खान-पान में पोषण और मिलेट्स को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश के अमरोहा से एक सराहनीय पहल सामने आई है। यहां की सहायक अध्यापिका मंजू सिंह ने पारंपरिक बेकिंग तौर-तरीकों को बदलते हुए रागी के आटे और खजूर की मिठास से भरपूर एक अनोखा और सेहतमंद केक तैयार किया है। रोजमर्रा के नाश्ते में इस्तेमाल होने वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की जगह यह केक न सिर्फ स्वाद की मांग पूरी करता है, बल्कि डायबिटीज और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए एक सुरक्षित और पौष्टिक विकल्प बनकर उभरा है।
घर की जरूरत और डायबिटीज ने दिखाई नई राह
इस पौष्टिक नवाचार की शुरुआत मंजू सिंह के अपने परिवार की सेहत को संवारने के इरादे से हुई। उन्होंने साझा किया कि वह खुद भी मोटे अनाजों यानी मिलेट्स के प्रति जागरूक हो रही हैं और समाज के अन्य लोगों को भी इसके नियमित सेवन के लिए प्रेरित कर रही हैं। पहले उनके परिवार में नाश्ते और चाय के समय ब्रेड, रस्क और पोहा जैसी चीजों का नियमित उपयोग होता था। अधिक मात्रा में ऐसे प्रसंस्कृत विकल्पों का सेवन करने से सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है और शरीर में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है।
मंजू सिंह की मां डायबिटीज से पीड़ित हैं, जिसकी वजह से उनके आहार को लेकर परिवार हमेशा चिंतित रहता था। इसके अलावा मंजू सिंह को स्वयं चॉकलेट खाना बहुत पसंद था, लेकिन बाजार की चॉकलेट में अत्यधिक चीनी होने के कारण वह स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं थी। इन दोनों परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने सोचा कि रोजमर्रा के खान-पान में बेहतर विकल्पों की कोई कमी नहीं है। इसी सोच के तहत उन्होंने चाय के साथ खाए जाने वाले अस्वास्थ्यकर स्नैक्स के स्थान पर रागी के केक को परिवार के नियमित भोजन में शामिल करने का फैसला किया, जिससे शरीर को भरपूर ऊर्जा मिले और किसी की सेहत भी न बिगड़े।
रागी केक बनाने की आसान विधि और सामग्री
इस पौष्टिक केक को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद सरल और घरेलू है। इसे बनाने के लिए रागी का आटा, दूध, शुद्ध घी और बेकिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी सामग्रियों को एक साथ मिलाकर एक बेहद मुलायम और एकसार घोल तैयार किया जाता है। इसके बाद एक बेकिंग सांचे को चिकना कर उसमें इस घोल को डाला जाता है। फिर इसे करीब 30 मिनट तक पकाया जाता है, जिससे यह पूरी तरह स्पंजी और स्वादिष्ट बन जाता है।
रिफाइंड चीनी की जगह खजूर की प्राकृतिक मिठास
मंजू सिंह के इस केक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सामान्य सफेद चीनी का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया है। मिठास लाने के लिए इसमें प्राकृतिक खजूर डाले गए हैं। खजूर और रागी का यह अनोखा मेल शरीर के ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर दोनों को नियंत्रित रखने में सहायक साबित होता है। इससे शरीर में अचानक शुगर नहीं बढ़ती और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोग भी बिना किसी डर के इसका आनंद ले सकते हैं।
मंजू सिंह का सुझाव है कि लोग घर पर मल्टीग्रेन आटे से भी इस तरह के केक बना सकते हैं। यदि कोई प्रयोग करना चाहे, तो चीनी की जगह खजूर के अलावा शहद या पारंपरिक शक्कर का उपयोग कर सकता है। उनके बनाए इस रागी केक को चखने वाले लोग इसके स्वाद से काफी प्रभावित हैं और उनसे इसकी विधि सीखकर अपने घरों में भी इसे तैयार कर रहे हैं।



















