डीजल की खुदरा और थोक दरों में भारी अंतर पैदा होने के बाद निजी ईंधन पंपों पर अचानक खरीद का दबाव काफी बढ़ गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ निजी पंपों ने डीजल बिक्री पर सीमा तय करनी शुरू कर दी, जिस पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल या डीजल की बिक्री को सीमित करने की छूट किसी भी कंपनी या डीलर को नहीं है। डीजल बिक्री पर राशनिंग लगाए जाने को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस संबंध में सरकार की नीति पहले जैसी ही स्पष्ट और अपरिवर्तित है।
थोक और खुदरा दरों में ₹50 प्रति लीटर का भारी फासला
मौजूदा समय में डीजल के थोक और खुदरा मूल्यों के बीच लगभग ₹50 प्रति लीटर तक का बड़ा अंतर आ चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद खुदरा पेट्रोल और डीजल के दाम मई महीने से स्थिर बने हुए हैं। इसके विपरीत, थोक ईंधन की दरें सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजारों से जुड़ी हुई हैं, जिसके चलते थोक भाव में तेज उछाल देखा गया है। इस भारी मूल्य अंतर का सीधा असर बाजार की खरीद व्यवस्था पर पड़ा है।
कारखाने, दूरसंचार नेटवर्क कंपनियां, बड़े होटल, निजी अस्पताल और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता अपनी भारी ईंधन जरूरतें पूरी करने के लिए अब थोक डिपो के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं। कई व्यावसायिक ग्राहक खुदरा आउटलेट्स से एक ही बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल उठा रहे हैं ताकि उन्हें सस्ता ईंधन मिल सके। इससे स्थानीय खुदरा पंपों के सीमित भंडारण ढांचे पर अप्रत्याशित दबाव बन गया है, क्योंकि उनके पास तय क्षमता के टैंक होते हैं और तेल डिपो से दोबारा आपूर्ति पहुंचने में कुछ दिनों का वक्त लग जाता है।
जियो-बीपी और नायरा एनर्जी के आउटलेट्स पर राशनिंग की स्थिति
अचानक पैदा हुई इस भारी मांग के चलते निजी ईंधन विक्रेता कंपनियों के चुनिंदा पंपों पर डीजल खरीद सीमित करने के कदम उठाए गए। जियो-बीपी ने अपने कुछ आउटलेट्स पर प्रति ग्राहक प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर डीजल बेचने की बंदिश लागू की है। वहीं दूसरी ओर, नायरा एनर्जी के विभिन्न पंपों पर यह दैनिक बिक्री सीमा 70 लीटर से 200 लीटर प्रति ग्राहक के बीच तय की गई है। इस तरह के कदमों से बड़े वाहनों और औद्योगिक ग्राहकों को अपनी जरूरत का ईंधन जुटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का कड़ा संदेश और पेट्रोलियम मंत्रालय की निगरानी
ईंधन की बिक्री पर पाबंदी लगाए जाने की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने दोहराया कि किसी भी ईंधन विक्रेता को बिक्री सीमित करने की इजाजत नहीं दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा करना पूरी तरह अस्वीकार्य है और कंपनियों को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए। मित्तल के अनुसार, सरकार पूर्व में भी निजी पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की निर्बाध बिक्री सुनिश्चित करने को लेकर आवश्यक निर्देश और औपचारिक पत्र जारी कर चुकी है, और प्रशासन का यह रुख पूरी तरह अडिग है।
पूरे घटनाक्रम पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार निजी तेल कंपनियों के साथ संपर्क बनाए हुए है। हालांकि उन्होंने इस बातचीत के विशिष्ट ब्योरे साझा नहीं किए, लेकिन सरकार पूरे आपूर्ति नेटवर्क पर नजर बनाए हुए है ताकि आम जनता और परिवहन क्षेत्र को ईंधन की किल्लत न झेलनी पड़े।
ईंधन की पर्याप्तता पर निजी तेल कंपनियों की सफाई
डीजल बिक्री पर पाबंदी की चर्चाओं के बीच दोनों प्रमुख निजी कंपनियों ने आपूर्ति सामान्य रहने का दावा किया है। जियो-बीपी ने कहा है कि उसके सभी पेट्रोल पंप नियमित रूप से काम कर रहे हैं और वहां ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। कंपनी के अनुसार, बढ़ती मांग के बीच वह परिवहन क्षेत्र और रोजमर्रा की उपभोक्ता जरूरतों के लिए ईंधन का समान और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है।
इसी तरह नायरा एनर्जी ने भी बयान जारी कर बताया है कि वह अपने 7,000 से अधिक डीलर स्टेशनों और अन्य वितरण माध्यमों के जरिए ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने पर पूरा ध्यान दे रही है। हालांकि, दोनों ही कंपनियों ने अपने औपचारिक बयानों में पंपों पर लगाई गई खरीद सीमा के सीधे कारणों पर विस्तार से कुछ नहीं कहा है।



















