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सरकारी बैंकों में PLI बोनस स्कीम पर रोक, हड़ताल से ठीक पहले बड़ा फैसलाव्यापार
8 सित॰ 2026, 3:39 pm (2 घंटे पहले)· 3

सरकारी बैंकों में PLI बोनस स्कीम पर रोक, हड़ताल से ठीक पहले बड़ा फैसला

वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंक कर्मचारियों के लिए वित्तवर्ष 2025-26 में पीएलआई बोनस स्कीम लागू करने पर रोक लगा दी है, यह फैसला 11 सितंबर की देशव्यापी बैंक हड़ताल से ठीक पहले आया है.

सरकारी बैंकों में काम करने वालों के लिए परफॉर्मेंस से जुड़ी बोनस स्कीम, यानी पीएलआई योजना, फिलहाल टाल दी गई है. वित्त मंत्रालय ने वित्तवर्ष 2025-26 के लिए इसे लागू करने का फैसला रोक दिया है, वो भी बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से ठीक पहले.

फैसला क्यों टाला गया

कर्मचारी यूनियनें लंबे समय से यह मांग कर रही थीं कि बोनस तय करने के लिए जिस तरीके से कर्मचारियों और बैंकों के प्रदर्शन को आंका जाता है, पहले उसकी समीक्षा होनी चाहिए. उनका तर्क था कि जब तक यह रूपरेखा दुरुस्त नहीं होती, तब तक स्कीम लागू करना जल्दबाजी होगी. यूनियनों की यही मांग सरकार तक पहुंची और मंत्रालय ने फिलहाल स्कीम को टालने का रास्ता चुना. अब कर्मचारियों के बीच यही चर्चा है कि जब यह योजना दोबारा लागू होगी, तो उनकी सैलरी बढ़ेगी या इसका उल्टा असर पड़ेगा.

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वित्त मंत्री के साथ बैठक में क्या हुआ

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की मुलाकात हाल ही में सरकारी बैंकों के कर्मचारियों के एक दल से हुई, जिसका नेतृत्व भारतीय मजदूर संघ यानी बीएमएस ने किया. बैठक में तीन मुद्दे उठे, अनुग्रह राशि यानी एक्स-ग्रेशिया अमाउंट, रिटायर हो चुके कर्मचारियों के लिए मेडिकल सुविधाएं, और मौजूदा पीएलआई ढांचे में जरूरी बदलाव. गौर करने वाली बात यह भी है कि यह फैसला उस देशव्यापी बैंक हड़ताल से ठीक पहले आया, जिसकी मांगों में पीएलआई का मसला भी शामिल है.

पिछले साल नवंबर में हुई थी घोषणा

यह पीएलआई स्कीम कोई नई चीज नहीं है. सरकार ने इसे 19 नवंबर, 2024 को कर्मचारी संगठनों की चिंताओं का ध्यान रखते हुए घोषित किया था. अब बदला है तो सिर्फ इतना कि 2025-26 के लिए इसे लागू करने पर रोक लगा दी गई है. वित्त मंत्रालय ने दोहराया है कि वो कर्मचारियों, ग्राहकों और पूरे बैंकिंग सेक्टर के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए बातचीत और आपसी समझ से मसले सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय का कहना है कि स्कीम की समीक्षा पूरी होने के बाद ही इसे फिर से शुरू करने पर सोचा जाएगा.

11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल की तैयारी

बैंक यूनियनों के साझा मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने पहले ही 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल पर जाने का ऐलान कर रखा है. यूनियनों की मुख्य मांगों में पांच दिन का बैंकिंग वीक लागू करना, पीएलआई स्कीम में बदलाव और पेंशन से जुड़े लंबे समय से अटके मुद्दों का हल शामिल है. यूनियनों ने खासतौर पर स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए बनी सरकार की पीएलआई स्कीम पर आपत्ति जताई है. यूनियनों का तर्क है कि यह स्कीम भारतीय बैंक संघ यानी आईबीए के साथ जो समझौता पहले हुआ था, उससे मेल नहीं खाती.

स्केल-4 को लेकर विवाद, किसे कितना मिलेगा बोनस

आईबीए के साथ हुए मूल समझौते के तहत तय हुआ था कि यह बोनस बैंक के कुल प्रदर्शन के आधार पर तय होगा और स्केल-7 तक हर कर्मचारी व अधिकारी पर एक जैसे लागू होगा. सरकार की स्कीम कहती है कि स्केल-4 से ऊपर के अधिकारियों का बोनस उनके निजी परफॉर्मेंस पर निर्भर करेगा, और यह ज्यादा से ज्यादा 365 दिन के मूल वेतन जितना हो सकता है. वहीं आम कर्मचारियों और स्केल-3 तक के अधिकारियों को इससे कम बोनस मिलेगा, यानी ज्यादा से ज्यादा 15 दिन के मूल वेतन में महंगाई भत्ता जोड़कर जितना बनता है, उतना ही. यूनियनों ने इसी फर्क की तरफ इशारा करते हुए मांग की है कि नियमों की समीक्षा कर सभी रैंक के लिए इन्हें बराबर किया जाए.

सवाल-जवाब

पीएलआई योजना क्या है?
यह सरकारी बैंक कर्मचारियों के प्रदर्शन के आधार पर दिया जाने वाला प्रोत्साहन बोनस है.
सरकार ने योजना पर रोक क्यों लगाई?
बैंक कर्मचारियों की मांग थी कि प्रदर्शन आंकने वाली रूपरेखा की पहले समीक्षा हो, इसलिए 2025-26 के लिए इसे लागू करने पर फिलहाल रोक लगा दी गई.
यह स्कीम कब घोषित हुई थी?
सरकार ने इसे 19 नवंबर, 2024 को घोषित किया था.
वित्तमंत्री ने किससे मुलाकात की?
निर्मला सीतारमण ने भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के नेतृत्व वाले सरकारी बैंक कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की.
11 सितंबर की हड़ताल किसने बुलाई है?
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने यह हड़ताल बुलाई है.
हड़ताल की मुख्य मांगें क्या हैं?
पांच दिन का बैंकिंग वीक लागू करना, पीएलआई स्कीम में बदलाव और पेंशन से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान.
स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों को कितना पीएलआई मिल सकता है?
व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिन के मूल वेतन के बराबर.
आम कर्मचारियों और स्केल-3 तक के अधिकारियों को कितना मिलेगा?
अधिकतम 15 दिन के मूल वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर.
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