कार्तिक का महीना शुरू होते ही चारों तरफ एक अनोखा उल्लास देखने को मिलने लगता है, क्योंकि इसी अवधि में इस पूरे अंचल का सबसे बड़ा अनुष्ठान प्रारंभ होता है। उत्सव की छटा हर आंगन में बिखरने लगी है और पारंपरिक लोककला इस पूरे आयोजन को अत्यंत विशिष्ट रूप प्रदान करती है। भागलपुर की लोकगायिका अर्पित चौधरी के अनुसार, इस पूरे अनुष्ठान में पारंपरिक गायन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है, क्योंकि इन गीतों के बिना यह उत्सव अधूरा सा जान पड़ता है। जैसे ही अनुष्ठान की शुरुआत होती है, हर घर से भक्तिमय लोकगीतों के स्वर सुनाई देने लगते हैं।
प्रकृति और आस्था के गहरे तालमेल का प्रतीक
यह धार्मिक आयोजन पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ा हुआ है। कार्तिक मास की षष्ठी तिथि से इस चार दिवसीय महापर्व का विशेष उल्लास लोगों के बीच चरम पर पहुंच जाता है। इस अनुष्ठान का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व इतना व्यापक है कि विदेशों में रह रहे लोग अपने वतन लौट आते हैं और देश के दूसरे हिस्सों में रोजी-रोटी कमाने गए लोग अपने गृह राज्य पहुंच जाते हैं। इसी कारण इस दौरान इलाके की तरफ आने वाली सभी ट्रेनों में भारी भीड़ रहती है और सीटें पूरी तरह भर जाती हैं। समय के साथ यह उत्सव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों और विदेशों में भी बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाने लगा है।
साक्षात सूर्य देव की आराधना और मौसमी फलों की भेंट
धार्मिक मान्यताओं में मूर्ति पूजा का अपना महत्व है, लेकिन इस पर्व में प्रत्यक्ष दिखने वाले सूर्य देव की उपासना की जाती है। ऐसी जनआस्था है कि यदि किसी व्यक्ति की मनोकामना कहीं पूरी नहीं हो पा रही हो, तो वह इस महापर्व के दौरान अपनी प्रार्थना रखे, जिससे उसकी इच्छा पूरी होती है। इस महापर्व की प्रक्रिया में डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित किया जाता है और उसके बाद अगली सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर अनुष्ठान का समापन होता है।
नदी घाटों पर मेले जैसा उल्लास
इस अनुष्ठान में प्रयुक्त होने वाली हर एक सामग्री प्राकृतिक स्वरूप में ही स्वीकार की जाती है। पूजा के दौरान जो भी फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं, वे सभी मौसमी फल होते हैं। अनुष्ठान के दिनों में गंगा के किनारे और विभिन्न जलाशयों के तट पर मेले जैसा भव्य दृश्य दिखाई देता है, जहां श्रद्धालु जनसमूह एक साथ एकत्र होकर पूजा संपन्न करता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण यह अनुष्ठान लोकमानस में सबसे पवित्र और अनूठा स्थान रखता है।



















