अमेरिकी श्रम बाजार के ताजा आंकड़ों से पहले वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल देखने को मिल रहा है। ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से बुधवार को जारी होने वाली रिपोर्ट में निजी क्षेत्र के रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी रहने का अनुमान जताया गया है। बाजार विश्लेषकों के आम अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर में शुद्ध रूप से 69,000 नए निजी रोजगार जुड़ने की संभावना है, जो सितंबर महीने के 90,000 के आंकड़े से साफ तौर पर कम है। हालांकि यह आंकड़ा सुस्ती का संकेत देता है, लेकिन जब तक इसमें कोई बहुत बड़ी अप्रत्याशित गिरावट नहीं आती, तब तक यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की व्यापक गति को गंभीर झटका देने की संभावना नहीं रखता। इसके बावजूद, मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत के राजनीतिक असर और सुरक्षित निवेश की ओर मुड़ते निवेशकों के चलते मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है।
रोजगार अनुमान और आर्थिक आंकड़ों का गणित
अमेरिकी मुद्रा और वित्तीय बाजार दोनों के लिए ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग के रोजगार आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसे अक्सर ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स द्वारा कुछ दिनों बाद जारी की जाने वाली नॉनफॉर्म पेरोल रिपोर्ट की पूर्व-तैयारी के तौर पर परखा जाता है। बुधवार को यह आंकड़ा जीएमटी समयानुसार 13:15 बजे सामने आना तय है। बाजार पहले से ही इस बात का आकलन कर रहा है कि रोजगार वृद्धि में यह गिरावट किसी बड़े आर्थिक संकट का संकेत नहीं, बल्कि एक सामान्य स्थिरीकरण है।
बीते कुछ महीनों के रोजगार रुझान पर नजर डालें तो सितंबर की नॉनफॉर्म पेरोल रिपोर्ट में 29,000 नए रोजगार जुड़े थे, जबकि अगस्त में 1,33,000 नौकरियां जुड़ी थीं। यह उतार-चढ़ाव इस बात की पुष्टि करता है कि अमेरिकी श्रम बाजार में कोई तेज गिरावट दर्ज नहीं की गई है, बल्कि यह धीरे-धीरे स्थिर स्थिति की तरफ बढ़ रहा है। इसलिए जब तक अक्टूबर की निजी रोजगार रिपोर्ट में भारी गिरावट न दिखे, तब तक यह फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति संबंधी योजनाओं में किसी बड़े बदलाव का सबब नहीं बनेगी।
तीसरी तिमाही की जीडीपी और विनिर्माण क्षेत्र का सहारा
अक्टूबर के रोजगार आंकड़ों से ठीक पहले अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अन्य व्यापक आर्थिक संकेतक काफी मजबूत आए हैं, जिन्होंने निवेशकों के भरोसे को मजबूती दी है। पिछले हफ्ते सामने आए तीसरी तिमाही के प्रारंभिक सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था 3.4 प्रतिशत की वार्षिक दर से आगे बढ़ी है। इस वृद्धि में उपभोक्ता खर्च, व्यावसायिक निवेश और सरकारी व्यय का बड़ा योगदान रहा है।
इसके अलावा, सोमवार को आए आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई आंकड़ों ने भी विनिर्माण गतिविधियों में उम्मीद से बेहतर तेजी दर्ज की। इससे यह साफ संदेश गया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने चौथी तिमाही में बेहद मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश किया है। अमेरिकी आर्थिक विशिष्टता की यह धारणा और लगातार बना हुआ मुद्रास्फीति का दबाव केंद्रीय बैंक के लिए सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने का अनुकूल माहौल तैयार करता है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि फ्यूचर्स मार्केट दिसंबर में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत यानी एक चौथाई अंक की बढ़ोतरी की 75 प्रतिशत संभावना जता रहा है।
