भारतीय रिजर्व बैंक ने लंबे इंतजार के बाद प्रमुख नीतिगत दर में बढ़ोतरी का कदम उठाया है। मुद्रास्फीति की लगातार बनी चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी का इजाफा करने का फैसला लिया है। इस नए बदलाव के साथ देश में प्रभावी रेपो दर 5.25 फीसदी के पिछले स्तर से ऊपर चढ़कर अब 5.50 फीसदी पर पहुंच गई है। बीते 43 महीनों से रेपो दर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी, लेकिन ताजा संशोधन से आम लोगों के लिए होम लोन, ऑटो लोन और अन्य सभी तरह के रिटेल कर्ज की ब्याज दरें बढ़ना तय माना जा रहा है।
मौद्रिक नीति समिति की बैठक और गवर्नर का ऐलान
तीन दिनों तक चली मौद्रिक नीति समिति की सघन समीक्षा बैठक के उपरांत 7 अक्टूबर, बुधवार को केंद्रीय बैंक के फैसलों की औपचारिक जानकारी दी गई। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इन निर्णयों का ब्योरा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि बढ़ती महंगाई के दबाव के कारण नीतिगत दरों को बढ़ाना अपरिहार्य हो गया था। गवर्नर ने आधिकारिक तौर पर रेपो रेट में 0.25 फीसदी वृद्धि की घोषणा की, जिसके बाद यह दर 5.50 फीसदी हो गई है। देश में इससे पहले नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का कदम फरवरी, 2023 में उठाया गया था, जिसके बाद यह पहला मौका है जब रेपो रेट में सीधे तौर पर इजाफा दर्ज किया गया है।
खुदरा कर्ज और घर खरीदारों पर सीधा असर
नीतिगत दर में इस संशोधन का सीधा और त्वरित असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। देश के अधिकांश वाणिज्यिक बैंकों के खुदरा ऋण सीधे तौर पर केंद्रीय बैंक के रेपो रेट से जुड़े होते हैं। ऐसे में बैंक भी अपनी उधारी दरों में इजाफा करेंगे, जिससे होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें ऊपर चली जाएंगी। इस निर्णय से खासकर मकान खरीदारों और पहले से आवास ऋण चुका रहे ग्राहकों का मासिक बजट प्रभावित होगा, क्योंकि बैंकों की दरें बढ़ते ही उनकी समान मासिक किस्तों यानी ईएमआई की राशि में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
एसडीएफ और एमएसएफ दरों की वर्तमान स्थिति
रेपो रेट में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्रीय बैंक ने अपनी अन्य संबंधित प्रमुख ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं किया है। रिजर्व बैंक ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी एसडीएफ की दर को पूर्ववत 5.25 फीसदी के स्तर पर स्थिर रखा है। इसी प्रकार मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ की दर को भी बिना किसी बदलाव के 5.75 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।
नीतिगत रुख में सख्ती और आगे के संकेत
ब्याज दरों में इजाफा करने के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने नीतिगत रुख में भी अहम बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने अपने पूर्ववर्ती न्यूट्रल रुख को समाप्त करते हुए अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इस कड़े रुख का सीधा संकेत यह है कि यदि आने वाले समय में महंगाई के मोर्चे पर हालात काबू में नहीं आए और स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो रिजर्व बैंक आने वाले दिनों में रेपो दर में आगे और भी बढ़ोतरी करने से पीछे नहीं हटेगा।

















