फेडरल रिजर्व की अधिकारी हैम्क ने हाल ही में एक सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इस साल के अंत तक महंगाई दर करीब 3 प्रतिशत पर बंद होगी, जो केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से अधिक है। उनके इस बयान को आर्थिक नीति में और अधिक सख्ती लाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में अर्थव्यवस्था के भीतर पर्याप्त वित्तीय अवरोध या सख्ती नजर नहीं आ रही है, जिसके चलते दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता महसूस हो रही है।
बाजार के आंकड़ों और विश्लेषकों के अनुसार, इस भाषण का स्कोर ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर दर्ज किया गया है। यह उच्च स्कोर इस बात का प्रमाण है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत मामलों में ढील देने के मूड में नहीं है। हैम्क ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय बैंक की साख इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने दोहरे जनादेश यानी मूल्य स्थिरता और पूर्ण रोजगार को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा करता है।
मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंक के मुख्य उद्देश्य
अमेरिका में मौद्रिक नीति का संचालन फेडरल रिजर्व द्वारा किया जाता है, जिसके मुख्य उद्देश्यों में कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और रोजगार के अधिकतम अवसरों को बढ़ावा देना शामिल है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को समायोजित करने के मुख्य हथियार का उपयोग करता है। जब बाजार में कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई दर 2 प्रतिशत के लक्ष्य को पार कर जाती है, तो बैंक ब्याज दरों में इजाफा करता है।
ब्याज दरें बढ़ने से देश भर में उधार लेना महंगा हो जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह नियंत्रित होता है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर निर्धारित लक्ष्य से नीचे चली जाती है या बेरोजगारी दर बढ़ जाती है, तो केंद्रीय बैंक दरों में कटौती कर सकता है ताकि आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके। फेडरल रिजर्व साल भर में कुल आठ बार नीतिगत बैठकें आयोजित करता है, जिनमें फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के अधिकारी आर्थिक हालात की समीक्षा करते हैं।
मात्रात्मक सहजता और कड़ाई की रणनीतियाँ
असामान्य आर्थिक परिस्थितियों या वित्तीय संकट के दौर में, फेडरल रिजर्व मात्रात्मक सहजता यानी क्वांटिटेटिव ईजिंग का सहारा ले सकता है। इस प्रक्रिया के तहत केंद्रीय बैंक बाजार में ऋण के प्रवाह को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मुद्रा जारी करता है और वित्तीय संस्थानों से उच्च ग्रेड के बॉन्ड खरीदता है। हालांकि, इस उपाय से आमतौर पर अमेरिकी डॉलर की ताकत पर थोड़ा असर पड़ता है और यह कमजोर हो सकता है।
इसके विपरीत प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग कहा जाता है, जिसमें केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व हो रहे बॉन्ड के मूलधन को दोबारा निवेश नहीं करता है। यह नीति आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक मानी जाती है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वर्तमान आर्थिक माहौल में नीति निर्माताओं का झुकाव सख्त कदमों की ओर अधिक है।
प्रमुख मुद्राओं और जिंस बाजारों का हाल
विदेशी मुद्रा बाजारों में विभिन्न जोड़ियों और जिंसों की चाल पर निवेशकों की गहरी नजर बनी हुई है। यूरोपीय सत्र के दौरान शुक्रवार को ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आई। व्यापारी वर्ग अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल बेंचमार्क संशोधन और जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड चेयर वार्श के पहले भाषण से पहले किसी भी बड़े जोखिम से बच रहा है।
इसी प्रकार, यूरो और डॉलर की जोड़ी भी यूरोपीय सत्र में स्थिर रुख के साथ कारोबार कर रही है। हालांकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक की सख्त नीतियों की उम्मीदों के कारण इस जोड़ी में गिरावट सीमित दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी का रुख देखा गया है और यह चढ़ते हुए चैनल पैटर्न के भीतर कारोबार कर रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी और ऊर्जा बाजार के ताजा रुझान
क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन की चाल में सुस्ती देखने को मिली है और यह महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तरों से नीचे आ गया है। इसके साथ ही एथेरियम और रिपल जैसी अन्य प्रमुख डिजिटल मुद्राएं भी इस ठंडे रुख का अनुसरण करती नजर आ रही हैं। ऊर्जा क्षेत्र में कच्चे तेल का बाजार भले ही शांत नजर आ रहा हो, लेकिन डीजल के दामों में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड में भारी उछाल दर्ज किया गया है, जो अब तक के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है।



















