घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को वित्तीय प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियों के काउंटरों पर अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ गया। कारोबारियों और निवेशकों के बीच यह चर्चा तेजी से फैली कि डिजिटल भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट व्यवस्था को तय समय पर शुरू करने के बजाय आगे खिसकाया जा सकता है। पहले इस नई शुल्क व्यवस्था को 15 अक्टूबर से प्रभावी करने की योजना थी, परंतु अब इसे 1 जनवरी 2026 तक टालने के विकल्प पर विचार चल रहा है। यद्यपि इस मामले में सरकारी स्तर से कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है, फिर भी संभावित देरी की खबर मात्र से निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ गया और भुगतान कंपनियों के शेयर गोता लगाने लगे।
पेटीएम और मोबिक्विक समेत अन्य कंपनियों पर टूटा बिकवाली का कहर
प्रस्तावित व्यवस्था से डिजिटल पेमेंट सेवा प्रदाताओं को भारी आमदनी की उम्मीद बंधी थी, जिस पर अनिश्चितता के बादल छाते ही बाजार में तेज प्रतिक्रिया हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर पेटीएम की पैरेंट कंपनी के शेयर 10 प्रतिशत के लोअर सर्किट जैसी गिरावट झेलते हुए ₹1,560.60 पर बंद हुए। इसी तरह मोबिक्विक के शेयरों में 8.43 प्रतिशत का भारी नुकसान देखा गया और यह फिसलकर ₹234.40 के स्तर पर आ गया।
नुकसान केवल इन्हीं दो दिग्गजों तक सीमित नहीं रहा। पाइन लैब्स के शेयर में 4.95 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और इसका मूल्य घटकर ₹168.75 रह गया। इसके साथ ही नेटवर्क पीपल सर्विसेज टेक्नोलॉजीज के शेयर भी 4.39 प्रतिशत के नुकसान के साथ ₹1,772.60 पर पहुंच गए। वित्तीय बाजार में इन कंपनियों के मूल्यांकन पर इस संभावित फेरबदल का सीधा असर देखने को मिला।
प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था का स्वरूप और राजस्व का गणित
हालिया नीतिगत निर्णय के अनुसार, ₹2,000 से अधिक राशि वाले डिजिटल लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत की दर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की अनुमति दी गई थी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पेमेंट गेटवे और डिजिटल मंचों को उनके तकनीकी ढांचे के एवज में उचित आय उपलब्ध कराना था। जब पिछले महीने इस शुल्क ढांचे की घोषणा हुई थी, तब फिनटेक क्षेत्र के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी क्योंकि इससे कंपनियों के मुनाफे में ठोस बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था। यह शुल्क सीधे व्यापारियों से वसूला जाना तय किया गया था।
तारीख आगे बढ़ाने के पीछे व्यापारियों की मांग
लागू होने की समयसीमा खिसकने के पीछे मुख्य वजह यह सामने आ रही है कि व्यापारिक संगठनों और दुकानदारों ने नई व्यवस्था को तकनीकी रूप से अपनाने के लिए अतिरिक्त मोहलत मांगी है। इसी पृष्ठभूमि में संबंधित नियामक निकाय और प्रशासनिक महकमे 15 अक्टूबर की जगह नई तिथि 1 जनवरी तय करने के प्रस्ताव पर मंथन कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में इस विषय पर औपचारिक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।

















