राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जहरीली हवा और लगातार गिरते वायु स्तर को देखते हुए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम पर ट्रेनों की आवाजाही बढ़ाने का फैसला लिया गया है। सराय काले खां से मोदीपुरम और मोदीनगर के बीच चलने वाली नमो भारत ट्रेनों के बेड़े में 4 नवंबर, बुधवार से 20 अतिरिक्त फेरे शामिल किए जा रहे हैं। इस कदम का मुख्य लक्ष्य लोगों को निजी कारों और बाइकों की जगह तीव्र सार्वजनिक परिवहन प्रणाली चुनने के लिए प्रेरित करना है। इसके साथ ही दीपावली के त्योहारी सीजन में स्टेशनों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को भी राहत देने की तैयारी की गई है।
जहरीली हवा और कड़े नियमों के बीच राहत की पहल
राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 397 तक पहुंच चुका है, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है। इसी तरह गाजियाबाद और मेरठ जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक तथा आवासीय क्षेत्रों में भी आबोहवा बेहद खराब से गंभीर स्तर पर दर्ज की जा रही है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को नियंत्रित करने के मकसद से ग्रैप-2 की पाबंदियां लागू की गई हैं। इसके अलावा 1 नवंबर की तारीख से चुनिंदा श्रेणियों के वाहनों पर दिल्ली की सीमाओं में दाखिल होने पर रोक भी प्रभावी कर दी गई है। ऐसी परिस्थितियों में तेज और स्वच्छ आवागमन साधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लाइव पार्किंग से सफर होगा आसान
नमो भारत नेटवर्क को अन्य सार्वजनिक परिवहन माध्यमों के साथ बेहद सुगम तरीके से जोड़ा गया है। यात्रियों को सराय काले खां, आनंद विहार, न्यू अशोक नगर तथा गाजियाबाद जैसे विशाल जंक्शनों पर दिल्ली मेट्रो, भारतीय रेल, अंतरराज्यीय बस अड्डों और स्थानीय सिटी बस सेवाओं का सीधा विकल्प मिलता है। निजी गाड़ी से स्टेशन पहुंचने वाले मुसाफिरों के लिए सुरक्षित पार्किंग स्थल भी बनाए गए हैं। मुसाफिर नमो भारत कनेक्ट मोबाइल ऐप का उपयोग करके पार्किंग स्थल खाली होने की ताजा स्थिति देख सकते हैं, जिससे यात्रा की पूर्व योजना बनाना और टिकट सुरक्षित करना काफी सरल हो जाता है।
सड़क पर घटेंगे निजी वाहन, पर्यावरण को मिलेगा सहारा
दैनिक सेवाओं में 20 फेरों का यह विस्तार यात्रियों को नियमित अंतराल पर भरोसेमंद विकल्प मुहैया कराएगा। अधिकारियों की योजना के अनुसार, जब सराय काले खां से लेकर मेरठ तक के मुसाफिरों को हर कुछ मिनटों में तीव्र ट्रेन मिलेगी, तो वे अपनी निजी गाड़ियों को घर पर छोड़ने के लिए आगे आएंगे। सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने से निकलने वाले धुएं में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ पूरे क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम को मिलेगा।



















