कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने करोड़ों अंशधारकों को आश्वस्त किया है कि उनका व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित है। डेटा सुरक्षा को लेकर उपजी चिंताओं के बीच रिटायरमेंट फंड निकाय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि डेटा में किसी भी तरह की सेंधमारी या लीकेज को रोकने के लिए संगठन हर जरूरी एहतियात और सुरक्षात्मक कदम उठा रहा है। भविष्य निधि प्रबंधन ने यह भी साफ किया कि वह भविष्य में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद रहेगा ताकि ग्राहकों के भरोसे को कोई आंच न आए।
कॉमन सर्विस सेंटर से जुड़ा मामला, डेटा सेंटर पूरी तरह अप्रभावित
संगठन ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि सामने आई बातें असल में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से संबंधित हैं और इनका ईपीएफओ के मुख्य डेटा सेंटर या सॉफ्टवेयर सेंटर से कोई सीधा संबंध नहीं है। निकाय ने कहा कि डेटा या सॉफ्टवेयर में संभावित खामियों या कमजोरियों को लेकर जारी की जाने वाली चेतावनियां एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत एहतियाती कदम उठाते हुए कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से दी जाने वाली सभी सेवाओं को 22 मार्च 2018 से ही पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
डेटा सुरक्षा के तहत अग्रिम कार्रवाई और सर्वर बंद करने का फैसला
रिटायरमेंट फंड निकाय ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि डेटा सुरक्षा और संरक्षण के तहत उसने समय रहते अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित की। सुरक्षा संबंधी कमजोरियों की मुकम्मल जांच पूरी होने तक कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए चलने वाली सर्वर और होस्ट सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया था। निकाय के अनुसार, प्रणाली की मजबूती बनाए रखने के लिए ऐसी समीक्षाएं समय-समय पर की जाती हैं और प्रणाली की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ईपीएफओ ने अपने बयान के जरिए अंशधारकों को भरोसा दिलाया है कि मुख्य प्रणाली में कोई तकनीकी सेंधमारी नहीं हुई है और पेंशन व भविष्य निधि से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड हर स्तर पर चाक-चौबंद सुरक्षा घेरे में हैं। निकाय ने दोहराया कि डेटा सुरक्षा और प्रणालीगत अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती रहेगी।



















