवस्था को पूरी तरह से सुव्यवस्थित और पारदर्शी बना दिया है। इस नीतिगत सुधार का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय रक्षा कंपनियों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं से राहत प्रदान करना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में लिए गए इन निर्णयों के बाद अब भारतीय रक्षा निर्यातकों को प्रत्येक व्यक्तिगत खेप के लिए बार-बार सरकारी स्वीकृतियां लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय निविदाओं और वैश्विक प्रदर्शनियों में भाग लेने की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी आएगी, जो भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत स्तंभ बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

कागजी कार्रवाई और परामर्श प्रक्रिया का सरलीकरण

रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के तहत निर्यात प्रक्रियाओं को गति देने के लिए नीतिगत अड़चनों को समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत अधिकांश मित्र राष्ट्रों को गैर-घातक श्रेणी के सैन्य व सुरक्षा उपकरण भेजने के लिए अब अंतर-मंत्रालयी पृथक परामर्श लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इस संशोधन से भारतीय निर्यातक बिना किसी प्रक्रियात्मक विलंब के विदेशी खरीदारों को अपने उत्पाद और उपकरण की आपूर्ति कर सकेंगे।

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इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनियों और विदेशी टेंडर्स में भाग लेने के लिए लगने वाले समय और प्रशासनिक स्वीकृतियों को भी आसान बनाया गया है। अब भारतीय रक्षा इकाइयां दुनिया भर में आयोजित होने वाले डिफेंस एक्सपो में अपने अत्याधुनिक हथियारों, तकनीकों और सैन्य प्रणालियों का तेजी से प्रदर्शन कर सकेंगी। इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की ब्रांड विजिबिलिटी और व्यावसायिक साख में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

सिंगल-विंडो सिस्टम और ओजीईएल की समय-सीमा में विस्तार

सरकार ने ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) की पूरी व्यवस्था को एकीकृत करते हुए एक ही छत के नीचे ला खड़ा किया है। इससे पहले प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म, स्पेयर पार्ट्स या कलपुर्जों के निर्यात और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए तीन अलग-अलग नियामक प्रक्रियाएं और आवेदन पथ प्रचलित थे। नई नीति में इन तीनों धाराओं को मिलाकर एक एकीकृत और सुव्यवस्थित सिंगल-विंडो सिस्टम में बदल दिया गया है।

इस एकीकृत व्यवस्था के तहत ओजीईएल लाइसेंस की वैधता अवधि को 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। लाइसेंस की समय-सीमा में एक वर्ष की वृद्धि होने से कंपनियों को बार-बार नवीनीकरण की जटिलताओं, प्रशासनिक लागत और समय की बर्बादी से स्थायी मुक्ति मिलेगी। इस कदम से भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी खरीदारों के साथ दीर्घकालिक व्यावसायिक अनुबंधों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना और भी आसान हो जाएगा।

41 देशों से बढ़कर वैश्विक बाजार तक भौगोलिक विस्तार

पूर्ववर्ती व्यवस्था में भारत की ओजीईएल सुविधा केवल 41 विशिष्ट देशों तक ही सीमित थी। रक्षा मंत्रालय ने अब इसका भौगोलिक दायरा बढ़ाकर लगभग पूरे विश्व के लिए खोल दिया है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित देशों और संवेदनशील क्षेत्रों को इस खुली छूट की परिधि से बाहर रखा गया है।

इस व्यापक भौगोलिक विस्तार से भारतीय एमएसएमई और स्थापित रक्षा घरानों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने के प्रचुर अवसर प्राप्त होंगे। इसके अतिरिक्‍त, जिन भारतीय कंपनियों के पास विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते हैं, उन्हें विशेष निर्यात मंजूरी प्रदान की जाएगी। यह प्रावधान उन भारतीय रक्षा इकाइयों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा जो वैश्विक रक्षा दिग्गजों की आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

छोटे हथियारों के कलपुर्जे और नागरिक सुरक्षा उपकरण

संशोधित रक्षा निर्यात नीति में छोटे कैलिबर के हथियारों के चुनिंदा गैर-संवेदनशील कलपुर्जों तथा नागरिक उपयोग में आने वाले सुरक्षा उपकरणों के निर्यात को भी स्वीकृति दे दी गई है। इस नीतिगत ढील से वैध अंतरराष्ट्रीय रक्षा व्यापार और सुरक्षा उपकरण बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए नए राजस्व स्रोत खुलेंगे।

रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि व्यापारिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण का तात्पर्य सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता करना नहीं है। संवेदनशील सैन्य प्रणालियों, घातक हथियारों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उपकरणों की कड़ी निगरानी और कड़ा नियंत्रण पूर्ववत जारी रहेगा। सरकार का मूल ध्येय कम जोखिम वाले रक्षा उपकरणों के व्यापार से लालफीताशाही और नौकरशाही बाधाओं को पूरी तरह समाप्त करना है।

रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड उछाल और ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य

यह दूरगामी नीतिगत सुधार ऐसे समय में सामने आया है जब भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र अभूतपूर्व वृद्धि दर दर्ज कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ (₹1,78,000 करोड़) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

इसी प्रकार, भारत के रक्षा निर्यात ने भी अपने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए ₹38,424 करोड़ का आंकड़ा हासिल कर लिया है। रक्षा मंत्रालय का अनुमान है कि निर्यात प्रक्रियाओं में किए गए इन ऐतिहासिक सुधारों और ओजीईएल के सरलीकरण के बल पर आने वाले वर्षों में देश का कुल रक्षा निर्यात आसानी से ₹50,000 करोड़ के मील के पत्थर को पार कर जाएगा।

सवाल-जवाब

रक्षा निर्यात नियमों में क्या मुख्य बदलाव किए गए हैं?
सरकार ने रक्षा निर्यात के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को सरल बनाया है और ओजीईएल (ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस) की वैधता 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी है।
ओजीईएल (OGEL) सुविधा अब कितने देशों के लिए उपलब्ध होगी?
पहले यह सुविधा केवल 41 देशों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधित देशों और संवेदनशील क्षेत्रों को छोड़कर लगभग पूरी दुनिया के लिए खोल दिया गया है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ (₹1,78,000 करोड़) और कुल रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
नियमों में ढील से एमएसएमई (MSME) सेक्टर को क्या फायदा होगा?
एमएसएमई कंपनियों को हर खेप के लिए सरकारी स्वीकृतियां नहीं लेनी होंगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और टेंडर्स में समय पर भाग लेना आसान हो जाएगा।
क्या नए नियमों से रक्षा सुरक्षा मानकों से कोई समझौता होगा?
नहीं, रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील रक्षा उपकरणों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सख्त निगरानी पहले की तरह जारी रहेगी।
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