सेवा पीएमआई और राजनीतिक समीकरणों की चुनौती
बुधवार को रोजगार आंकड़ों के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी आईएसएम सर्विसेज पीएमआई के आंकड़े भी सामने आने वाले हैं। सेवा क्षेत्र के पीएमआई में अक्टूबर महीने के दौरान हल्की नरमी का अनुमान है, लेकिन यह स्तर अभी भी सेवा गतिविधियों के विस्तार और मजबूत कारोबारी माहौल के दायरे में ही रहने की उम्मीद है। जब तक सेवा क्षेत्र से जुड़े इन आंकड़ों में कोई बड़ी गिरावट न आए, तब तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती पर निवेशकों का विश्वास डिगने वाला नहीं है।
हालांकि व्यापक आर्थिक मजबूती के बावजूद ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर को राजनीतिक मोर्चे पर कड़े दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत ने नीतिगत गतिरोध की नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। आईएनजी के विश्लेषक फ्रांसेस्को पेसोले का मानना है कि डेमोक्रेटिक जीत अमेरिकी डॉलर के लिए कई कोणों से हल्की नकारात्मक साबित हो सकती है, जिसमें सरकारी कामकाज ठप होने का बढ़ता जोखिम, ऋण सीमा वार्ताओं में संभावित गतिरोध और पहले से डगमगाए एआई क्षेत्र के सेंटिमेंट को होने वाला नुकसान शामिल है।
डॉलर इंडेक्स का तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी डीएक्सवाई तकनीकी चार्ट पर कमजोर दायरे में कारोबार कर रहा है। शुरुआती अक्टूबर के निचले दायरे के आसपास टिका यह सूचकांक 4-घंटे के चार्ट पर तटस्थ से मंदी की तरफ झुकाव दिखा रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 14 इस समय 44 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो 50 के मध्य स्तर से नीचे होने के कारण कमजोर दिशात्मक मजबूती का संकेत देता है। वहीं एमएसीडी हिस्टोग्राम -0.13 के स्तर पर नकारात्मक बना हुआ है, जबकि एमएसीडी लाइन 0.14 और सिग्नल लाइन 0.27 पर है, जो किसी तेज गिरावट के बजाय लगातार बने हल्के मंदी के दबाव को रेखांकित करता है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स 101.31 पर बंद स्तर दर्ज कर रहा है, जो पिछले 101.87 के बंद स्तर से 0.55 प्रतिशत की गिरावट दिखाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 95.55 से 102.95 तक फैला हुआ है। मूविंग एवरेज संकेतकों में 20-दिवसीय ईएमए 101.78, 50-दिवसीय ईएमए 101.28 और 200-दिवसीय ईएमए 99.94 पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 100.98 और 200-दिवसीय एसएमए 99.67 पर है। हालांकि लंबी अवधि में ईएमए 50 के ईएमए 200 से ऊपर होने के चलते गोल्डन क्रॉस की वजह से लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड बना हुआ है, लेकिन 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड के 101.39 से 102.58 के दायरे में कीमत निचले बैंड के नीचे फिसल चुकी है।
विश्लेषक गुइलेर्मो अल्काला के अनुसार, डॉलर इंडेक्स में प्रवृत्ति का रुख पलटने और देर सितंबर के 101.00 से 100.90 के निचले स्तरों का रास्ता साफ होने के लिए 101.50 के सपोर्ट स्तर का टूटना जरूरी था, जो 22 अक्टूबर और 2 नवंबर का निचला स्तर रहा है। मौजूदा ट्रेडिंग सत्र में इसका पिवट पॉइंट 101.42, पहला रेजिस्टेंस 101.59 और दूसरा रेजिस्टेंस 101.87 है, जबकि तात्कालिक सपोर्ट 101.14 और दूसरा सपोर्ट 100.97 पर मौजूद है। ऊपर की ओर 30 अक्टूबर का उच्चतम स्तर जो 102.00 के ठीक ऊपर है, और 28 तथा 29 अक्टूबर के 102.50 के स्तर प्रमुख बाधा बने हुए हैं, जिसके पार मध्य अक्टूबर में बना 18 महीने का उच्चतम स्तर 102.95 स्थित है।
श्रम बाजार, वेतन वृद्धि और केंद्रीय बैंकों की नीति
