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सैलरी रिवीजन से पहले 8वें वेतन आयोग की बड़ी कवायद, सरकार से मांगा कर्मचारियों पर हर खर्च का पूरा ब्योराव्यापार
30 जून 2026, 2:42 pm (45 दिन पहले)· 5

सैलरी रिवीजन से पहले 8वें वेतन आयोग की बड़ी कवायद, सरकार से मांगा कर्मचारियों पर हर खर्च का पूरा ब्योरा

8वां वेतन आयोग सैलरी और भत्तों में बदलाव की सिफारिश करने से पहले जानना चाहता है कि सरकार अपने कर्मचारियों पर अभी कितना खर्च कर रही है। सभी मंत्रालयों से 30 जून तक यह डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर देने को कहा गया है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। आयोग ने तय किया है कि कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में किसी भी बदलाव की सिफारिश से पहले वह यह पूरी तस्वीर साफ करेगा कि सरकार फिलहाल अपने स्टाफ पर कुल कितना पैसा लगा रही है। इसी मकसद से आयोग ने सरकार के सभी मंत्रालयों और संगठनों से कहा है कि वे कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से जुड़ी हर जानकारी 30 जून तक अपने ऑनलाइन डेटा पोर्टल पर जमा कर दें। इसका सीधा उद्देश्य एक ऐसा सिंगल डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है, जिसके आधार पर सिफारिशें बनाई जा सकें।

पिछले तीन वित्तीय वर्षों का पूरा हिसाब तलब

आयोग ने मंत्रालयों और विभागों से तीन वित्तीय वर्षों, यानी 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के खर्च के बारीक आंकड़े भी मांगे हैं। इन आंकड़ों से यह पता चलना चाहिए कि लेवल 1 से लेवल 18 तक के हर पे मैट्रिक्स लेवल पर सैलरी और तरह-तरह के भत्तों पर कितनी रकम खर्च हुई। खास बात यह है कि आयोग सिर्फ बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अलग-अलग मदों में होने वाले कुल खर्च पर भी पूरी नजर रख रहा है।

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कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी

मांगे गए ब्योरे में बेसिक पे और मिलिट्री सर्विस पे (जहां यह लागू होता है), महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (TPTA), जोखिम और कठिनाई भत्ता, रेलवे कर्मचारियों के लिए रनिंग स्टाफ भत्ता, नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) और कर्मचारियों को मिलने वाले बाकी भत्ते शामिल हैं। साथ ही हर वित्तीय वर्ष में भत्तों पर हुए कुल खर्च का हिसाब भी अलग से देना होगा।

शुरुआती लेकिन सबसे अहम कदम

किसी भी सिफारिश को अंतिम रूप देने से पहले इस तरह का डेटा जुटाना वेतन आयोग की सबसे शुरुआती और सबसे जरूरी प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। अलग-अलग पे-लेवल पर सरकार अभी कितना खर्च कर रही है, इसका गहराई से अध्ययन करके आयोग आगे होने वाले बदलावों के आर्थिक असर का सही अंदाजा लगा सकेगा। यही जानकारी आयोग को संशोधित पे-स्केल, भत्तों, सरकार के कुल खर्च और लंबे समय की आर्थिक स्थिरता पर सुझाव तैयार करने में मदद करेगी।

डेटा जुटाने के बाद आगे क्या

आंकड़ों की मात्रा काफी बड़ी है, इसलिए जरूरत पड़ने पर आयोग समय-सीमा बढ़ा भी सकता है। डेटा इकट्ठा होने का काम पूरा हो जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आयोग रिपोर्ट से जुड़े अगले चरण में बढ़ने से पहले इन आंकड़ों का विश्लेषण शुरू करेगा।

सवाल-जवाब

8वां वेतन आयोग मंत्रालयों से क्या मांग रहा है?
आयोग ने सभी मंत्रालयों और संगठनों से कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों से जुड़ी पूरी जानकारी अपने ऑनलाइन डेटा पोर्टल पर देने को कहा है।
यह डेटा कब तक जमा करना है?
मंत्रालयों और संगठनों को यह जानकारी 30 जून तक ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करनी है।
कितने वित्तीय वर्षों का ब्योरा मांगा गया है?
तीन वित्तीय वर्षों, यानी 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के खर्च के विस्तृत आंकड़े मांगे गए हैं।
किन-किन भत्तों की जानकारी देनी होगी?
बेसिक पे और मिलिट्री सर्विस पे, DA, HRA, TPTA, जोखिम और कठिनाई भत्ता, रनिंग स्टाफ भत्ता, NPA और अन्य भत्तों की जानकारी देनी होगी।
किन पे-लेवल का डेटा शामिल है?
लेवल 1 से लेवल 18 तक के हर पे मैट्रिक्स लेवल पर सैलरी और भत्तों पर हुए खर्च का डेटा मांगा गया है।
आयोग यह डेटा क्यों जुटा रहा है?
ताकि एक सिंगल डिजिटल डेटाबेस बने और आयोग आगे के बदलावों के आर्थिक असर का सही अंदाजा लगाकर सिफारिशें तैयार कर सके।
क्या समय-सीमा बढ़ सकती है?
हां, आंकड़ों की बड़ी मात्रा को देखते हुए जरूरत पड़ने पर आयोग समय-सीमा बढ़ा सकता है।
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