केंद्र सरकार 30 अक्टूबर 2026 को पीएम किसान सम्मान निधि योजना की बहुप्रतीक्षित 24वीं किस्त जारी करने जा रही है। गुजरात के बनासकांठा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट इस वित्तीय सहायता को लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित करेगी। इस चरण में सरकार कुल 18,680 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि सीधे किसानों के खातों में भेजेगी। इस वित्तीय हस्तांतरण से देश भर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिसमें महिला कृषक भी शामिल हैं। हालांकि, सरकारी निर्देशों के अनुसार इस लाभ को सीधे बैंक खाते में पाने के लिए सभी पंजीकृत किसानों के पास ई-केवाईसी प्रक्रिया का पूरा होना आवश्यक कर दिया गया है।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और ई-केवाईसी की अनिवार्यता
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र कृषक परिवारों को सालाना 6,000 रुपये की वित्तीय मदद मुहैया कराई जाती है। यह राशि वर्ष भर में तीन समान किस्तों में बांटी जाती है, जहां प्रत्येक किस्त के रूप में 2,000 रुपये सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में डीबीटी के जरिए जमा किए जाते हैं। सामान्य तौर पर ये किस्तें तीन चक्रों में दी जाती हैं, जिनमें अप्रैल से जुलाई, अगस्त से नवंबर और दिसंबर से मार्च की अवधि तय की गई है। सरकारी नियमों के मुताबिक बिना ई-केवाईसी कराए किसी भी किसान के खाते में यह राशि नहीं पहुंचेगी। योजना का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है, ताकि वित्तीय सहायता बिना किसी रुकावट के वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में पहुंचाई जा सके।
ई-केवाईसी कराने के तीन प्रमुख विकल्प
किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ई-केवाईसी सत्यापन के लिए तीन अलग-अलग माध्यम उपलब्ध कराए हैं, जिससे किसान अपनी सुविधा के अनुसार प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं
- ओटीपी आधारित सत्यापन: यह सुविधा आधिकारिक पीएम किसान पोर्टल और आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन पर उपलब्ध है। इसके लिए किसान का मोबाइल नंबर उनके आधार कार्ड से जुड़ा होना जरूरी है।
- बायोमेट्रिक आधारित प्रमाणीकरण: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए यह विकल्प कॉमन सर्विस सेंटर और स्टेट सेवा केंद्रों पर उपलब्ध कराया गया है।
- चेहरा प्रमाणीकरण प्रणाली: इस आधुनिक माध्यम से किसान अपने स्मार्टफोन पर मौजूद पीएम किसान मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे सत्यापन पूरा कर सकते हैं।
पोर्टल पर ओटीपी से ई-केवाईसी करने की प्रक्रिया
यदि किसी किसान का आधार कार्ड उनके सक्रिय मोबाइल नंबर से लिंक है, तो वे घर बैठे बहुत आसानी से ओटीपी प्रक्रिया का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आधिकारिक पीएम-किसान पोर्टल पर जाना होगा। वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर सबसे ऊपर दाईं ओर दिए गए ई-केवाईसी विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करें। आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त वन टाइम पासवर्ड को तय बॉक्स में दर्ज करके सबमिट करते ही सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
कॉमन सर्विस सेंटर पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण
देश भर में किसानों को उनके घर के नजदीक ही सुविधा देने के मकसद से 4 लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर और विभिन्न स्टेट सेवा केंद्रों को अधिकृत किया गया है। सीएससी वीएलई लॉगिन, पीएम किसान ऐप और राज्य अधिकृत यूजर लॉगिन के जरिए बायोमेट्रिक विकल्प उपलब्ध है। किसान को अपना आधार कार्ड और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर लेकर नजदीकी केंद्र पर जाना होगा। वहां मौजूद संचालक आधार आधारित बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर की मदद से सत्यापन पूरा कराएगा। केंद्र पर इस बायोमेट्रिक सेवा के लिए 15 रुपये का सुविधा शुल्क निर्धारित किया गया है।
मोबाइल ऐप से फेस ऑथेंटिकेशन के आसान चरण
स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले किसानों के लिए चेहरा स्कैन करके ई-केवाईसी करना सबसे सरल तरीका माना जाता है। इसके लिए गूगल प्ले स्टोर से पीएम-किसान मोबाइल ऐप और आधार फेस आरडी ऐप डाउनलोड करना होता है। ऐप खोलकर पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉगिन करें और बेनिफिशियरी स्टेटस वाले पेज पर जाएं। यदि वहां ई-केवाईसी स्थिति में नो लिखा दिखाई दे, तो ई-केवाईसी विकल्प पर टैप करें। इसके बाद अपना आधार नंबर दर्ज करें और चेहरे को स्कैन करने की अनुमति दें। चेहरे की सफल स्कैनिंग होते ही सत्यापन पूरा हो जाता है। किसी भी माध्यम से कराई गई ई-केवाईसी की अद्यतन स्थिति 24 घंटे के बाद लाभार्थी स्थिति में दिखने लगती है। किसान अपनी स्थिति की पुष्टि पोर्टल के केवाईएस मॉड्यूल या फिर किसान-ईमित्र नामक एआई चैटबॉट से भी कर सकते हैं।
योजना के लिए कौन से लोग अपात्र हैं?
योजना के नियमों के तहत उच्च आर्थिक स्थिति वाले परिवारों और संस्थागत भूमिधारकों को इस सहायता के दायरे से बाहर रखा गया है। निम्नलिखित श्रेणियों से जुड़े लोग इस योजना का लाभ नहीं ले सकते
- संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्ति: सभी वर्तमान और पूर्व संवैधानिक पद धारक इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
- जनप्रतिनिधि और मंत्री: पूर्व और वर्तमान केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं और राज्य विधान परिषदों के सभी पूर्व और मौजूदा सदस्य इसके पात्र नहीं हैं।
- स्थानीय निकायों के प्रमुख: नगर निगमों के वर्तमान व पूर्व महापौर तथा जिला पंचायतों के वर्तमान व पूर्व अध्यक्ष भी योजना से बाहर हैं।
- सरकारी कर्मचारी व अधिकारी: केंद्र या राज्य सरकार के मंत्रालयों, कार्यालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त निकायों और स्थानीय निकायों के सभी नियमित और सेवानिवृत्त कर्मचारी अपात्र हैं। हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ यानी एमटीएस, क्लास 4 और ग्रुप डी के कर्मचारियों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
- अधिक पेंशन पाने वाले: उपर्युक्त श्रेणियों के वे सभी सेवानिवृत्त पेंशनभोगी जिनकी मासिक पेंशन 10,000 रुपये या उससे अधिक है, वे भी अपात्र हैं, लेकिन इसमें भी चतुर्थ श्रेणी और ग्रुप डी कर्मचारी शामिल नहीं हैं।
योजना का पुराना रिकॉर्ड और कुल वितरण
इससे पहले योजना की 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की गई थी। उस समय सरकार ने 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को कुल 18,880 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जिनमें 2.18 करोड़ महिला किसान शामिल थीं। वर्ष 2019 में इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत के बाद से अब तक सरकार कुल 4.46 लाख रुपये का वितरण कर चुकी है। इतनी बड़ी वित्तीय सहायता के सीधे खातों में जाने से यह पहल दुनिया के सबसे बड़े प्रत्यक्ष लाभ अंतरण कार्यक्रमों में शुमार हो चुकी है।



