किसी भी अर्थव्यवस्था की सेहत को आंकने के लिए श्रम बाजार की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होती है और यह मुद्रा के मूल्यांकन का एक प्रमुख कारक है। उच्च रोजगार स्तर या कम बेरोजगारी से उपभोक्ता खर्च को बल मिलता है, जिससे आर्थिक वृद्धि तेज होती है और स्थानीय मुद्रा की कीमत बढ़ती है। इसके विपरीत, बेहद तंग श्रम बाजार यानी जब उपलब्ध रिक्तियों को भरने के लिए श्रमिकों की भारी कमी हो जाती है, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। श्रम की कम आपूर्ति और ऊंची मांग से वेतन में वृद्धि होती है, जो अंततः केंद्रीय बैंकों को अपनी मौद्रिक नीति सख्त करने पर मजबूर करती है।
नीति निर्माताओं के लिए अर्थव्यवस्था में वेतन वृद्धि की गति पर नजर रखना बेहद जरूरी होता है। जब वेतन तेजी से बढ़ते हैं, तो परिवारों के पास खर्च करने के लिए अधिक पूंजी उपलब्ध होती है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की मांग और कीमतें बढ़ती हैं। ऊर्जा की अस्थिर कीमतों की तुलना में वेतन वृद्धि को बुनियादी और टिकाऊ मुद्रास्फीति का मुख्य घटक माना जाता है, क्योंकि एक बार बढ़े हुए वेतन में कटौती होना बेहद दुर्लभ होता है। इसी कारण दुनियाभर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर निर्णय लेते समय वेतन आंकड़ों की बारीकी से पड़ताल करते हैं।
श्रम बाजार को लेकर अलग-अलग केंद्रीय बैंकों के पास अलग-अलग अधिकार और अधिदेश होते हैं। उदाहरण के तौर पर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पास मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के साथ-साथ अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देने का दोहरा अधिदेश है। इसके उलट, यूरोपीय सेंट्रल बैंक का एकमात्र प्राथमिक लक्ष्य महंगाई को काबू में रखना है। हालांकि विभिन्न कानूनी अधिदेशों के बावजूद, श्रम बाजार के रुझान हर नीति निर्माता के लिए अर्थव्यवस्था की गति और मुद्रास्फीति के सीधे संबंधों को समझने के लिए सबसे अहम संकेतक साबित होते हैं।
वैश्विक मुद्राओं, बॉन्ड यील्ड और सोने की चाल
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में हाउस और सीनेट दोनों जगह डेमोक्रेट्स की जीत के बाद वॉशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की संभावनाओं ने सुरक्षित निवेश प्रवाह को गति दी है। इसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई, जिसने फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ोतरी के दावों के असर को दबाते हुए डॉलर को अतिरिक्त रूप से कमजोर किया है।
करेंसी बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी दो हफ्ते के निचले स्तर से ऊपर 0.6965 के करीब स्थिर बना हुआ है। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अपेक्षाकृत कम सख्त रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित रखा है। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया और एशियाई सत्र के दौरान यह 158.00 के स्तर से नीचे लुढ़क गया, क्योंकि शुरुआती मतों की गिनती के बाद डॉलर एक महीने के निचले स्तर पर आ गया था।
वहीं कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों ने अपनी मजबूत बढ़त को बनाए रखा और यह साप्ताहिक उच्च स्तर के करीब बना रहा। व्यापक स्तर पर डॉलर की कमजोरी के बीच यूरोपीय सत्र के दौरान सोना 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी ऊपर कारोबार करता दिखा। वाशिंगटन में नीतिगत खींचतान की आशंका और बॉन्ड यील्ड में नरमी ने डॉलर पर दबाव डाला, जिसका सीधा लाभ सुरक्षित ठिकाना मानी जाने वाली इस कीमती धातु को मिला है।






















