टाटा सन्स के चेयरमैन पद पर अगला कार्यकाल न लेने के एन चंद्रशेखरन के निर्णय के बाद टाटा ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया है। ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन के फैसले का स्वागत और सम्मान करते हुए टाटा समूह को नई दिशा देने में उनके बहुमूल्य योगदान की सराहना की है। इसके साथ ही भारत के इस प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने में नए चेयरमैन के चयन की दिशा में प्रशासनिक कदम उठाने शुरू कर दिए गए हैं।
चयन समिति का गठन और नेतृत्व परिवर्तन का रोडमैप
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक वक्तव्य में बताया गया कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने नए चेयरमैन की सिफारिश के लिए एक विशेष चयन समिति बनाने का प्रस्ताव पारित किया है। यह समिति टाटा सन्स के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में दर्ज प्रावधानों के अनुरूप योग्य उम्मीदवार का नाम तय करेगी। ट्रस्ट की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नामांकित डायरेक्टर्स को 12 अगस्त को एन चंद्रशेखरन की ओर से एक ईमेल प्राप्त हुआ था, जिसमें उन्होंने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद इस पद पर न बने रहने की इच्छा जताई थी। ट्रस्ट ने यह आश्वासन दिया है कि चेयरमैन पद का बदलाव समयबद्ध, सुचारु और पूर्णतः व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जाएगा।
पद छोड़ने के निर्णय के पीछे का कारण
एन चंद्रशेखरन के इस फैसले की पृष्ठभूमि में पांच साल के दूसरे कार्यकाल के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति न बन पाना मुख्य वजह रही है। हालांकि टाटा ट्रस्ट ने उनके कार्यकाल को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का समर्थन किया था। इसके अतिरिक्त टाटा सन्स की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी इस विस्तार की सिफारिश की थी। इसके बावजूद बोर्ड के एक सदस्य की असहमति के कारण यह प्रस्ताव सर्वसम्मति हासिल नहीं कर सका। कई महीनों तक स्थिति स्पष्ट न होने के बाद चंद्रशेखरन ने स्वयं इस दौड़ से अलग होने का निर्णय लिया।
वर्तमान कार्यकाल और आगामी व्यवस्था
एन चंद्रशेखरन का चेयरमैन के रूप में मौजूदा पांच साल का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। उन्होंने बोर्ड से आग्रह किया है कि नए उत्तराधिकारी का चयन जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि प्रशासनिक गतिविधियों में किसी प्रकार की रुकावट न आए। आगामी समय में उनकी भूमिका टाटा सन्स बोर्ड में पुनः नियुक्ति की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।



















