राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रैवासा धाम में नौ दिनों तक चलने वाले द्वितीय श्रीसियपिय मिलन महोत्सव का आयोजन 31 अगस्त से किया जा रहा है। यह भव्य आयोजन पूर्व अग्रपीठाधीश्वर स्वामी राघवाचार्य महाराज की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित हो रहा है, जो 8 सितंबर तक चलेगा। इस धार्मिक समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में संतों, महात्माओं और श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। शेखावाटी क्षेत्र के सबसे प्रमुख और बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में से एक माने जाने वाले इस महोत्सव में प्रतिदिन श्रीमद्भागवत कथा, विशेष प्रवचन, स्वर पाठ और भजनों का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
धार्मिक कथाओं का कार्यक्रम और भक्तिमय आयोजन
महोत्सव के नौ दिवसीय कार्यक्रम की जानकारी देते हुए श्री जानकीनाथ बड़ा मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष आशीष तिवाड़ी तथा सचिव ऋषभ शर्मा ने बताया कि 31 अगस्त से 7 सितंबर तक रोजाना दोपहर के समय अग्रपीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करेंगे। इस दौरान वे श्रद्धालुओं को भगवान की दिव्य लीलाओं तथा सनातन धर्म के आध्यात्मिक प्रसंगों का मर्म समझाएंगे। इसके अलावा, 1 सितंबर से 3 सितंबर के बीच सुप्रसिद्ध कथावाचक राधाकृष्णदास महाराज तीन दिवसीय नानी बाई का मायरो कथा का वाचन करेंगे। पीठ में हर दिन सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक भक्तमाल स्वर पाठ का नियमित आयोजन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को संत परंपरा और भक्ति मार्ग से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इस नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का औपचारिक समापन 8 सितंबर को विशेष पूजा-अर्चना और विशाल भंडारे के साथ किया जाएगा।
बारिश और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर
आयोजन के दौरान मानसून की बारिश और भारी जनसैलाब की संभावना को देखते हुए रैवासा धाम परिसर में व्यापक सुरक्षा व ढांचागत इंतजाम किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को मौसम की वजह से किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए परिसर में एक विशाल वॉटरप्रूफ डोम तैयार किया जा रहा है। इस विशाल डोम के भीतर लगभग 2000 लोगों के एक साथ बैठकर कथा सुनने की व्यवस्था की गई है। डोम में पर्याप्त रोशनी, पंखों और बिजली की निर्बाध आपूर्ति के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
बारिश के समय डोम के अंदर जलभराव रोकने के लिए एक अनोखा तकनीकी तरीका अपनाया गया है। जमीन पर लकड़ी के मजबूत बोर्ड बिछाए जा रहे हैं, ताकि यदि बारिश का पानी आता भी है तो वह बोर्ड्स के नीचे से आसानी से बहकर बाहर निकल जाए और अंदर बैठने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। डोम निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे गिरिराज सिंह ने बताया कि लगभग 50 कुशल कारीगर दिन-रात इस काम में लगे हुए हैं और 30 अगस्त तक निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया जाएगा। इसके साथ ही पीठ के बाहरी क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए इंटरलॉकिंग पेविंग का कार्य भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
स्वामी राघवाचार्य महाराज की जीवन यात्रा और दूरदर्शी योगदान
यह पूरा आयोजन पूर्व पीठाधीश्वर स्वामी राघवाचार्य महाराज के महान जीवन और उनकी आध्यात्मिक विरासत को समर्पित है। 8 सितंबर 1952 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित विरखेड़ा गांव में जन्मे स्वामी राघवाचार्य ने अपना पूरा जीवन वैदिक संस्कृति, संस्कृत भाषा और आध्यात्मिक शिक्षा के प्रसार में समर्पित कर दिया था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा चित्रकूट में प्राप्त की और उसके बाद पवित्र नगरी वाराणसी में लगातार 11 वर्षों तक वेदों का गहन एवं सूक्ष्म अध्ययन किया।
वाराणसी में अध्ययन पूर्ण करने के उपरांत स्वामी राघवाचार्य ने वर्ष 1983 में रैवासा धाम आकर शालिग्रामाचार्य से दीक्षा प्राप्त की। इसके पश्चात 25 फरवरी 1984 को उन्हें आधिकारिक रूप से रैवासा पीठ के पीठाधिपति पद पर आसीन किया गया। पीठाधीश्वर की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने धाम परिसर में एक वेद विद्यालय की नींव रखी और पूरे राजस्थान राज्य में वेदाश्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी तक वैदिक व संस्कृत शिक्षा पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया। आज से दो वर्ष पूर्व भाद्रपद कृष्ण द्वादशी की तिथि पर हृदयघात होने से उनका निधन हो गया था। उनकी स्मृति को जीवंत रखने और उनके दिखाए भक्ति मार्ग का स्मरण करने के लिए ही इस द्वितीय श्रीसियपिय मिलन महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है।




















