अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनावों के बीच कूटनीतिक बातचीत के संकेतों ने कच्चे तेल की कीमतों पर बने तात्कालिक दबाव को कुछ हद तक हल्का किया है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा बातचीत और कूटनीति को अतिरिक्त समय देने के संकेतों के बाद डब्ल्यूटीआई क्रूड और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों में हालिया तेजी की वजह बने जोखिम प्रीमियम का एक हिस्सा घटता नजर आया है। हालांकि, बाजार रणनीतिकारों का साफ कहना है कि किसी ठोस शांति समझौते के अभाव और समुद्री जहाजों पर जारी हूती हमलों के रहते केवल बयानों और उम्मीदों के बूते ऊर्जा कीमतों से युद्ध का पूरा जोखिम प्रीमियम गायब नहीं हो सकता।
कच्चे तेल पर कूटनीतिक संकेतों का प्रभाव
टीडी सिक्योरिटीज के रणनीतिकारों रयान मैके और बार्ट मेल्क के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कूटनीति को और समय दिए जाने के संकेतों ने यह संभावना जताई है कि मध्यावधि चुनावों के तुरंत पहले या बाद में कोई बड़ा सैन्य हमला शायद नहीं होगा। इस स्पष्टता के उभरने से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से भू-राजनीतिक जोखिम की कीमत का एक हिस्सा बाहर हुआ है। हाल के दौर में बाजार में पूंजी का प्रवाह काफी ऊंचा रहा है और कीमतों में हालिया उछाल का एक बड़ा हिस्सा इसी युद्ध प्रीमियम की वजह से था, जिसके चलते ऐसे किसी भी राजनीतिक संकेत का बाजार पर व्यापक असर पड़ना स्वाभाविक है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बयानों और कूटनीतिक उम्मीदों ने कच्चे तेल के बाजारों में जोखिम प्रीमियम को कुछ कम जरूर किया है, लेकिन केवल चर्चाएं पूरी अनिश्चितता को खत्म नहीं कर सकतीं। जब तक युद्ध का कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आता और टैंकरों तथा वाणिज्यिक जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमले जारी रहते हैं, तब तक ऊर्जा बाजार से जोखिम पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
मुद्रा बाजार में डॉलर पर दबाव और जापानी येन की चाल
ऊर्जा क्षेत्र के अलावा वैश्विक वित्तीय बाजारों के अन्य हिस्सों में भी इस कूटनीतिक घटनाक्रम की प्रतिक्रिया देखी गई है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता की नई उम्मीदों ने सोमवार को निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा दिया, जिससे एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की गिरावट उलट गई। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली अमेरिकी मुद्रा यानी अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा मिला। हालांकि, इस मुद्रा की हाजिर कीमतें पिछले गुरुवार को दर्ज किए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे ही बनी रहीं, क्योंकि निवेशक आगे की रणनीति तय करने से पहले आरबीए के महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी में कुछ सकारात्मक गति देखी गई। बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले के बाद शुक्रवार को 157.00 से नीचे के स्तर पर गिरने के बाद यह जोड़ी तेजी से संभली। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह गति हाजिर कीमतों को 158.00 के आसपास ले आई। जापानी येन में यह कमजोरी जापान की वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा बाजार में नए सरकारी हस्तक्षेप की चेतावनी दिए जाने के बावजूद जारी रही, जिस पर व्यापारियों ने अधिक ध्यान नहीं दिया।
सोने की रिकवरी और क्रिप्टो बाजार में कमजोरी
सोमवार को अमेरिकी कारोबारी घंटों के दौरान सोने की कीमतों में भी हल्का सकारात्मक रुख देखा गया। इससे पहले शुक्रवार को सोना फिसलकर 3,870 डॉलर के नए वार्षिक निचले स्तर पर पहुंच गया था और अक्टूबर के पूरे महीने में इसमें 6.87 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई थी। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने इस कीमती धातु को कुछ सहारा दिया है। फिर भी, सोने में आई यह रिकवरी बहुत मजबूत नहीं दिख रही है क्योंकि बुनियादी आर्थिक पृष्ठभूमि लगातार सोने में लंबे समय तक टिकने वाले सुधार को लेकर संदेह पैदा कर रही है।
क्रिप्टोकरेंसी के मोर्चे पर, डॉजकॉइन सोमवार को करीब 0.075 डॉलर के आसपास संघर्ष करता नजर आया। सितंबर के अंत से शुरू होकर यह लगातार पांचवां सप्ताह है जब डॉजकॉइन में गिरावट दर्ज की गई है। सेंटीमेंट के आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े टोकन धारकों की गतिविधियों में अंतर आ रहा है, जहां बड़े निवेशक अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं, वहीं छोटे व्हेल वॉलेट टोकन जमा करने में जुटे हैं। ऑन-चेन मैट्रिक्स में आ रही कमजोरी और बिगड़ते तकनीकी परिदृश्य से यह संकेत मिलता है कि डीओजीई में आने वाले दिनों में और नुकसान हो सकता है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और पूंजीगत खर्च पर सवाल
अमेरिकी अर्थव्यवस्था सालाना 3.4 प्रतिशत की मजबूत दर से आगे बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, नैस्डैक ने मार्च 2025 के बाद से अक्टूबर में अपने सबसे खराब मासिक प्रदर्शन के साथ महीने का समापन किया। शेयर बाजार अब केवल आर्थिक विकास के नाम पर कंपनियों द्वारा किए जाने वाले भारी पूंजीगत खर्च को पुरस्कृत करने के मूड में नहीं है। निवेशक अब बारीकी से इस बात की परीक्षा ले रहे हैं कि क्या यह भारी भरकम पूंजीगत व्यय वास्तव में मजबूत नकदी प्रवाह पैदा कर सकता है और पूंजी की लागत से अधिक रिटर्न देने में सक्षम है।



















