वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर का हालिया दबदबा सुस्त पड़ता दिखाई दे रहा है, जहां 28 अक्टूबर की एफओएमसी बैठक संपन्न होने के बाद डॉलर इंडेक्स (DXY) एक बार फिर 102 के स्तर से नीचे फिसल गया है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने भले ही 3.4 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर दर्ज की हो, लेकिन वित्तीय बाजारों ने केवल बुनियादी आर्थिक विस्तार को आधार मानकर परिसंपत्तियों को पुरस्कृत करना बंद कर दिया है। शेयरों में बिकवाली के कारण सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत से घटकर 4.90 प्रतिशत के स्तर पर आ गई। अब निवेशकों की निगाहें 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों और 6 नवंबर को जारी होने वाले गैर-कृषि पेरोल आंकड़ों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि मुद्रा की गति में आई यह कमी आगे और गहरी होगी या नहीं।
तकनीकी कंपनियों के नकदी प्रवाह पर गहराती चिंताएं
अमेरिकी असाधारणता की जिस धारणा ने वित्तीय बाजारों को लंबे समय तक संभाले रखा था, उसकी बुनियाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI हाइपरस्केलर्स के भारी निवेश चक्र पर टिकी हुई थी। हालांकि, अब इन दिग्गज तकनीकी कंपनियों द्वारा किए जा रहे अत्यधिक नकदी खर्च (कैश बर्न) को लेकर निवेशकों की जांच पड़ताल काफी तेज हो गई है। बाजार अब केवल विकास को गति देने वाले पूंजीगत व्यय की सराहना करने के मूड में नहीं दिख रहा है, बल्कि यह परखा जा रहा है कि क्या यह भारी भरकम खर्च पूंजी की लागत से अधिक रिटर्न और वास्तविक नकदी प्रवाह उत्पन्न करने में सक्षम है। इसी अविश्वास का नतीजा रहा कि नैस्डैक ने अक्टूबर महीने का अंत मार्च 2025 के बाद के अपने सबसे खराब मासिक प्रदर्शन के साथ किया। पूंजीगत व्यय पर बढ़े इस संशय ने व्यापक स्तर पर शेयर बाजारों पर दबाव डाला है।
ईरान कूटनीति और प्रमुख मुद्राओं की चाल
वैश्विक भू-राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक प्रयासों को लेकर फिर से जगी उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इस कूटनीतिक प्रगति ने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर अमेरिकी डॉलर की तेजी पर लगाम लगाने का काम किया, जिससे जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) को समर्थन मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान आई गिरावट से उबरते हुए वापसी की। हालांकि, इसके हाजिर भाव पिछले गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे ही बने हुए हैं, क्योंकि लिवाली करने वाले कारोबारी कोई भी नई स्थिति बनाने से पहले रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
येन पर दबाव और जापानी हस्तक्षेप की चेतावनी
दूसरी तरफ, जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) ने नए सप्ताह की शुरुआत में सकारात्मक बढ़त हासिल की। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के बाद शुक्रवार को यह जोड़ी गिरकर 157.00 से नीचे के निचले स्तर तक पहुंच गई थी, लेकिन सोमवार के एशियाई कारोबारी सत्र में यह संभलते हुए 158.00 के आसपास कारोबार करती देखी गई। जापान की वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप को लेकर दी गई ताजा चेतावनी का भी इस मुद्रा जोड़ी की रफ्तार पर कोई खास असर नहीं पड़ा और डॉलर ने अपनी बढ़त बनाए रखी।
सोने में हल्का सुधार और डॉगकॉइन पर दबाव
सोमवार को अमेरिकी कारोबारी घंटों के दौरान सोने की कीमतों में सकारात्मक रुझान देखा गया। इससे पहले शुक्रवार को कीमती धातु गिरकर 3,870 डॉलर के नए वार्षिक निचले स्तर पर पहुंच गई थी और पूरे अक्टूबर महीने में सोने में 6.87 प्रतिशत की तेज मासिक गिरावट दर्ज की गई थी। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के प्रयासों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने सोने को कुछ सहारा दिया है, लेकिन व्यापक बुनियादी हालात अब भी एक टिकाऊ सुधार को लेकर संदेह पैदा कर रहे हैं, जिसके चलते यह उछाल मजबूत नहीं दिख रहा है।
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) सोमवार को लगभग 0.075 डॉलर के स्तर पर मंडराता रहा। सितंबर के अंत से शुरू होकर यह लगातार पांचवां हफ्ता है जब डॉगकॉइन में गिरावट दर्ज की गई है। सैंटिमेंट के आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े व्हेल निवेशकों की गतिविधियों में बिखराव आया है, जहां अत्यधिक बड़े धारक अपनी पोजीशन घटा रहे हैं, जबकि अपेक्षाकृत छोटे व्हेल वॉलेट टोकन जमा करने में जुटे हैं। कमजोर पड़ते ऑन-चेन मेट्रिक्स और बिगड़ते तकनीकी परिदृश्य से संकेत मिलता है कि डॉगकॉइन आगे भी अतिरिक्त नुकसान के प्रति संवेदनशील बना रह सकता है।



















