अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट परियोजना स्टारलिंक के भारत में संभावित विस्तार और उनके ताजा बयानों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। भारतीय टिप्पणीकार और पत्रकार एस गुरुमूर्ति ने मस्क के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि एक विदेशी नागरिक होने के बावजूद वे भारत के राजनीतिक और नीतिगत मामलों में दखल दे रहे हैं। शनिवार को अपनी बात रखते हुए गुरुमूर्ति ने स्पष्ट किया कि जब कोई विदेशी कारोबारी स्थानीय राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो देश के अत्यंत संवेदनशील संचार ढांचे में उसकी भागीदारी पर सहज भरोसा नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय सुरक्षा और दूरसंचार नेटवर्क से जुड़े सवाल
एस गुरुमूर्ति ने सोशल मीडिया मंच पर अपने विचार साझा करते हुए मस्क के पुराने तौर-तरीकों की ओर इशारा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी देश का संचार नेटवर्क केवल एक व्यावसायिक सेवा नहीं होता, बल्कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा का एक बेहद संवेदनशील और बुनियादी हिस्सा माना जाता है। ऐसे में किसी ऐसे व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है जो अलग-अलग देशों की अंदरूनी राजनीति में सार्वजनिक तौर पर दखल देने का इतिहास रखता हो।
गुरुमूर्ति ने सवाल उठाया कि एक विदेशी नागरिक के तौर पर मस्क को भारत के राजनीतिक विमर्श में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई उद्यमी अपनी व्यावसायिक पहचान से आगे बढ़कर राजनीतिक असर डालने की कोशिश करता है, तो उसके व्यावसायिक हितों और राजनीतिक इरादों को अलग-अलग करके देखना संभव नहीं रह जाता।
कारोबारी से ज्यादा राजनेता के तौर पर सक्रियता का आरोप
गुरुमूर्ति के अनुसार, मस्क की गतिविधियां एक पारंपरिक उद्योगपति के दायरे से बाहर निकल चुकी हैं और वे एक राजनेता की तरह व्यवहार करते नजर आते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मस्क ने राजनीतिक अभियान में बेहद गहरी और सीधी भूमिका निभाई थी। इसके अलावा ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के भीतर भी उनकी राजनीतिक टिप्पणियां और दखल लगातार सामने आते रहे हैं।
इस पृष्ठभूमि को सामने रखते हुए गुरुमूर्ति ने कहा कि जो व्यक्ति लगातार दूसरे देशों के सत्ता संघर्षों और चुनावों में अपना असर जमाने की कोशिश करता रहा हो, उसे भारत के रणनीतिक संचार क्षेत्र में बिना किसी झिझक के आने की अनुमति देना गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
श्रीधर वेंबू की प्रतिक्रिया और भारतीय बाजार की वास्तविकता
इस पूरे मामले में गुरुमूर्ति ने जोहो कॉर्पोरेशन के वैज्ञानिक और पूर्व सीईओ श्रीधर वेंबू की एक पोस्ट पर सहमति जताते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई। वेंबू ने मस्क के हालिया बयानों पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा विरोधाभास उजागर किया था। वेंबू के अनुसार, भारत में उपभोक्ताओं को दुनिया की सबसे सस्ती इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हैं, जो देश के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार का प्रमाण हैं। दूसरी तरफ अमेरिका के भीतर टेस्ला को चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों से बचाने के लिए संरक्षणवादी उपाय अपनाए जाते हैं।
वेंबू ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा प्रतिस्पर्धी आर्थिक माहौल तैयार किया है जिसका सीधा लाभ आम नागरिक तक पहुंचता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी तरह के एकाधिकार को प्रोत्साहन नहीं देती और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की गई है। इस तरह के संतुलित बाजार में विदेशी कंपनियों द्वारा अनुचित आरोप लगाना जमीनी सच्चाई के विपरीत है।
वैश्विक राजनीति में एलन मस्क का दखल और वित्तीय भूमिका
गुरुमूर्ति ने आगे बताया कि वैश्विक राजनीति में मस्क का दखल केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसके पीछे भारी वित्तीय संसाधन भी लगे हैं। वर्ष 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति अभियान में मस्क डोनाल्ड ट्रंप के सबसे प्रमुख वित्तीय समर्थकों में शामिल रहे। फेडरल इलेक्शन कमीशन के आधिकारिक दस्तावेजों के हवाले से बताया गया कि मस्क ने ट्रंप का समर्थन करने वाले संगठनों और समूहों को लगभग 259 मिलियन डॉलर का भारी योगदान दिया था।
इस भारी वित्तीय निवेश ने मस्क को ट्रंप के अभियान में सबसे बड़े दानदाताओं की कतार में खड़ा कर दिया। इस सहयोग ने उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के राजनीतिक दायरे में असाधारण पहुंच और प्रभाव प्रदान किया, जिससे वे महज एक प्रौद्योगिकी उद्यमी न रहकर एक प्रभावशाली राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में उभरकर सामने आए।
ब्रिटिश नीति और नेतृत्व पर तीखी टिप्पणियां
अमेरिका के अलावा ब्रिटेन की राजनीति में भी मस्क के हस्तक्षेप पर गंभीर विवाद खड़े हुए हैं। ब्रिटिश व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने उस देश को तानाशाही पुलिस राज्य की संज्ञा दी थी। इसके अलावा उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर व्यक्तिगत हमले करते हुए उन्हें टू-टियर कीर कहकर संबोधित किया था। मस्क ने यह आरोप भी लगाया था कि ब्रिटेन की न्यायिक व्यवस्था दक्षिणपंथी समूहों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाती है।
ब्रिटेन में कृषि से जुड़े विरासत कर में प्रस्तावित संशोधनों का विरोध करते हुए मस्क ने तीखा रुख अपनाया था और देश की प्रशासनिक दिशा को पूरी तरह स्टालिनवादी कार्यशैली जैसा करार दिया था। गुरुमूर्ति के अनुसार, संप्रभु देशों के आंतरिक प्रशासनिक निर्णयों पर इस प्रकार के आक्रामक हमले यह दर्शाते हैं कि मस्क का दृष्टिकोण केवल वाणिज्यिक लाभ तक सीमित नहीं रहता।
भारत में स्टारलिंक की एंट्री और ओलिगार्क्स का आरोप
स्टारलिंक दरअसल एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित एक उपग्रह आधारित इंटरनेट नेटवर्क है। यह सेवा पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करती है, जिससे दुर्गम, पहाड़ी और सीमित बुनियादी ढांचे वाले इलाकों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड की पहुंच संभव हो पाती है। मस्क ने कुछ समय पहले भारतीय बाजार में अपनी सेवा शुरू करने की योजना की घोषणा की थी।
हालांकि इस प्रस्तावित लॉन्च को लेकर विवाद तब गहरा गया जब मस्क ने सार्वजनिक आरोप लगाया कि भारत में कुछ ओलिगार्क्स यानी शक्तिशाली कुलीन वर्ग उनकी कंपनी के प्रवेश को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत सरकार ने मस्क के इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए मजबूती से खारिज कर दिया था। अब एस गुरुमूर्ति और श्रीधर वेंबू जैसी हस्तियों की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला शुद्ध व्यावसायिक अनुमति से आगे बढ़कर विदेशी हस्तक्षेप, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक विमर्श में बदल गया है।

















