त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही आम परिवारों की रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। रोशनी और उल्लास के पर्व दिवाली तथा छठ से ठीक पहले चीनी की खुदरा और थोक कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। घरों में मिठाइयों की तैयारी और रोजमर्रा के खानपान के बीच पिछले एक महीने के भीतर चीनी के दाम चार रुपये प्रति किलो से ज्यादा चढ़ चुके हैं। इस बढ़ोतरी से त्योहारी सीजन के दौरान आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त खर्च का दबाव साफ महसूस होने लगा है।
खुदरा और थोक बाजारों में कीमतों की स्थिति
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देशभर में चीनी का औसत खुदरा भाव बढ़कर 59.50 रुपये प्रति किलो पर दर्ज किया गया है। वहीं थोक मंडियों में चीनी की औसत दर 55.40 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। बीते एक महीने में थोक और खुदरा दोनों ही बाजारों में चीनी की कीमतों में चार रुपये प्रति किलो से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
वार्षिक आधार पर तुलना करने पर कीमतों में आया यह अंतर और भी बड़ा दिखाई देता है। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान खुदरा बाजार में चीनी 46.50 रुपये प्रति किलो के स्तर पर उपलब्ध थी, जो अब बढ़कर 59.50 रुपये प्रति किलो हो चुकी है। इसी प्रकार थोक मंडियों में एक साल पहले चीनी का भाव 43.23 रुपये प्रति किलो था, जो मौजूदा समय में 55.40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इस प्रकार सालाना स्तर पर ग्राहकों और व्यापारियों को प्रति किलो चीनी पर 12 से 13 रुपये तक अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।
महानगरों में कोलकाता सबसे ऊपर, दिल्ली और मुंबई में भी तेजी
देश के प्रमुख शहरों में चीनी की दरों में व्यापक अंतर देखने को मिल रहा है। 3 नवंबर के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कोलकाता में चीनी की खुदरा कीमत सर्वाधिक 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। पिछले साल की समान अवधि में कोलकाता के बाजारों में चीनी 50 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही थी।
देश की राजधानी दिल्ली में भी चीनी की खुदरा दर 64 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई है, जबकि एक वर्ष पूर्व यहां चीनी की कीमत 46 रुपये प्रति किलो थी। आर्थिक राजधानी मुंबई में चीनी के दाम 61 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जहां पिछले साल इसी दौरान भाव 45 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था। इस प्रकार तीनों प्रमुख महानगरों में पिछले वर्ष के मुकाबले दरों में भारी इजाफा दर्ज हुआ है।
कीमतों में उछाल के प्रमुख कारण और सरकारी कदम
चीनी की दरों में आई इस तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख वजह पिछले सीजन के दौरान वास्तविक उत्पादन का पूर्व अनुमान से कम रहना रहा है। इसके साथ ही त्योहारी सीजन के चलते मांग में जोरदार इजाफा हुआ है, जबकि मौसम की अनिश्चितताओं से फसलों को नुकसान पहुंचा है। वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई कम होने और घरेलू स्तर पर जमाखोरी की आशंकाओं ने भी बाजार में दबाव बढ़ाया है।
बाजार में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने कई प्रशासनिक कदम उठाए हैं। इनमें व्यापारियों के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा तय करना, आयात की मात्रा में वृद्धि करना तथा मंडियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त घरेलू आपूर्ति को जल्द से जल्द बढ़ाने के लिए चीनी मिलों में पेराई का काम तय समय से पहले आरंभ कराया गया है।
नए पेराई सत्र 2026-27 में उत्पादन की रफ्तार
आपूर्ति की स्थिति सुधारने के लिए देश में चीनी के नए पेराई सत्र 2026-27 का संचालन तेजी से शुरू कर दिया गया है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर तक देशभर की 152 चीनी मिलों ने कुल 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन पूरा कर लिया है।
चालू नए सीजन में मिलों के भीतर पेराई का कार्य 8 अक्टूबर से ही विधिवत शुरू कराया गया था। मिलों से बाजार में आ रहे इस नए उत्पादन के चलते आने वाले दिनों में आपूर्ति बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा दरों पर इसका अंतिम प्रभाव आने वाले समय में कुल उत्पादन की गति और त्योहारी मांग के संतुलन पर निर्भर करेगा। फिलहाल दिवाली और छठ के मौके पर महंगी चीनी ने उपभोक्ताओं के घरेलू खर्च को बढ़ा दिया है।

















