राजस्थान में किसानों को अनुदानित खाद की सुलभ और पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार की साझा पहल पर ऑनलाइन उर्वरक वितरण व्यवस्था की शुरुआत की गई है। कृषि आयुक्तालय द्वारा जारी विशेष निर्देशों के तहत प्रदेश के 12 चुनिंदा जिलों में इस आधुनिक व्यवस्था को लागू किया गया है। टोंक जिले की पीपलू तहसील के अंतर्गत आने वाले जीएसएस संदेड़ा (ग्राम सेवा सहकारी समिति) से इस डिजिटल प्रणाली की औपचारिक शुरुआत हुई, जहाँ फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर्स सेल (एफएफएस) ऐप के जरिए किसानों को यूरिया और अन्य उर्वरक उपलब्ध कराए गए। इस कदम से लंबे समय से चली आ रही खाद की किल्लत और वितरण संबंधी अव्यवस्थाओं को दूर करने में बड़ी राहत मिलेगी।
जीएसएस संदेड़ा में प्रशिक्षण सह व्यावहारिक खरीद का आयोजन
डिजिटल वितरण व्यवस्था की शुरुआत के अवसर पर जीएसएस संदेड़ा परिसर में एक विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कृषि अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार जाट ने उपस्थित किसानों को एफएफएस ऐप के तकनीकी पहलुओं और इसके उपयोग की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि इस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से प्रत्येक किसान को दिए जाने वाले खाद का संपूर्ण ब्योरा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के तुरंत बाद किसानों ने स्वयं एफएफएस ऐप का उपयोग करके अपनी आवश्यकतानुसार अनुदानित उर्वरक की ऑनलाइन खरीद की और तकनीक के सहज क्रियान्वयन का अनुभव किया।
तकनीक से जुड़ी उर्वरक वितरण प्रणाली और पारदर्शिता
सरकार की इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य रियायती दरों पर मिलने वाले उर्वरकों के वितरण में शत-प्रतिशत पारदर्शिता लाना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी राज्य स्तर से लेकर तहसील और ग्राम पंचायत स्तर तक खाद की उपलब्धता, दैनिक बिक्री और स्टॉक की वास्तविक स्थिति की निगरानी आसानी से कर सकेंगे। इससे न केवल कालाबाजारी और अवैध जमाखोरी पर अंकुश लगेगा, बल्कि किसानों को उनकी पात्रता और उपलब्धता के अनुसार बिना किसी परेशानी के उर्वरक प्राप्त हो सकेगा। प्रदेश के चयनित 12 जिलों में इस प्रणाली का विस्तार कृषि क्षेत्र को तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में अहम पड़ाव है।
किसानों के लिए सुगम व्यवस्था और जागरूकता अभियान
कृषि विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नई प्रणाली लागू होने से खाद वितरण का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित रहेगा। किसान अपने मोबाइल या समिति केंद्र के माध्यम से खाद के स्टॉक का ब्योरा देख सकेंगे। विभागीय टीम द्वारा किसानों को ऐप संचालन का निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे बिना किसी माध्यम या बिचौलिए के सीधे सरकारी दरों पर खाद खरीद सकें। इस व्यवस्थित कदम से टोंक जिले सहित पूरे प्रदेश की कृषि आपूर्ति प्रणाली अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनेगी।



















